
सिक्किम का इतिहास | History of Sikkim in Hindi
- सिक्किम (Sikkim) के प्रारम्भिक इतिहास के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है |
- माना जाता है कि 17वी शताब्दी में फ्न्तासोंग , नामग्याल राजवंश के पहले राजा थे |
- इसी राजवंश ने 1975 में भारतीय संघ में सिक्किम के विलय तक इस क्षेत्र पर शासन किया |
- संविधान के 38वे संशोधन के अनुसार 26 अप्रैल 1975 को सिक्किम भारत का 22वा राज्य बना |
- सिक्किम पूर्वी हिमालय में स्थित एक छोटा सा पहाडी राज्य है | इसके उत्तर में तिब्बत ,पश्चिम में नेपाल ,पूर्व में भूटान और दक्षिण में पश्चिमी बंगाल है |
- Sikkim राज्य घने वनों से घिरा है | यहा साल और सेमल के वृक्षों की सघनता है |
- Sikkim में पर्वत 700 मीटर से भी अधिक ऊँचे है | यहा स्थित कंचनजंघा (8579 मीटर) विश्व की तीसरी ऊँची चोटी है |
- सिक्किम में करीब 125 सेमी वर्षा होती है |
- सिक्किम में तीस्ता नदी तथा उसकी सहायक नदिया बहती है | सिक्किम में आर्किड नस्ल के सैंकड़ो किस्मे मिलती है |
- Sikkim की अर्थव्यवस्था मूलरूप से कृषि पर आधारित है |
- मक्का ,चावल ,गेंहू ,बड़ी इलायची , अदरक और संतरा राज्य की मुख्य फसले है |
- भारत में बड़ी इलायची का सबसे ज्यादा उत्पादन सिक्किम में होता है |
- राज्य की कुल भूमि का सिर्फ 10 से 12 प्रतिशत क्षेत्र ही कृषि के लिए उपलब्ध है |
- इस समय यहा व्यवसायिक और बागवानी फसलो पर अधिक जोर दिया जा रहा है |
सिक्किम में परिवहन | Transportation Facts of Sikkim in Hindi
- सड़क मार्ग – भले ही सिक्किम राज्य , हिमालय के निचले हिस्से में हो लेकिन यहा सडको का विस्तृत जाल बिछा हुआ है | पश्चिमी बंगाल के उत्तरी हिस्से से होते हुए भी सिक्किम पहुचा जा सकता है | दार्जिलिंग ,कलिमपोंग और सिलीगुड़ी जैसे शहर गंगटोक समेत राज्य के अन्य शहरों से सीधे जुड़े हुए है |
- रेल मार्ग – सिक्किम में कोई रेल नेटवर्क नही है | सबसे पास का रेलवे स्टेशन पश्चिमी बंगाल में न्यू जलपाईगुड़ी (सिलीगुड़ी के पास) है जो गंगटोक समेत पूर्वोत्तर के कई बड़े शहरों को जोड़ता है इसके अलावा ये स्टेशन भारत के सभी प्रमुख रेलवे स्टेशन जैसे कोलकता ,दिल्ली से जुड़ा है |
- हवाई मार्ग – सिक्किम का अपना कोई एअरपोर्ट नही है | सबसे पास का एअरपोर्ट पश्चिमी बंगाल में बागडोगरा (सिलीगुड़ी के पास) है जो सिक्किम की राजधानी गंगटोक से करीब 125 किमी दूर स्थित है | बागडोगरा दिल्ली और कोलकाता की नियमित उड़ानों से जुड़ा हुआ है |
सिक्किम के पर्यटन स्थल
- गंगटोक – यह शहर समुद्रतल से 1800 मीटर की उंचाई पर स्थित है | यहा का प्राकृतिक दृश्य अलौकिक है | इस छोटे एवं खुबसुरत शहर को यदि गुफाओं का शहर कहे तो गलत नही होगा | इतिहास में पढने को मिलता है कि 1716 ईस्वी में गुफाओं के अध्ययन के लिए शहर स्थापित किया था | यहा कुल मिलाकर 140 गुफाये है | सिक्किम के भारत में विलय के बाद से पर्यटकों में सिक्किम का आकर्षण तेजी से बढ़ा है |
- एनके मोनेस्ट्री या गुफा – इस मोनेस्ट्री की स्थापना सन 1840 में हुयी थी | यहा पर देवी देवताओं की सुंदर ,भव्य ,मुर्तिया ,पुस्तकालय तथा लाम्न्ताव्य से संबधित मुखौटे आदि देखने लायक है | निकट ही स्थित डियर पार्क पर भगवान बुद्ध की प्रतिभा भी देखी जा सकती है | 10 फरवरी 1957 को इसका शिलान्यास किया गया था और तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु ने अक्टूबर 1958 में इसका उद्घाटन किया था |
- फोदन मोनेस्ट्री – यह मोनेस्ट्री गंगटोक से उत्तर दिशा में 40 किमी की दूरी पर स्थित है | हाल ही में इसका पुनर्निर्माण किया गया था | यह मोनेस्ट्री सौन्दर्य की दृष्टि से अतुलनीय है | यहा की पेंटिंग्स और भित्तिचित्र इसके सौन्दर्य में चार चाँद लगा देते है |
- पश्चिमी सिक्किम – गंगटोक से करीब 5 घंटे के सफर के बाद पश्चिमी जिला के मुख्यालय गेंजिंग या ग्यालशिंग पहुचा जा सकता है | सिक्किम का पश्चिमी जिला पूर्वी हिमालय क्षेत्र के सबसे खुबसुरत और पवित्र स्थानों में एक माना जाता है | यहा स्थित अनेक मठो के कारण इस मठभूमि के नाम से भी जाना जाता है | यहा के कुछ मठ तो शताब्दियों पुराने है |
- रूमटेक गुफा – यह गुफा विश्व की श्रेष्ठतम गुफाओं में से एक है | यह गंगटोक से करीब 37 किमी की दूरी पर उत्तर दिशा में स्थित है | चतुर्थ चोग्याल द्वारा निर्मित मोनेस्ट्री भूकम्प में ध्वस्त हो जाने के बाद रूमटेक में नया बौद्ध विहार बनाया गया | चीन द्वारा तिब्बत को अपनी सीमा में मिला लेने के बाद तिब्बतियों के 16वे धर्मगुरु गोआलवा कर्मापा ने बट से भागकर सिक्किम में शरण ली एवं रूमटेक में चोफुक गुफा की रुपरेखा पर बौद्ध विहार का निर्माण करवाया |
- बौद्ध विहार – बताया जाता है कि इस बौद्ध विहार का निर्माण 17वी शताब्दी में हुआ था | इस बौद्ध विहार की दीवारों पर विभिन्न भित्तिचित्र बने हुए है और मुर्तिया भी स्थापित है | 5 सालो के प्रयास से लकड़ी का बना महागुरु पैराडाइस भी अद्भुद है | ट्रैकिंग चाहने वाले पर्यटकों के लिए ये आनन्दभूमि है |
सिक्किम में खरीददारी
भले ही Sikkim खरीददारी के लिए आदर्श ठिकाना न हो लेकिन अगर आपको यह पता है कि क्या और कहा खरीदना है तो खरीददारी का मजा कई गुना बढ़ जाएगा | पारम्परिक कलाओं और हस्तशिल्प में सिक्किम की अपनी एक खास जगह है जो आपको यहा खरीददारी के लिए प्रेरित कर सकती है | सिक्किम एम् उनी कारपेट्स और ब्लेंकेट्स अपनी विशिष्ट डिजाईन और पारम्परिक सिक्किमी मूल भाव की वजह से काफी प्रसिद्ध है | यह वस्तुए टिकाऊ होती है और इन्हें रासायनिक रंगो की वजह से सिक्किम के बने पारम्परिक रंगो से रंगा जाता है | सिक्किम में कॉटन के कैनवास पर बनने वाली पारम्परिक पेंटिंग्स ठंगकाज के लिए काफी प्रसिद्ध है | सिक्किम में खरीददारी के लिए सबसे अच्छी जगह है गंगटोक | कई सरकारी एम्पोरियम और निजी दुकाने महात्मा गांधी मार्ग के मुख्य बाजार इलाके में स्थित है | तिब्बती हस्तशिल्प केंद्र भी सिक्किम में खरीददारी के लिए अच्छी जगह है |
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