
प्रत्येक भारतीय के लिए हर वर्ष मनाया जाने वाला दिवाली (Diwali) त्यौहार सभी त्योहारों में सर्वाधिक महत्व रखता है | भारत में दीवाली (Diwali) सदियों से मनाई जा रही है | जाहिर है कि इसके साथ का श्ताव्ब्दियो का इतिहास जुदा हुआ है | खंगाले तो तो इतिहास एवं पुराणो में कई तथ्य मिलते है जिन्होंने विभिन्न मान्यताओ को जन्म दिया | इन्ही तथ्यों के चलते इसे मनाने के पीछे किसी एक मान्यता को पक्का नही कहा जा सकता है इसलिए आइये इस पावन पर्व पर दीपावली (Diwali) से जुडी पौराणिक और एतेहासिक कथाये आपको बताते है |
01 दिवाली से जुड़े पौराणिक तथ्य | Mythological Facts of Diwali in Hindi
श्रीराम आये अयोध्या वापस – धार्मिक ग्रन्थ रामायण ने यह कहा गया है कि जब 14 साल के वनवास के बाद राजा राम , लंका नरेश रावण का वध करके और सीता को रावण के चंगुल से छुड़ाकर जब वापस अयोध्या लौटे थे तो अयोध्या में त्यौहार का वातावरण था | राम लक्ष्मण और सीता के सकुशल अयोध्या लौटने की खुशी में अयोध्यावासियों ने अयोध्या को असंख्य दीपो से सजाया था | अपने भगवान के आने की खुशी में अयोध्या नगरी दीपो की रोशनी से नहा उठी थी |
नरकासुर का वध – भगवान कृष्ण ने दीपावली से एक दिन पहले नरकासुर का वध किया था | नरकासुर एक दानव था और उसने तीनो लोको को त्रस्त कर रखा था | स्वर्ग के राजा इंद्र को पराजित कर दिया था | इंद्र इससे परेशान होकर श्रीकृष्ण के पास गये और उन्होंने श्रीकृष्ण से मदद माँगी | श्रीकृष्ण ने नरकासुर को युद्ध के लिए ललकारा और उसे पराजित कर दिया | वहा से कृष्ण ने 16000 कन्याओं को उसके चंगुल से छुडाया था | इसी कारण बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में दीपावली पर्व मनाया जाता है |
माँ लक्ष्मी की उत्पति – क्षीरसागर में देवताओं और असुरो द्वारा समुद्रमंथन किया गया था और दीपावली के दिन ही माँ लक्ष्मी समुद्र मंथन से उत्पन्न हुयी थी | उत्पति के उपरान्त माँ लक्ष्मी ने सम्पूर्ण जगत को सुख समृधि का वरदान दिया | इसलिए दीपावली पर माँ लक्ष्मी की पूजा की परम्परा है | ऐसी मान्यता है कि सम्पूर्ण श्रुधा से पूजा करने से वे भक्तो पर प्रसन्न होती है |
दानवीर बलि को वरदान – मान्यता है कि वामनावतार में भगवान विष्णु ने दैत्यराज बलि को वरदान दिया था कि प्रतिवर्ष कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी से कार्तिक अमावस्या तक तीन दिन समस्त लोको पर उसका (बलि का ) राज रहेगा और पृथ्वीवासी इस दिन दीपोत्सव मनाएंगे एवं दीपदान करेंगे
पांडव लौटे थे हस्तिनापुर – महाभारत के आदिपर्व में उल्लेखित है कि पांडव इसी दिन अज्ञातवास एवं वनवास समाप्त कर हस्तिनापुर लौटे थे | तब प्रजाजनों ने उनके आने की खुशी में दीप्मालिकाओ से नगर को जगमगा दिया था |
श्रीकृष्ण पहली बार गये थे गाये चराने – मान्यता है कि कार्तिक अमावस्या के दिन ही भगवान श्रीकृष्ण पहली बार ग्वाल बालो के साथ गाये चराने गये थे | गोकुलवासियो ने सांयकाल उनके लौटने पर दीपमालिकाये जगमगा कर उनका स्वागत किया था |
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| तिथि | वार | त्यौहार |
| 4 नवम्बर 2018 | रविवार | द्वादशी , गोवत्स द्वादशी, वासु बारस |
| 5 नवम्बर 2018 | सोमवार | त्रयोदशी , धन त्रयोदशी, धनतेरस, यम दीपम |
| 6 नवम्बर 2018 | मंगलवार | चतुर्दशी , काली चौदस, हनुमान पूजा |
| 7 नवम्बर 2018 | बुधवार | अमावस्या ,लक्ष्मी पूजा ,दिवाली पूजा |
| 8 नवम्बर 2018 | शुक्रवार | गोवर्धन पूजा ,अन्नकूट |
| 9 नवम्बर 2018 | शनिवार | भाई दूज ,यम द्वितीय |
02 दिवाली से जुड़े एतेहासिक तथ्य | Historical Facts of Diwali in Hindi
सम्राट अशोक का विजय अभियान – सम्राट अशोक ने इसी दिन दिग्विजय अभियान शुरू किया था | प्रजाजनों ने दीपमालिकाये जलाकर उनका अभिनन्दन किया था |
विक्रमादित्य का राज्याभिषेक – उल्लेख है कि इसी दिन सम्राट विक्रमादित्य का राज्याभिषेक होने तो कही उनके विजय प्राप्त कर लौटने के अवसर पर उनके स्वागत में दीपमालिकाये जलाई गयी थी |
स्वामी दयानन्द सरस्वती का परलोकगमन – आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानन्द सरस्वती , जिन्होंने अनेको सामाजिक कुरीतियों से जनता को सचेत कर वैदिक संस्कृति का पक्ष लिया और समाज में जाग्रति लाने का काम किया , इस महापुरुष की मृत्यु दीपावली के दिन ही हुयी थी |
शंकराचार्य को पुनर्जीवन – चार वेदों के अध्येता ,सनातन धर्म के प्रचारक शंकराचार्य जी के निर्जीव शरीर को जब चिता पर रखा गया था तब सहसा उनके शरीर में इसी दिन पुन: प्राणों का संचार हुआ था |
स्वामी रामतीर्थ का जन्म और महाप्रयाण – वेदों के प्रकांड ज्ञाता और विद्वान स्वामी रामतीर्थ का जन्म इसी दिन पंजाब में हुआ था | जब उनका जमन गृहस्थ जीवन में नही लगा तो वे सन्यासी बन गये | मात्र 33 वर्ष की आयु में उन्होंने भागीरथी नदी में जल समाधि ले ली |
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03 दिवाली के विभिन्न धर्मो से जुड़े तथ्य
सिख धर्म में दीवाली Diwali का दिन ख़ास महत्व रखता है और सिख धर्म के लोग इस दिन “बंदी छोड़ दिवस” के रूप में भी मनाते है क्योंकि 1619 में दीवाली के दिन ही सीखो के छठे गुरु हरगोविंद सिंह जी ग्वालियर के किले से आजाद होकर स्वर्ण मन्दिर पहुचे थे | जहांगीर की कैद से रिहा होने की खुशी में भी दीपोत्सव मनाया जाता है |
बौद्ध धर्म में गौतम बुद्ध 17 वर्ष बाद इस दिन अनुयायियों के साथ गगृह नगर कपिलवस्तु लौट थे | तब नगरवासियों ने उनके स्वागत में लाखो दीप जलाकर दीपावली Diwali मनाई थी | महात्मा बुद्ध ने अपने प्रथम प्रवचन के दौरान “अप्पो दीपो भव” का उपदेश देकर दीपावली को नया आयाम दिया |
जैन धर्म में इस दिन भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में मनाते है | जैन धर्म के 24वे तीर्थंकर भगवान महावीर ने भी दीपावली के दिन ही बिहार के पावापुरी में अपना शरीर त्यागा था | महावीर निर्वाण संवत्सर इसके दुसरे दिन से शुरू होता है इसलिए अनेक प्रान्तों में इसे वर्ष के आरम्भ की शुरुवात मानते है | दीपोत्सव का वर्णन प्राचीन जैन ग्रंथो में भी है | कल्पसूत्र में कहा गया है कि महावीर निर्वाण के साथ जो अंतर्ज्योति बुझ गयी है आओ उसकी क्षतिपूर्ति के लिए बहिर्ज्योती के प्रतीक दीप जलाए | जैन इस दिन निर्वाण दिवस के रूप में मनाते है |
04 मुगलकालीन दिवाली | Mughals Diwali in Hindi
अकबर के दौर से शुरू हुआ मुगलकालीन दीवाली की शुरुवात – अबुल फजल कृत आईने अकबरी के अनुसार दीपावली बादशाह अकबर का सबसे प्रिय त्यौहार था | इस दिन किले पर एक विशाल दीपक प्रज्वलित किया जाता था | इसमें दो मन तेल जाता था फिर इसे दीपक से किले एवं महल के दुसरे दीपक जलाए जाते थे | दौलतखाने के सामने के चार गज का “आकाशदीप ” लटकाया जाता था |
अकबर देते थे ग्वालो को पुरुस्कार – दीपावली के दिन बादशाह अकबर एक विशेष दरबार लगाकर हिन्दू दरबारियों को मुबारकबाद देकर मिठाइया एवं पुरुस्कार प्रदान करते थे | दीपावली के दुसरे दिन होने वाली “गोवर्धन पूजा ” में भी बादशाह शामिल होते थे | इस दिन वह हिन्दू परिधान पहनते थे और सुंदर सजी हुयी गायो के ग्वालो को पुरुस्कृत भी करते थे |
जहांगीर को था दीवाली की आतिशबाजी का शौक – अकबर के वारिस जहांगीर (1605-1627) भी दीपावली को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाते थे | इस दिन को वह शुभ मानकर खूब जुआ खेलते थे | राजमहल एवं रनिवास रंगबिरंगे रोशनियों से सजाये जाते थे | सम्राट जहांगीर रात्रि को अपनी बेगम के साथ आतिशबाजी का आनन्द भी लेते थे |
शाहजहा देते थे सेवको को दीवाली का इनाम – शाहजहा (1627-1657) तथा उसके उत्तराधिकारी दाराशिकोह (1657-1658) भी अपनी शान-ओ-शोकत के साथ दीपावली के त्यौहार को मनाया करते थे | इस मौके पर वह अपने सेवको को इनाम और बख्शीस भी देते थे | रात्रि की रोशनी देखने के लिए शाही सवारी निकलती थी |
औरंगजेब ने भी कुछ वर्ष मनाई थी दीवाली – सबसे धार्मिक कट्टर औरंगजेब (1658-1707) भी अपने शाषनकाल के शुरुआत के कुछ वर्षो तक दीपावली में शिरकत करता रहा था लेकिन बाद में उसने यह परम्परा तोड़ दी थी |
शाह आलम ने अपनी पुस्तक में दीवाली के जश्न किया था बयाँ – शाहआलम द्वितीय (1759 -1806 ) भी बड़ी धूमधाम से दीपावली मनाता था | उसकी स्वयं लिखित पुस्तक “नादिराते शाही ” से पता चलता है कि उसने दीपावली पर्व को अनेक राग रागिनियो से बद्ध किया था | इस अवसर पर सारे महल की सफाई और रंगाई की जाती थी |दीपावली के दिन राजमहल में हजारो दीप जलाकर रोशनी की जाती थी |शाही परिवार एकम दरबारी नये नये वस्त्र पहनते थे | अमीर गरीब के सारे भेद भुलाकर परस्पर मूबारकबाद दी जाती थी |
अंतिम मुगल सम्राट की दीवाली – मुगल सलतनत के अंतिम सम्राट बहादुरशाह जफर भी दीवाली के त्यौहार को जनता के साथ मनाते थे और दीवाली पर होने वाले कार्यक्रमों में भाग लेते थे | मुगलों की यह अंतिम दीवाली थी जिसके बाद मुगल सल्तनत का पतन हो गया था और ब्रिटिश राज का आगमन हुआ था |
05 भारत के विभिन्न राज्यों दीपावली के विविध स्वरूप
राजस्थान की दीवाली – वीरभूमि कही जाने वाली राजस्थान की धरती पर शस्त्रों की पूजा करने की परम्परा है | शस्त्रों की घर घर में पूजा होती है और अधिकांश स्थानो पर शस्त्र कौशल का प्रदर्शन भी किया जाता है | राजस्थान के कुछ भागो में बिल्ली को लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है | पूजा के बाद सर्वप्रथम मिठाइयो का प्रसाद बिल्ली को खिलाते है | इस दिन यदि बिल्ली नुकसान भी कर दे तो उसे भगाते मारते भी नही है |
हिमाचल की दीवाली – हिमाचल में दीपावली Diwali के एक माह बाद एक ओर दीपावली मनाते है जिसे बुढी दीपावली कहते है | कहा जाता है कि भगवान श्रीराम लंका विज्योप्रांत अयोध्या लौटे तो पुरे देश को खबर हो गयी कि कार्तिक अमावस्या को पुरे देश में दीपावली मनी लेकिन हिमाचलवासियों को एक बाद यह खबर मिली तो वहा एक माह बाद दीपावली मनी इसलिए यहा के अधिकाँश भागो में एक माह बाद बुढी दीपावली मनाने का चलन है |
महाराष्ट्र की दीवाली – महाराष्ट्र में दीपावली Diwali पर लक्ष्मी और गणेश का पूजन तो होता ही है यहा यम पूजा भी प्रसिद्ध है | यमराज की पूजा कर उन्हें दीपदान दिया जाता है | कुछ स्थानों पर दैत्यों के राजा बलि की भी पूजा की जाती है |
प.बंगाल की दीवाली – प.बंगाल का मुख्य पर्व है दुर्गा पूजा | यहा दीपावली पर अधिकाँश घरो में महाकाली की पूजा होती है | इस दिन बंगाल की युवतिया रात को दीप जलाकर नदी में प्रवाहित करती है | मान्यता है कि जिसका दीप तैरते हुए जलता रहेगा जबकि उसका तेल खत्म न हो जाए , उस युवती को उस वर्ष सुख शान्ति और समृधि मिलगी |
मध्यप्रदेश की दीवाली – मध्यप्रदेश में दीवाली पूजा से पूर्व महिलाये घर को सजाती संवारती है तथा खुद भी सजती संवरती है | यहा भी राजा बलि की पूजा होती है |
गुजरात की दीवाली – लक्ष्मी पूजा के साथ शक्ति पूजा गुजरात में दीपावली पर होती है | इस दिन गुजरात में नमक खरीदना और बेचना शुभ माना जाता है | यहा महिलाये कच्चे घड़े ,आटे और चावल से घर को सजाती है |
उत्तर प्रदेश की दीवाली– उत्तर प्रदेश में Diwali दीपावली वैदिक रीती रिवाज से मनाई जाती है | यहा इस दिन मन्दिरों को विशेष रूप से सजाते है | यहाँ भे शस्त्र पूजा होती है | लक्ष्मी गणेश के अलावा हनुमान ,राम श्री कृष्ण की भी पूजा होती है |उतरांचल में महिलाये घरो में रंगोली सजाती है |
कर्नाटक की दीवाली – कर्नाटक में लोग लक्ष्मीपूजा के साथ धरती पूजा भी करते है | धरती पूजा वे नई फसल के आने की खुशी में करते है | इस दिन यहा शरीर पर उबटन मल कर स्नान करते है | उबटन के दौरान नरकासुर वध की कथा कही और सूनी जाती है |
गोवा की दीवाली – गोवा में दीपावली का त्यौहार नरक चौदस से शूरू होता है | यहा पर घरो को कंदील ,आम के पत्तो और दियो से सजाया जाता है | यहा के लोग पोहा और अलग अलग मिठाइयो से इस उत्सव को मनाते है |
06 विदेशो की दिवाली
श्रीलंका में दीपावली Diwali राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाता है | घरो को दीपकों एवं रंगीन रोशनी से सजाते है | रात्रि को आतिशबाजी करते है |
नेपाल में तो भारत की थर की दीपावली मनाते है | इस पर्व को वहा तिहर कहते है |
मॉरिसश में दीवाली Diwali के दिन घी के दीपक जलाने की परम्परा है | यह कार्य अविवाहित या नवविवाहित युवतिया करती है | यहा भी दीवाली राम के अयोध्या लौटने की खुशी में मनाते है |
म्यांमार में दीपावली के दिन तैमीच नामक त्यौहार मनाया जाता है | इस दिन बौद्ध लोग मथो में जाकर महात्मा बुद्ध की पूजा करते है | वहा लोग इसे बुद्ध का अवतरण दिवस मनाते है |
ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के अनेको लोग रहते है और साथ ही ऑस्ट्रेलिया के लोग भी सभी एक जगह इकट्ठे होकर Federation square नामक स्थान पर दीवाली मनाते है | पिछले वर्ष तो यहा 50 हजार से भी ज्यादा लोगो ने दीवाली की उपस्थिति दर्ज की थी |
फीजी में दीपावली को पब्लिक हॉलिडे रखा जाता है और विभिन्न धर्मो के लोग हिन्दुओ के साथ मिलकर यहा दीवाली मनाते है | 1970 में फिजी के आजाद होने के बाद इसे प्रतिवर्ष मनाया जाता है |
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