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चीनी यात्री फाह्यान की जीवनी | Fahien History in Hindi

Fahien History in Hindiफाह्यान (Fahien) भारत की यात्रा पर आने वाले पहले चीनी भिक्षु , यात्री और अनुवादक थे जिनका लक्ष्य यहा से बौद्ध ग्रन्थ एकत्रित करके उन्हें चीन ले जाना था |फाह्यान (Fahien) का जन्म चीन के पिंगग्यांग में 337 ईस्वी में हुआ था | वे बौद्ध अनुयायी थे और उन्होंने चोटी उम्र में ही घर बार त्यागकर सन्यास ले लिया था | उन्होंने बौद्ध ग्रंथो का गहन अध्ययन किया था | अपने अध्ययन में अपूर्णता जानकर उनकी इच्छा हुयी कि भारत जाकर ओर बौद्ध ग्रंथो की तलाश करे | विनयपटिक का उपलब्ध संस्करण भी उन्हें अपूर्ण लगा और वे पूर्ण ग्रंथो की खोज में भारत चल पड़े | उस वक्त उनकी उम्र 65 वर्ष थी | वे पैदल ही मध्य एशिया होते हुए शेनशेन , दूनहुआंग , खोटान और पेशावर के रास्ते 402 ईस्वी में भारत पहुचे थे |
फाह्यान (Fahien) की यात्रा के समय भारत में गुप्त राजवंश के चन्द्रगुप्त का काल था और चीन जिन राजवंश का शासन था | यहा उन्होंने पाटलीपुत्र और ताम्रलिपि में पांच वर्ष बौद्ध अध्ययन किया फिर कपिलवस्तु ,कुशीनगर ,वाराणासी ,गया आदि जगहों पर गये जो बुद्ध से संबधित थी | वे जब चीन लौटे उस वक्त 77 वर्ष के थे | 414 इसवी में उन्होंने अपनी यात्रा का वृतांत “बौद्ध राज्यों का अभिलेख” नाम से लिखा ,जिसे आज “फाह्यान की यात्राये ” नामा से जाना जाता है |
यह उनकी यात्रा का शानदार भैगौलिक विवरण है जिसमे रेशम मार्ग ,मध्य एशिया और भारत की संस्कृति के आँखों देखा हाल सविस्तार मिलता है | उनके विवरण में बौद्ध मठो , बौद्ध मिथकों इत्यादि का भी प्रमाणिक वर्णन मौजूद है | गोबी मरुस्थल का वर्णन करते हुए फाह्यान (Fahien) ने लिखा है “बुरी आत्माओं और गरम हवाओं का घर , जहा रास्ते के चिन्ह के रूप में केवल मृतको की हड्डिया है हवा में कोई पंछी नही है और जमीन पर कोई जानवर |” अफगानिस्तान से गुजरते हुए उन्होंने इसे मुस्लिम बाहुल्य आबादीवाला इलाका बताया है |
सेही मूल नामवाले फाह्यान (Fahien) को फाशियान भी कहा गया है जिसका अर्थ धर्म की दीप्ती है | चीन वापसी के उनकी यात्रा भी रोमाचं भरी रही | गंगा डेल्टा से वे एक व्यापारिक जहाज में सवार होकर सीलोन (श्रीलंका) रवाना हुए और 14 दिन में वहा पहुच गये | उन्होंने यहाँ से भी बौद्ध धर्म से सम्बन्ध ग्रन्थ जुटाए | वे दो साल तक यहा रहे और उन सभी धर्म ग्रंथो का अनुवाद किया जो अभी तक चीन के लिए अज्ञात थे |
जब वे सीलोन से चीन के लिए रवाना हुए तो समुद्र में उन्हें उतने ही खतरों का सामना करना पड़ा , जितने भारत आते समय रेगिस्तान और हिमालय में उठाने पड़े थे | भयंकर समुद्री तूफ़ान उनके जहाज को उड़ाकर एक टापू पर ले गया , जो संभवत: जावा था | यहाँ से वे एक जहाज पर सवार हुए , जो कैंटन जा रहा था लेकिन इसे भी तूफ़ान उड़ा ले गया और दक्षिण चीन बन्दरगाह पर उतरने की बजाय उन्हें शैनडोंग प्रायद्वीप पर उतरना पड़ा | इस यात्रा में फाहियान (Fahien) को 200 दिन समुद्र में बिताने पड़े | अनुमानित 442 ईस्वी में फाह्यान (Fahien) की मृत्यु हो गयी थी |

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