- हल्दीघाटी का युद्ध (Battle of Haldighati) ना केवल राजस्थान के इतिहास बल्कि हिंदुस्तान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण युद्ध था जिसमे मेवाड़ की आन बचाने के लिए महाराणा प्रताप जबकि राजपूतो को पराजित करने के लिए अकबर की सेना आमने सामने हुयी थी | आइये आपको इस युद्ध से जुड़े रोचक तथ्य बताते है |
- हल्दीघाटी का युद्ध (Battle of Haldighati) इसलिए हुआ था क्योकि महाराणा प्रताप ने अकबर की अधीनता स्वीकार करने से मना कर दिया था जबकि उस समय तक राजस्थान के सभी राजाओं ने अकबर के आगे समर्पण कर दिया था |

- महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) का गौरव और ख्याति इसलिए भी अधिक है क्योंकि आधे से ज्यादा हिंदुस्तान पर शासन करने वाल मुगलों से उन्होंने केवल अपनी मातृभूमि को बचाने के लिए संघर्ष किया जबकि उनके पास बल कम था |

- हल्दीघाटी का युद्ध (Battle of Haldighati) कई दिनों तक नही बल्कि एक ही दिन में खत्म हो गया था वो भी केवल चार घंटे में , जब 21 जून 1576 को महाराणा प्रताप और अकबर की सेना आमने सामने हुयी थी |

- महाराणा प्रताप की सेना में मुख्य सेनापति ग्वालियर के राम सिंह तंवर , कृष्णदास चुण्डावत , रामदास राठोड झाला , पुरोहित गोपीनाथ , शंकरदास , चरण जैसा , पुरोहित जगन्नाथ जैसे योद्धा थे |
- महाराणा प्रताप की सेना की अगुआई अफगान योद्धा हाकिम खा सुर (Hakim Khan Sur) ने की थी जिसके परिवार से अकबर का पुराना बैर था जब सुरी वंश के शेरशाह सुरी को मुगलों ने हराया था इसलिए वो प्रताप से मिल क्र मुगलों को हराना चाहते थे |

- महाराणा प्रताप की तरफ आदिवासी सेना के रूप में 400-500 भील भी शामिल थे जिसका नेतृत्व भील राजा रांव पूंजा (Rao Punja) कर रहे थे | भील शुरुवात से ही राजपूतो के स्वामिभक्त रहे थे |

- राजस्थान का इतिहास लिखने वाले जेम्स टॉड (James Todd) के अनुसार हल्दीघाटी युद्ध (Battle of Haldighati) में महाराणा प्रताप की सेना में 22,000 सैनिक जबकि अकबर की सेना में 80,000 सैनिक थे |
- दुसरी तरफ अकबर (Akbar) की सेना का नेतृत्व करने के लिए खुद अकबर नही आये थे जबकि उन्होंने आमेर के राजपूत राजा मान सिंह (Man Singh I) को सेनापति बनाकर महाराणा प्रताप से लड़ने को भेजा | ये भी अजब संयोग था कि राजपूत राजपूत से लड़ रहा था |

- अकबर की सेना में सेनापति मानसिंह के अलावा सैय्यद हासिम , सैय्द्द अहमद खा , बहलोल खान , मुल्तान खान गाजी खान , भोकाल सिंह , खोरासन और वसीम खान जैसे योद्धा थे जिन्होंने मुगलों के लिए इससे पहले कई युद्धों में भाग लिया था |
- महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) की सेना चार भागो में बंट गयी थी सबसे आगे (हरावल) पर हाकिम खा , सबसे पीछे (चन्द्रावल) पर राव पूंजा , दायी तरफ झाला मान सिंह और बाई तरफ रामशाह तंवर थे जबकि प्रताप स्वयं अपने मंत्री भामाशाह के साथ मध्य में तैनात थे |
- 1576 में अकबर ने मान सिंह और आसफ खान को महाराणा प्रताप की सेना का मुकाबला करने के लिए भेजा जो खमनोर आकर रुकी थी दुसरी तरफ प्रताप की सेना हल्दीघाटी आकर रुकी |
- महाराणा प्रताप के लिए सबसे बड़ी दुःख की बात यह थी उनका सगा भाई शक्ति सिंह मुगलों के साथ था और उनको इस पहाडी इलाके में युद्ध के लिए रणनीति बनाने में मदद कर रहा था ताकि युद्ध में कम से कम मुगलों का नुक्सान हो |
- 21 जून 1576 को दोनों की सेनाये आगे बढी और रक्ततलाई पर दोनों सेनाओ के बीच भीषण युद्ध हुआ जो केवल चार घंटे में ही समाप्त हो गया |

- पहाडी इलाके में युद्ध होने के कारण इसका फायदा महाराणा प्रताप को मिला क्योंकि वो इन इलाको के बारे में बचपन से अच्छी तरह जानते थे |
- इतिहास में इस युद्ध को अनिर्णायक माना गया लेकिन महाराणा प्रताप की सेना ने अकबर की विशाल सेना के छक्के छुडा दिए थे |
- हल्दीघाटी के युद्द (Battle of Haldighati) में महाराणा प्रताप की सेना से उनके सेनापति हाकिम खा सुर , डोडिया भीम , मानसिंह झाला ,रामसिंह तंवर और उनके पुत्र सहित अनेको राजपूत योद्धा शहीद हुए जबकि अकबर की सेना से मान सिंह के अलावा सभी बड़े योद्धा मारे गये थे |
- हल्दीघाटी युद्ध (Battle of Haldighati) की सबसे एतेहासिक घटना वो थी जब महाराणा प्रताप मान सिंह के करीब पहुच गये थे और अपने घोड़े चेतक को उन्होंने मानसिंह के हाथी पर चढ़ा दिया और भाले से मान सिंह पर वार किया लेकिन मान सिंह तो बच गये लेकिन उनका महावत मारा गया | चेतक जब वापस हाथी से उतरा तो हाथी की सूंड में लगी तलवार से चेतक का एक पैर बुरी तरह घायल हो गया |

- चेतक केवल तीन पैरो से 5 किमी तक दौड़ते दौड़ते हुए अपने स्वामी महाराणा प्रताप को रणभूमि से दूर लेकर गया और एक बड़े नाले से चेतक (Chetak) ने छलांग लगाई जिसमे चेतक के प्राण चले गये | उस समय महाराणा प्रताप के भाई शक्तिसिंह (Shakti Singh) उनके पीछे थे और शक्तिसिंह को अपनी भूल का अहसास हुआ और उन्होंने महाराणा प्रताप की मदद की |

- दुसरी तरफ महाराणा प्रताप के रण से चले जाने पर उनके स्थान पर उनके हमशक्ल झाला मान सिंह (Jhala Man Singh) ने उनका मुकुट पहनकर मुगलों को भ्रमित किया और रण में कूड़े पड़े | मुगल उनको प्रताप समझकर उनपर टूट पड़े और इसमें झाला मान सिंह शहीद हो गये |

- हल्दीघाटी युद्ध के बाद से और चेतक की मृत्यु से उनका दिल पसीज गया और उन्होंने मुगलों से जीतने तक राजसी ठाटबाट त्यागकर जंगलो में जीवन बिताने का निश्चय किया और भविष्य में केवल चित्तोड़ को छोडकर सम्पूर्ण मेवाड़ पर कब्जा किया |

- हल्दीघाटी में स्थित महाराणा प्रताप संग्रहालय में आप उन सभी घटनाओं का चित्रण देख सकते है जो युद्ध के दौरान घटी थी | वर्तमान में इसका टिकिट 80 रूपये प्रति व्यक्ति है जिसमे आपको महाराणा प्रताप के जीवन पर बनी 10 मिनट की एक एनिमेटेड फिल्म , उनके जीवन से जुडी झांकिया और प्राकृतिक दृश्य का आनन्द ले सकते है |
- महाराणा प्रताप संग्रहालय की विशेष बात यह है इस संग्रहालय का निर्माण सरकार का प्रयास नही बल्कि एक व्यक्ति विशेष का प्रयास था जिसका नाम मोहन श्रीमाली है | मोहन श्रीमाली एक सेवानिवृत्त स्कूल अध्यापक है जिन्होंने अपने जीवन की सारी पूंजी इस संग्रहालय के निर्माण ने लगा दी जबकि इससे पहले इस स्थान का कोई विकास नही हो पा रहा था और इसकी संस्कृति धूमिल हो रही थी |
Pythagoras Biography in Hindi पाईथागोरस (Pythagoras) को महान दार्शनिक और गणितज्ञ माना गया है | इनका जन्म ईसा से भी 500 वर्ष पूर्व यूनान के सामोस नामक टापू में हुआ था | यह मनुष्य जाति का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि प्राचीनकाल में लोग अपने विषय में किसी प्रकार की कोई सुचना लिखित रूप में प्रस्तुत करके नही रखा करते थे अत: उनके विषय में विस्तार से कुछ मिल पाना बड़ा असम्भव सा होता था | यही स्थिति पाईथागोरस की भी है | उस समय लिखने और संचार के साधनों का उतना विकास भी नही हुआ था और न ही शायद छपाई आदि की कोई व्यवस्था उस समय रही थी | पाईथागोरस (Pythagoras) के समय में तो कदाचित भोज-पत्र पर भी लिखने की प्रक्रिया चल पड़ी थी अथवा नही , कहना कठिन है | बाद के लेखको को पूर्ववर्ती पीढियों द्वारा कहा सूनी के आधार पर जो कुछ सूचनाये प्राप्त हो जाया करती थी उनके आधार पर ही उन महान पुरुषो के बारे में कुछ जानकारी मिलने लगी है | पाईथागोरस उस समय उत्पन्न हुए थे जब गणित अपनी आरम्भिक अवस्था में ही था किन्तु अपनी विद्वता के कारण इस महान दार्शनिक ने एक ऐसी प्रमेय का सूत्रपात किया जो विश्वभर में प्राथमिक कक्षाओ में ही व...
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