Shravan Somwar Vrat Katha in Hindi

श्रावण का सम्पूर्ण मास मनुष्यों में ही नही अपितु पशु पक्षियों में भी एक नव चेतना का संचार करता है जब प्रकृति अपने पुरे यौवन पर होती है और रिमझिम फुहारे साधारण व्यक्ति को भी कवि हृदय बना देती है | सावन में मौसम का परिवर्तन होने लगता है | प्रकृति हरियाली और फूलो से धरती का श्रुंगार देती है परन्तु धार्मिक परिदृश्य से सावन मास भगवान शिव को ही समर्पित रहता है |
मान्यता है कि शिव आराधना से इस मास में विशेष फल प्राप्त होता है | इस महीने में हमारे 8 ज्योतिर्लिंगों की विशेष पूजा ,अर्चना और अनुष्ठान की बड़ी प्राचीन एवं पौराणिक परम्परा रही है | रुद्राभिषेक के साथ साथ महामृत्युंजय का पाठ तथा काल सर्प दोष निवारण की विशेष पूजा का महत्वपूर्ण समय रहता है | यह वह मास है जब कहा जाता है जो मांगोगे वही मिलेगा | भोलेनाथ सबका भला करते है |
श्रावण महीने में हर सोमवार Shravan Somwar को शिवजी का व्रत या उपवास रखा जाता है | श्रावण मास में पुरे माह भी व्रत रखा जाता है | इस महीने में प्रत्येक दिन स्कन्ध पुराण के एक अध्याय को अवश्य पढना चाहिए | यह महीना मनोकामनाओ का इच्छित फल प्रदान करने वाला माना जाता है | पुरे महीने शिव परिवार की विशेष पूजा की जाती है |
कब कब है सावन के सोमवार ? | Shravan Somwar Dates in 2016
इस वर्ष 2016 में 20 जुलाई 2016 को श्रावण मास की शुरुवात हुयी थी | इसके बाद से 25 जुलाई को पहला सोमवार , 01 अगस्त को दूसरा सोमवार , 8 अगस्त को तीसरा सोमवार और 15 अगस्त को चौथा सोमवार पड़ेगा | सावन का अंतिम दिन 18 अगस्त को राखी के त्योहार पर होगा | ये सब उत्तरी भारत के पंचागों के अनुसार मान्य है जबकि दक्षिणी भारत में 3 अगस्त से सावन सोमवार शरू होकर 01 सितम्बर को खत्म होगा |
इस मास के सोमवार के उपवास रखे जाते है | कुछ श्रुधालू 16 सोमवार का व्रत रखते है | श्रावण मास में मंगलवार के व्रत को मंगला गौरी व्रत कहा जाता है | जिन कन्याओं के विवाह में विलम्ब हो रहा है उन्हें सावन में मंगला गौरी का व्रत रखना लाभदायक रहता है | सावन की महीने में सावन शिवरात्रि और हरियाली अमावस का भी अपना अलग अलग महत्व है |
क्यों है सावन इतना महत्वपूर्ण | Benefits of Shravan Somwar Vrat in Hindi
सावन के सोमवार Shravan Somwar पर रखे गये व्रतो की महिमा अपरम्पार है | जब सती ने अपने पिता दक्ष के निवास पर शरीर त्याग दिया था उससे पूर्व महादेव को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण किया था | पार्वती ने सावन के महीने में ही निराहार रहकर कठोर तप किया था और भगवान शंकर को पा लिया था | इसलिए यह मास विशेष हो गया और सारा वातावरण शिवमय हो गया |
इस अवधि में विवाह योग्य लडकिय इच्छित वर पाने के लिए सावन के सोमवारों पर व्रत रखती है इसमें भगवान शंकर के अलावा शिव परिवार अर्थात माता पार्वती , कार्तिकेय , नन्दी और गणेश जी की भी पूजा की जाती है | सोमवार को उपवास रखना श्रेष्ट माना जाता है परन्तु जो नही रख सकते है वे सूर्यास्त के बाद एक समय भोजन ग्रहण कर सकते है |
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कैसे करे पूजन | Shravan Somwar Puja Vidhi in Hindi
श्रावण के प्रथम सोमवार प्रात: और सायकाल स्नान के बाद शिव परिवार की पूजा करे | पूर्वमुखी या उत्तर दिशा की ओर मुख करके ,आसन पर बैठकर एक ओर पंचामृत अर्थात दूध ,दही , घी ,शक्कर एवं गंगाजल रख ले | शिव परिवार को पंचामृत से स्नान करवाए | फिर चन्दन ,फुल , फल ,सुगंध ,रोली और वस्त्र अदि अर्पित करे |
शिवलिंग पर सफेद पुष्प ,बेलपत्र ,भांग , धतुरा ,सफेद वस्त्र एवं सफेद मिष्ठान चढाये | गणेश जी को दूर्वा यानि हरी घास ,लड्डू या मोदक , एवं पीले वस्त्र अर्पित करे | भगवान शिव की आरती या शिव चालीसा पढ़े | गणेश जी की आरती धुप दीप से करे | शिव परिवार से अपने परिवार की सुख समृधि के लिए हाथ जोडकर मन से प्रार्थना करे |
महादेव की स्तुति दिन में दो बार की जाती है |सूर्योदय पर ,फिर सूर्यास्त के बाद | पूजा के दौरान 16 सोमवार की व्रत कथा और सावन व्रत कथा सुनाई जाती है |पूजा का समापन प्रसाद वितरण से किया जाता है | शिव मन्त्र का जाप अत्यंत उपयोगी माना गया है अन्यथा आप साधारण एवं सर्वप्रिय पंचाक्षरी मन्त्र “ॐ नम: शिवाय ” और गणेश मन्त्र “ॐ गं गणपतये नम:” का जाप करते हुए सामग्री चढ़ा सकते है |
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