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मुन्नार हिल स्टेशन , जहा आप लन्दन के मौसम जैसा लुत्फ़ उठा सकते है | Munnar Hill Station Guide in Hindi

मुन्नार हिल स्टेशन , जहा आप लन्दन के मौसम जैसा लुत्फ़ उठा सकते है | Munnar Hill Station Guide in Hindi

मुन्नार हिल स्टेशन , जहा आप लन्दन के मौसम जैसा लुत्फ़ उठा सकते है | Munnar Hill Station Guide in Hindiब्रिटिश सरकार ने अपने शाषन के दौरान भारत में लन्दन के मौसम सा सुकून पाने के लिए एक जगह की तलाश शुरू की और उन्हें जल्द ही दक्षिण के राज्य केरल के इदुक्की जिले में वह जगह मिल गयी | उसका नाम था मुन्नार (Munnar)  | तीन नदियों के बीच स्तिथ वह जगह काफी उंचाई पर स्थित जंगलनुमा थी लेकिन आज यह स्थान एशिया के चुनिन्दा हिल स्टेशन के रूप में प्रसिधी पा चूका है | मुन्नार में जहा दर्जनों चाय के बगान हरे कालीन से  दीखते है तो दुसरी तरफ चन्दन के वृक्ष और झीले यहा के पुरे वातावरण को अद्भुद बना देते है | आलम यह है कि केरल टूर पर आने वाले पर्यटक यहा आकर अद्भुद प्राकृतिक छटा का खूब आनन्द उठाते है |

खूबियों से भरा

भारत के प्रसिद्ध Hill Station के रूप में शिमला ,दार्जिलिंग और उंटी जैसी जगहे हर किसी को आकर्षित करती रही है लेकिन तीन पहाड़ो से गुजरती तीन नदियाँ मुद्रापुझा , नल्लाथानी और कुंडला के बीच 1600 मीटर की उंचाई पर स्थित मुन्नार अपनी ख़ास खूबियों के कारण पिछले दिनों अचानक अख़बार की सुर्खियों में आ गया और हर किसी की जुबान पर चढ़ गया | आखिर ऐसा हो भी क्यों ना , जब वहा की खुबिया ही खुबिया दिखती है हो | क्या बच्चे क्या बड़े और क्या बुजुर्ग , वातावरण ऐसा हो तो हर कोई रोमांचित हो झुमने को मचल उठे

अंग्रेजो ने तराशा इसे

तमिल भाषा में मुन्नू का अर्थ होता है तीन और आर का अर्थ होता है नदिया | यानी तीन नदियों वाले इस Hill Station के पर्यटकों से जुड़ने का इतिहास बहुत पुराना भी नही है | खतरनाक बाघ, हाथी और ऐसे तमाम जंगली जानवरों वाले इस क्षेत्र पर यूरोपियन पर्यटक जे.डी.मुनरो की नजर 1870 में पड़ी और उन्हें यह जगह खेती के लिए काफी उपयुक्त लगी | 1887 में उन्होंने पूंजर राजा से यहा की 580 वर्ग किमी जमीन की लीज करा ली |
बाद में ब्रिटिश शाशन की यहा नजर पड़ी , जो ग्रीष्मकालीन प्रशाशनिक राजधानी बनाने के लिए प्राकृतिक रूप से खुबसुरत और मनमोहक जगह की तलाश कर रहे थे | समुद्र की सतह से 1600 मीटर से 2500 मीटर की उंचाई तक फैले इस मनोहारी क्षेत्र को उन्होंने विकसित किया | बाद में यहा दर्जनों चाय बागान बन गये  ,वही कॉफ़ी की भी खेती यहा खूब होती है | Tata Tea ने यहा Tea Museum भी बना दिया है जहा तरह तरह के चाय के नमूने देखे जा सकते है |

नजारे ही नजारे

चाय के बगान के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध मुन्नार (Munnar) में एक से बढकर एक विशेषताए है | खतरनाक जंगली जानवर भले नही रहे लेकिन जंगली बकरी के संरक्ष्ण के लिए विशेष रूप से नेशनल पार्क “इरवीकुलम” तैयार किया गया | यहा सर्वाधिक जंगली बकरिया है | Tea Valley Tour में मदुपेट्टी डैम , एको पॉइंट ,कुंडल डैम ,टॉप स्टेशन , राजमाला नेशनल पार्क ,न्याम्क्कड़ वाटर फॉल आदि की खूबसूरती का आनन्द उठाया जा सकता है वही “संदर वैली टूर” के तहत न्यामककड़ व्यू पॉइंट ,थल्यार व्यू पॉइंट ,वगुवराई व्यू पॉइंट ,लुकोम वाटर फॉल ,कॉफ़ी बागान , चन्दन वन ,चिनार वाइल्ड लाइफ संक्टुरी आदि का आंनद उठाया जा सकता है |

Tracking, Boating , Golfing …बहुत कुछ

इतना ही नही यहाँ ट्रैकिंग का भी आनन्द उठाया जा सकता है बोटिंग का भी और गोल्फिंग का भी मजा लिया जा सकता है |Golfing की व्यवस्था High Range Club द्वारा की गयी है  वही Boating का आनन्द मदुपट्टी डैम पर उठाया जा सकता है | यहा के म्यूजियम भी है जहा एतेहासिक धरोहरों को संजोकर रखा गया है | मुन्नार में संबधित विभाग की इजाजत लेकर बच्चे और युवा मछली पकड़ने का भी आनन्द उठाते है वही कई Travel Agencies आयुर्वेद सेंटर भी चलाती है | खासकर Club महेन्द्रा का आयुर्वेद हेल्थ सेंटर आयुर्वेद मसाज के शौक़ीन पर्यटकों में खूब लोकप्रिय है | चरक आयुर्वेद हॉस्पिटल भी पर्यटकों में कम लोकप्रिय नही है |
मुन्नार (Munnar) के टॉप पर यानी Top Station पर पहुच क्र जब आप नीचे देखेंगे तो मनमोहक नजारा देखकर मन्त्रमुग्ध रह जायेंगे | यहा पैदल चलना तो आनन्द देता ही है कार ,जीप और ऑटो रिक्शा से भी यात्रा करते हुए आनन्द ही आनन्द की अनुभूति होती है | हर 12 सालो बाद खिलने वाला यहा का फुल नीला कुरीजी अपने सौन्दर्य के कारण पर्यटकों को खूब लुभाता है लेकिन 12 सालो में एक बार | बैंगनी रंग का यह फुल दिखने में नीले रंग का लगता है और जब खिलता है तो पहाडियों पर नीली चादर की तरह बिछ जाता है | अगली आर यह फुल 2018 में खिलेगा |

आसपास भी फ़ैली है खुशबु

मुन्नार (Munnar) के आसपास भी अनेक प्रमुख स्थान है जहा के वातावरण में मसालों की भी खुशबु शामिल होती है | खासकर 7 किमी की दूरी पर स्थित देवीकुलम लेक टाउन के लिए लोकप्रिय है जबकि 14 किमी की दूरी पर स्थित मट्ठपट्टी डैम खेत खलिहानों का आनन्द देता है और तरह तरह के मसालों की खेती होती है | मरयूर 40 किमी की दूरी पर है लेकिन यहा के चन्दन वन को छूती हुयी चलने वाली हवा पुरे क्षेत्र में सुगंध घोलती रहती है | 60 किमी की दूरी पर स्थित है चिनार वाइल्ड लाइफ संचुट्री , जो उदुमलपेट रोड पर स्थित है | यहा हाथी ,हिरण आदि खास आकर्षण है जिन्हें पर्यटक यहा बनाये गये विशेष टावर से देखते है |

कहा है

केरल के इदुक्की जिले में मुख्यालय से 60 किमी की दूरी पर समुद्री सतह से 1600 से 2500 मीटर तक की उंचाई पर स्थित है मुन्नार | यहा का तापमान 4 डिग्री से 30 डिग्री के बीच रहता है | तीन नदिया मुद्रापुझा ,नल्लाथानी और कुंडला के मध्य स्थित होने के कारण इसका नाम मुन्नू (तीन) आर (नदी) पड़ा जो बाद में मुन्नार हो गया | कभी खतरनाक जानवरों वाला जंगल रहा यह Hill Station अब चाय के बागानों और प्राकृतिक सौन्दर्य से जगमगाता हुआ एशिया का प्रमुख Hill Station है | 1414 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले इस Hill Station की आबादी 20 लाख से अधिक है |

कैसे जाए

यहा के लिए परिवहन की अच्छी व्यवस्था है | यह Hill Station कोचीन इंटरनेशनल हवाई अड्डे से सिर्फ 120 किमी की दूरी पर है | यहाँ के नजदीकी रेलवे स्टेशन तमिलनाडु का थेनी है जो 60 किमी की दूरी पर है | कोचीन रेलवे स्टेशन 130 किमी की दूरी पर है | सड़क मार्ग से यह चार प्रमुख मार्गो से जुड़ा हुआ है | कोचीन रोड ,थेकड़ी रोड ,टॉप स्टेशन रोड और मरयूर रोड से मुन्नार में प्रवेश किया जा सकता है | यह जिला मुख्यालय इदुक्की से 60 किमी की दूरी पर है | सडक मार्ग से मदुरै यहा से 165 किमी ,कोचीन 140 किमी ,उंटी 146 किमी और चेन्नई 600 किमी की दूरी पर स्थित है | दिल्ली से कोचीन की दूरी लगभग 2100 किमी है |

कहा ठहरे

चार दर्जन प्रमुख होटलों वाले इस स्टेशन पर केरल टूरिज्म के भी होटल है | ट्रोल ट्री रिसोर्ट ,टी कंट्री ,राजगिरी इन् , मुन्नार वुड्स ,टी एंड व्यू लेजर होटल , स्पाइस वैली रिसोर्ट आदि ठहरने के प्रमुख स्थान है | इनके अलावा केरल टूरिज्म से होटल आदि की जानकारी ली जा सकती है | क्लब महिंद्रा समेत कई अन्य रिसोर्ट भी आपको बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने में प्रमुख भूमिका निभाते है |

तैयारिया और सावधानिया

इस Hill Station पर अगस्त से मई के बीच लाखो की संख्या देशी विदेशी पर्यटक आते है | जून और जुलाई में यहाँ बारिश अधिक होती है इस कारण पर्यटकों की संख्या अपेक्षाकृत कम होती है | सर्दियों के मौसम में यहा बेहद ठंड पडती है जिससे बचाव के लिए तमाम गर्म कपड़े रखने जरुरी है लेकिन गर्मियों में हल्के गर्म कपड़े ठीक रहते है |

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