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महालक्ष्मी पूजन और दीपावली पूजन का शुभ मुहूर्त | Diwali Puja Vidhi in Hindi

महालक्ष्मी पूजन और दीपावली पूजन का शुभ मुहूर्त | Diwali Puja Vidhi in Hindi
महालक्ष्मी पूजन और दीपावली पूजन का शुभ मुहूर्त | Diwali Puja Vidhi in Hindi

कार्तिक मास की अमावस्या को बड़ी दीपावली मनाई जाती है | इस दिन धन की देवी लक्ष्मी एवं गणेश जी की पूजा की जाती है | इस दिन रामचन्द्रजी ,सीता जी और लक्ष्मण जी 14 वर्ष का वनवास पूरा करके वापस अयोध्या लौटे थे तब अयोध्यावासियो ने राम के राज्यारोहण पर दीपमालाए जलाकर महोत्सव मनाया था | इस दिन बही खातो और तिजोरी की पूजा की जाती है | लक्ष्मी जी ,गणेश जी के दाहिने बिराजती है क्योंकि वे गणेश जी की माता स्वरूप है | इस दिन लक्ष्मी की को प्रसन्न करने के लिए घर को सजाया जाता है | हिन्दू धर्म का यह सबसे बड़ा त्यौहार है | घर की बड़ी स्त्रियाँ लक्ष्मी जी का व्रत रखती है

पूजन की सामग्री | Diwali Puja Samagri in Hindi

11 या 21 चाँदी के सिक्के | इन्हें रखने के लिए एक थाली ले | मिटटी के दीपक को धोकर थाली में सजा ले | इनके बीच मिटटी का एक चौमुखा दीपक रखे | माचिस ,कोयला ,तिल या सरसों का तेल , रुई की बत्तिया , कच्चा दूध ,जल से भरा लोटा , दुब लक्ष्मी जी और गणेश जी की तस्वीर (हर दीपावली एक नये चित्र की पूजा करते है ) पूजा की चौकी पर बिछाने के लिए नया लाल रंग का कपड़ा , पांच तरह की मिठाई ,लक्ष्मी जी के भोग के लिए पांच लड्डू रखे | एक गिलास में पानी भी रखे | लक्ष्मी जी के बैठने के लिए एक पीढ़ा , रोली चावल  , धुप का डब्बा ,अगरबत्ती ,फुल माला और फुल आदि | मुख्य द्वार और पूजा के कमरे के दीवार पर आम के पत्ते की बन्दनवार लगाई जाती है |

पूजन की विधि | Diwali Puja Vidhi in Hindi

एक चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर लक्ष्मी जी और गणेश जी की तस्वीर रखे | इसके बाद मौल्री और फुल माला चढाये | रोली से तिलक कर चावल लगाये | थाली के दीपक प्र्ज्वलित्त करे | चांदी के सिक्को को एक छोटी थाली में साफ़ कपड़ा बिछाकर सजाये | इसके बाद इन पर रोली और चावल चढाये | लक्ष्मी जी और गणेश की तस्वीर पर फुल चढाये | अगरबत्ती और धुप जलाए | भगवान के लड्डू का भोग लगाये |
तिजोरी में गणेश जी और लक्ष्मी जी की मूर्ति रखकर विधिवत पूजन करे | पूजा के बाद घर के सभी सदस्यों को प्रणाम करे | जब घर के सभी सदस्य एवं सेवक पूजा कर कर लेते है तब चौमुखा दीपक एवं सात दीये पूजा की थाली में ही छोड़ देते है | बाकी दीपकों कप पुरे घर में सजा देते है | रात्रि में जागरण करके श्रीसूक्त एवं गोपल्शस्त्र्म का पाठ करना चाहिए | इससे लक्ष्मी जी प्रसन्न रहती है | लक्ष्मी जी के विभिन्न स्त्रोतों का पाठ करे |

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