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करवा चौथ व्रत कथा और पूजन विधि | Karwa Chauth Vrat Katha and Pooja Vidhi in Hindi

रिवाजो से सजा है करवा चौथ | Karwa Chauth Vrat Katha and Pooja Vidhi in Hindi
रिवाजो से सजा है करवा चौथ | Karwa Chauth Vrat Katha and Pooja Vidhi in Hindi

Karwa Chauth करवा चौथ वैसे तो उत्तर भारत के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है | इसे विवाहित महिलाये मनाती है | पति की लम्बी उम्र की कामना के साथ पुरे दिन व्रत रखती है | यह उत्सव हिन्दू और सिख महिलाओं में ख़ासा प्रचलित है | हरियाणा , गुजरात , उत्तर प्रदेश ,पंजाब उअर राजस्थान में यह सबसे जोर शोर से मनाया जाता है | हिन्दू कैलंडर के मुताबिक़ करवा चौथ दिवाली से नौ दिन पहले आती है | इसे कार्तिक महीने (आमतौर पर अक्टूबर और नवम्बर के बीच ) मनाया जाता है |
आजकल Karwa Chauth करवा चौथ एक सामुदायिक उत्सव बन गया है | जहा समाज की सभी विवाहित महिलाये एकजुट होकर अपने अपने पति की लम्बी उम्र के लिए व्रत रखती है | यह त्यौहार विवाहित होने की खुशी को प्रकट करता है | मेहंदी ,जेवर , पारम्परिक सरगी , शादी का जोड़ा और रोली से पता चलता है कि महिला शादीशुदा है या नही | Karwa Chauth करवा चौथ के अन्य रीती रिवाजो को आइये विस्तार से जाने

करवा चौथ कब और कैसे शुरू हुआ | History of Karwa Chauth in Hindi

करवा चौथ कब और कैसे शुरू हुआ , इसे लेकर विभिन्न मान्यताये रही है | कहा जाता है कि महाभारत काल में अर्जुन पूजा करने के लिए नीलगिरी के पर्वत पर गये | उस समय द्रौपदी जंगल में अकेली थी | वह अपनी और पति की सुरक्षा को लेकर चिंतित थी | इसी चिंता में उन्होंने श्रीकृष्ण का ध्यान किया | वह प्रकट हुए और द्रौपदी की आशंकाओ का समाधान करते हुए उन्होंने माँ पार्वती का उदाहरण दिया |
पार्वती के पूछने पर शिवजी नी कहा था कि यदि पत्नी अपने पति को लेकर चिंतित हो तो तमाम शंकाओं के निवारण के लिए उसे कार्तिक मास की कृष्ण चतुर्थी को व्रत और पूजा करनी चाहिए | इसके साथ ही सावित्री सत्यवान की कहानी और इन्द्रलोक की कथाये इस बात की पृष्टि करती रही है कि समय समय पर स्त्रियों ने अपने पति की रक्षा के लिए एकनिष्ट होकर तत्परता दिखाई है |

करवा नाम क्यों

करवा संस्कृत शब्द का अर्थ हिंदी में अर्घ्यपात्र है | करक में साक्षात् देव चन्द्र को अर्घ्यं देने के लिए निहित जल रखने के कारण आम जनता में इसे करक चतुर्थी और साधारण हिंदी में करवा चौथ नाम से पुकारते है | सिंदूर गणेश का गहना है अत: सुहाग की निशानी माना गया है | इनके सिर पर बाल चन्द्रमा है अत: उगते चाँद को अर्घ्य देकर व्रत खोलने का नियम है | अत : हो सके तो करवे में लाल फूल ,चावल ,सिंदूर ,तीर्थ जल और डूब घास डाले | अर्घ्य देकर आप अपने प्राणनाथ  के प्रति अपना प्यार जताए |

पारम्परिक सरगी और बाया

करवा चौथ का जश्न तो एक दिन पहले ही शुरू हो जाता है | नवविवाहिता , होने वाली दुल्हन और विवाहित महिलाओ को उनकी सास की ओर से खूबसुरत उपहार मिलते है | परम्परा कहती है कि सास मिटटी के करवा में सरगी भरकर भेजती है | यह रीती रिवाज के अनुसार खाद्य पदार्थ होते है | अगली सुबह सूर्योदय से पहले महिलाओं को खाना होता है | सरगी आमतौर पर फल ,तले आलू ,रोटी और दूध आधारित मिठाइया होती है जो महिलाओं के शरीर को मजबूती देती है | यह सरगी ससुराल से आती है |
पारम्परिक रूप से विवाहित महिलाये इस त्यौहार से एक दिन पहले अपनी माँ के घर यानी मायके रहती है |त्यौहार के दिन ही वह अपने ससुराल यानि पिया के घर लौटती है | बाया  में पैसे ,मिटटी के घड़े , कपड़े और मिठाइया होती है | जो महिला की माँ उसके ससुराल वालो को भेजती है | करवा चौथ के दिन विवाहित महिलाये अपने हाथो और पैरो में मेहंदी लगाती है जो भारतीय संस्कृति में पारम्परिक विवाहित महिलाओं का सूचक होती है |

पूजा और कहानी | Karwa Chauth Katha in Hindi

आस पडोस की महिलाये साथ मिलकर शाम को पूजा करती है | जिस जगह पर पूजा होती है उसे “खडिया मट्ठी ” से सजाया जाता है | देवी पार्वती की प्रतिमा स्थापित की जाती है  | चन्द्रोदय से कुछ घंटे पहले सभी विवाहित महिलाओं को करवा चौथ की कथा सुनाई जाती है | पौराणिक कथाओ के अनुसार एक युवती ने चन्द्रोदय से पहले व्रत तोड़ दिया था तब उसके पति की मौत हो गयी थी | उदास और हताश युवती ने देवी पार्वती की आराधना की और अपने पति को मौत के मुंह से खीचकर वापस लाई | सात करवा चौथ के बाद पति जीवित हुआ | यह कथा विवाहित महिलाओं को सुनाई जाती है और वैवाहिक खुशी के लिए पूजा में एक छोटी सी प्रार्थना भी गाई जाती है |

छलनी का महत्व

करवा चौथ (Karwa Chauth) के व्रत में छलनी से चाँद को देखकर व्रत खोलने की परम्परा है कुछ स्थानों पर इसे चलनी भी कहा जाता है | अमीर हो या गरीब सभी वर्ग की महिलाये इस अवसर पर छलनी खरीदती है | व्रत की शाम छलनी की पूजा करके चाँद को देखते हुए प्रार्थना करती है कि उनके सौभाग्य और सुहाग सलामत रहे |
करवाचौथ में छलनी का प्रयोग किये जाने के पीछे पौराणिक कथा है | एक पतिव्रता स्त्री जिसक नाम वीरवती था इसने विवाह के पहले साल करवा चौथ का व्रत रखा लेकिन भूख के कारण इसकी हालत खराब होने लगी | भाइयो से बहन की यह स्थिति देखी नही जा रही थी इसलिए चाँद निकलने से पहले ही पेड़ की ओंट में छलनी के पीछे दिया रखकर बहन से कहने लगे कि देखो चाँद निकल आया है |
बहन ने झूठा चाँद देखकर व्रत खोल लिया | इससे वीरवती के पति की मृत्यु हो गयी | वीरवती को जब झूठे चादं को देखकर व्रत खोलने के कारण पति की मृत्यु की सुचना मिली तो वह बहुत दुखी हुयी  वीरवती ने अपने पति के मृत शरीर को सुरक्षित अपने पास रखा और अगले वर्ष करवा चौथ के दिन नियमपूर्वक व्रत रखा जिससे करवा माता प्रसन्न हुयी और मृत पति जीवित हो उठा |
सुहागन स्त्रिया इस घटना को हमेशा याद रखे | कोई छल से उनका व्रत न तोड़ दे इसलिए स्वयं छलनी अपने हाथ मेर रखकर उगते हुए चाँद को देखने की परम्परा शुरू हुयी | करवा चौथ में छलनी लेकर चाँद को देखना यह भी सिखाता है कि पतिव्रत का पालन करते हुए किसी भी प्रकार का छल उसे पतिव्रत से डिगा ना सके |

करवा का महत्व

करवा चौथ (Karwa Chauth) में सबसे अहम करवा होता है | करवा का अर्थ होता है मिटटी का बर्तन | इस व्रत में सुहागिन स्त्रिया करवा की पूजा करके माता से प्रार्थना करती है कि उनका प्रेम अटूट हो | पति-पत्नी के बीच विश्वास का अच्छा धागा कमजोर न हो पाए इसके लिए मिटटी के बर्तन को प्रतीक चिन्ह के रूप में प्रयोग किया जाता है क्योंकि मिटटी के बर्तन को ठोकर लग जाए तो चकनाचूर हो जाता है फिर जुड़ नही पाता इसलिए हमेशा यह प्रयास बनाये रखना चाहिये कि पति -पत्नी के प्रेम और विश्वास को ठेस न पहुचे |

व्रत खोलना

महिलाओं को चाँद देखने के बाद व्रत तोडना होता है | आमतौर पर पति की मौजूदगी में उत्सवी माहौल में व्रत खोला जाता है | महिलाये दिया जलाती है और एक बर्तन में पानी भरकर रखती है| इन्हें के पारम्परिक थाली में रखा जाता है | फिर जिस जगह से चाँद को देखा जा सके ,वहा लेकर जाती है | पति अपनी पत्नी के सामने खड़े हो जाते है | एक बारीक छलनी से महिलाये चाँद को देखती है |
चाँद को पानी का अर्ध्य दिया जाता है फिर छलनी से ही महिलाये पति को देख सकती है | इसके बाद पत्नी ,पति के लम्बे जीवन की कामना के लिए एक प्रार्थना करती है | पति अपनी पत्नियों को पानी पिलाकर या कुछ खिलाकर व्रत खोलते है | करवा चौथ की पूजा खत्म होने के बाद महिलाये पूरा खाना खाती है | पारम्परिक रीति रिवाजो से हटकर , करवा चौथ अपने स्नेहिल लोगो के साथ मेल जोल ,सामाजिकता बढाने उपहार का आदान प्रदान करने और मुंह में पानी ला देने वाले व्यंजनों का मौका देता है |

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