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जानिये भारत से बाहर कैसा होता है दिवाली का जश्न | Diwali Celebration Outside India in Hindi

जानिये भारत से बाहर कैसा होता है दिवाली का जश्न | Diwali Celebration Outside India in Hindi
जानिये भारत से बाहर कैसा होता है दिवाली का जश्न | Diwali Celebration Outside India in Hindi

दुनियाभर में धूम है दिवाली जी | भारतीय संस्कृति की समझ और भारतीय मूल के लोगो के वैश्विक प्रयास के कारण दीपावली मनाने वाले देशो की संख्या लगातार बढ़ रही है | श्रीलंका , पाकिस्तान ,म्यांमार , ,थाईलैंड ,मलेशिया ,सिंगापूर , इंडोनेशिया , ऑस्ट्रेलिया , न्यूजीलैंड , फिजी , मारीशस , केन्या , तंजानिया  , दक्षिण अफ्रीका ,गुयाना  ,सूरीनाम , त्रिनिदाद और टोबेगो , नीदरलैंड , कनाड़ा , ब्रिटेन , संयुक्त अरब अमीरात से लेकर सयुंक्त राज्य अमेरिका तक में दीपावली को विशेष रूप से हिन्दू , जैन और सिख समुदाय के लोग मनाते आये थे लेकिन पिछले कुछ समय से वहा के स्थानीय लोगो की भागीदारी और दिलचस्पी काफी बढी है |
तमाम देशो में यह त्यौहार वहा के स्थानीय संस्कृति का हिस्सा बनता जा रहा है हालांकि तमाम जगहों पर दिवाली मनाने के कारण भले अलग है लेकिन इन अनेक दीपो को ज्योति का संदेश एक है है  -अज्ञान पर ज्ञान , अँधेरे पर प्रकाश और असत्य पर सत्य की विजय | नेपाल , भारत , श्रीलंका ,म्यांमार ,मारीशस ,गुयाना ,त्रिनिदाद और टोबेगो ,सूरीनाम ,मलेशिया ,सिंगापूर ,फिजी , पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया की बाहरी सीमा पर स्तिथ क्रिसमस द्वीप पर दीवाली एक सरकारी अवकाश है | आइये अब विस्तार से इन देशो में दिवाली मनाने के तरीके को जानते है |

श्रीलंका

श्रीलंका में यह पर्व बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर बौद्ध धर्मावलम्बी सिंहली तीन दिनों तक मनाते है | हमारे देश में जिस प्रकार मिटटी से बने खिलौने बनाकर बेचे जाते है उसी प्रकार श्रीलंका में हर गली चीनी मिटटी से बने खिलौनों से सज जाती है | यहा मिश्री से बनी अनेक प्रकार की आकृतिया भी काफी संख्या में बिकती है | श्रीलंका में इस त्यौहार पर मिठाई के बजाय मिश्री की डली खाते है और रात को रोशनी जलाई जाती है | इस पर्व पर पूरा देश रंग बिरंगे प्रकाश से जगमगा उठता है |

जापान

जापान में इस पर्व को “तोरोनगाशी” कहते है | तोरोनगाशी में ज्योतिपर्व यानि रोशनी की अपनी महत्ता है | यहा के वासियों का मानना है कि दीपावली पर सुख समृधि की प्राप्ति होती है | यहा दीपावली सितम्बर महीने में मनाई जाती है | लोग अपने घरो की सफाई कर सजाते है और रात में रोशनी जलाकर प्रकाश की देवी कस स्वागत करते है | यहा आस पास वृक्षों तथा बागो के पेड़ो पर लालटेन या कंदीले टांग देते है | रात को नाच गाने का धूमधाम से आयोजन किया जाता है | दिवाली की रात को घर का दरवाजा बंद नही किया जाता और न ही उस दिन झाड़ू लगाया जाता है |

नेपाल

नेपाल में इस उत्सव को “तिहार ” कहा जाता है और पांच दिनों तक यह पर्व मनाया जाता है | तिहार पर्व का प्रारम्भ “काक दिवस ” से होता अहि | यह पर्व के स्वागत का दिन होता है | धार्मिक अन्धविश्वासो से मान्यता रखने वाले लोग अलग अलग ढंग से पूजन करते है | पहले दिन यहाँ कौवो की पूजा की जाती है | इस दिन नेपाल वासी कौवो को चावल आदि खाद्य पदार्थ खिलाते है और उसके बाद लक्ष्मी के आगमन की कल्पना करते है |
पर्व का दूसरा दिन “श्वान दिवस ” के रूप मनाया जाता है | नेपाल वासी अपनी धार्मिक परम्परा के अनुसार श्वान को भैरव का वाहन मानते है | इस दिन कुत्तो को विशेष प्रकार का भोजन तैयार कर खिलाया जाता है | इस दिन श्वान को वन्दनीय माना जाता अहि | उसके माथे पर लाल टीका और गले में फूलो की माला पहनाकर उसकी आरती उतारी जाती है |
तीसरा दिन तिहोर का होता अहि | इस दिन रात में दिये जलाकर गली गली में प्रकाश किया जाता है | यहा के लोगो की मान्यता है कि दीपावली का पर्व मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के लंका पर विजय प्राप्त कर अयोध्या लौटने की स्मृति में मनाया जाता है | इस दिन यह भी धन की देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है | नेपाल में चौथे दिन यम पूजा होती है और पांचवे और अंतिम दिन भैया दूज का पर्व मनाया जाता है |

चीन

चीन में दिवाली “आलोक पर्व” के रूप में मनाई जाती है जिसे “तेंगचीह ” कहा जाता है | इस दिन यहाँ चारो ओर रोशनी ही रोशनी विखेरी जाती है और घर बाहर नगर सभी जगमग हो जाते है | तरह तरह के कंदील टाँगे जाते है | इन कंदीलो में पहेलियाँ लिखने की रीति है और जवाब देने वाले को इनाम भी दिया जाता है | यहा ऐसी मान्यता है कि पटाखे छोडकर चीनी लोग “रसोई देवता” को विदाई देते है | उनका मानना है कि हर रसोईघर में देवता होता है जो उस घर के अच्छे बुरे कार्यो का हिसाब किताब रखता है | इस तरह चीन वासी दीप जलाकर और पटाखों को छोडकर रसोई देवता को विदा करने का पर्व मनाते है |

सिंगापूर

सिंगापुर में दिवाली पर राजपत्रित सार्वजनिक अवकाश रहता है | वहा की सरकार के साथ साथ सिंगापूर का हिन्दू बंदोबस्ती बोर्ड इस उत्सव के दौरान कई कार्यक्रम आयोजित करता है | सिंगापूर ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ने दीवाली मनाने का एक अनूठा तरीका खोजा है | सिंगापुर सरकार का यह प्रयास वहा कर रहे भारतीय मूल के साथ पर्यटकों को भी खूब भा रहा है | यह बताता है कि त्यौहार किसी खास समुदाय के नही होते बल्कि समाज के सभी लोगो को आपस में जोडकर रखने के मकसद ही शुरू किये जाते है |

न्यूजीलैंड -दक्षिण एशियाई प्रवासियों का पर्व

न्यूजीलैंड में दिवाली भारतीय संस्कृति ही नही बल्कि वहा बसे दक्षिण एशियाई प्रवासी सांस्कृतिक समूहों द्वारा साथ मिलकर मनाया जाने वाला पर्व है | न्यूजीलैंड में एक बड़ा समूह दीवाली मनाता है जिसमे भारत -फिजी समुदायों के लोग शामिल होते है | 2003 से न्यूजीलैंड की संसद में भी दीपावली मनाई जा रही है | माँ लक्ष्मी को पूजा जाता है | वहा कई तरह की मिठाइयो और व्यंजनों से मेहमानों का स्वागत दीवाली को सामजिक सम्पर्क का एक ख़ास मौका भी बना देता है |

फिजी – पुरे साल रहता है दीपावली का इंतजार

फिजी में तो मानो पूरा फिजी ही दिवाली मनाता है | हर पन्थ समुदाय के लोग पुरे साल दीपावली के आने की प्रतीक्षा करते है | आतिशबाजी और दीपावली का जश्न एक सप्ताह पहले ही शुरू हो जाता है | इस दिन सार्वजनिक अवकाश रहता है | फिजी की आबादी का करीब एक तिहाई भाग हिन्दू है | वे अपने इस धार्मिक त्यौहार को यहाँ रहने वाले बाकी सभी लोगो के साथ मनाते है |फिजी ब्रिटिश शाशन के दौरान उपनिवेश रहा है और 19वी सदी के दौरान भारतीय उपमहाद्वीप से गये गिरमिटिया मजदूरों ने इसके विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है | फिजी में तीन बड़े पंथिक समुदायों के लोग रहते है -ईसाई ,हिन्दू और इस्लाम | दीवाली पर वे सभी हिन्दुओ के साथ साझा होकर यह पर्व मनाते है
फिजी में दिवाली पारम्परिक धार्मिक उत्सव तो है ही , इसके साथ ही यह एक वृहद सांस्कृतिक उत्सव भी है | फिजी में में बाजरो को दीपावली आने की प्रतीक्षा रहती है क्योंकि इस दौरान वस्तुओ की खरीददारी बहुत बढ़ जाती है | भारत की तरह तमाम जगहों पर मूल्य में छुट के साथ सेल लगती है | फिजी में दीपावली समारोह ने जैसे वहा के मुख्य सामजिक और सांस्कृतिक समारोह का रूप ले लिया है | यहाँ पर घर के जरुरी सामानों और उपहार में देने के लिए जमकर खरीददारी होती है | घरो और बाजारों में खूब जगमग रहती है |

मारीशस – लगेगा आप भारत में ही है

अफ्रीकी हिन्दू बहुल देश मारीशस में दीपावली पर आधिकारिक अवकाश होता है | यु अगर भारत कही बिलकुल भारत जैसी खूबसूरती और भारी उत्साह से दीपावली मनती है तो उनमे एक प्रमुख जगह है मारीशस | पूरा देश जगमगाता है दीपावली पर | हर जगह रोशनी और उत्सवी माहौल | मारीशस की 63 प्रतिशत आबादी भारत से आये लोगो की है उनमे भी 80 प्रतिशत हिन्दू है | वहा यह त्यौहार भगवान राम की रावण पर या भगवान कृष्ण की राक्षस नरकासुर पर विजय के उत्सव के रूप में मनाया जाता है | घरो से भीतर -बाहर तेल के दिए जलाए जाते है | पूरा द्वीप रोशनी से नहाया अठखेलियाँ करता नजर आता है | व्यापारी इस दिन अपने खातो की पूजा करते है

अमेरिका  – गैर हिन्दू भी मनाते है जश्न

अमेरिका में तीन लाख से ज्यादा हिन्दू रहते है | हिन्दू तो दीपावली मनाते ही है White House तक में दिवाली मनाई जाती है | 2003 में पहली बार White House में दीपावली मनाई गयी थी | फिर पूर्व राष्ट्रपति जोर्ज बुश ने 2007 में अमेरिकी कांग्रेस में इसे आधिकारिक दर्जा दिलाया | 2009 में बराक ओबामा White House में व्यक्तिगत रूप से दीपावली में भाग लेने वाले पहले राष्ट्रपति बने \ सयुंक्त राज्य अमेरिका में राष्ट्रपति के पूर्व में भारत की अपनी पहली यात्रा से पूर्व संध्या पर ओबामा ने दीपावली की शुभकामनाएं बांटने के लिए एल आधिकारिक ब्यान भी जारी किया था |

ब्रिटेन – नेता भी आते है समारोह में

दिवाली पर पूरा ब्रिटेन दिवालीमय हो जाता है | ब्रिटेन में विभिन्न पन्थो और देशो के लोग बड़ी संख्या में रहते है | दीपावली भले हिन्दुओ का त्यौहार हो लेकिन दुसरे समुदायों के लोग भी इसमें उत्साह से भाग लेते है | यहाँ तक कि नेता बहे दीपावली के अवसर पर हिन्दुओ के मन्दिर में जाते है और भारतीयों को बधाई देते अहि | 2009 से प्रतिवर्ष ब्रिटिश प्रधानमंत्री के निवास स्थान पर दीपावली मनाई जा रही है | यह भारतीयों की वहा के समाज में बढती स्वीकार्यता का प्रमाण है |
ब्रिटेन में अब गैर हिन्दू नागरिक भी भारतीयों के इस उत्सव की उत्सुकता से प्रतीक्षा करते है और इसमें शामिल होते अहि | पिछले एक दशक के दौरान ब्रिटेन के नेताओं और राजपरिवार में दीपावली समारोह में शामिल होने का चलन बढ़ा है | उन्होंने इसे ब्रिटेन की तरक्की में भारतीय समुदाय की प्रशंशा करने के एक अवसर के रूप में लिया है इसी के साथ ब्रिटेन में दीपावली की लोकप्रियता और प्रसस्संगिकता बढी है | प्रिंस चार्ल्स और अन्य ब्रिटिश नेता भी मन्दिरों में इस दिन जाकर दीपावली समारोहों में शामिल होते है |

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