
हर साल चैत्र मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से ही विक्रमी संवत शुरु होता है तथा इस बार नये विक्रमी संवत 2074 का शुभारम्भ चैत्र मॉस की तिथि 15 अर्थात 28 मार्च मंगलवार हो होगा | विक्रमी संवत 2073 के चैत्र मॉस की अमावस की समाप्ति प्रात: 8 बजकर 27 मिनट पर होगी तथा उसी समय से नया संवत उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र एवं ब्रह्म योग कालीन मेष राशि में प्रवेश हो रहा है |
नये संवत का नाम “साधारण” है | भारतीय धर्मानुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रथमा तिथि का एतेहासिक महत्व है और यह अत्यंत पवित्र भी है | शास्त्रानुसार इसी तिथि से ब्रह्मा जी ने सृष्टि के निर्माण का कार्य शुरू किया था और युगों में प्रथम सतयुग का प्रारम्भ भी इसी तिथि को माना जाता है | सम्राट चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने शको पर अपनी विजय को चिरस्थायी बनाते हुए विक्रमी संवत का प्रारम्भ किया था तथा इसी दिन से वास्तविक नवरात्र भी आरम्भ होते है | मंगलवार को शुरू होने के कारण इस नये संवत का राजा “मंगल” और मंत्री “गुरु” होंगे , जिस कारण यह वर्ष सभी को न्याय दिलाने वाला और शुभफलदायक रहेगा |
सम्वत का फल
शास्त्रों के अनुसार “साधारण” नामक संवत में वर्षा कम होने का संकेत मिलता है जिस कारण फसले प्रभावित हो सकती है | ऐसे में प्रशासक वर्ग विशेष उपाय करते हुए लोगो को सहयोग देंगे | विभिन्न राष्ट्रीय अध्यक्ष शान्ति वार्ताओं में भाग लेकर लोगो की समस्याओं का समाधान करने का प्रयास करेंगे | निष्कपट और सच्चे मन से कार्य करने वाले लोगो को सीधा लाभ मिलेगा | मन में छल ,कपट ,द्वेष ,वैर ,विरोध और इर्ष्या का भाव रखकर कर्म करने वाले स्वयं तो दुखी होंगे ही , दुसरो के दुःख का कारण भी बन सकते है | “नारदसंहिता” के अनुसार “साधारण” संवत्सर में शासक यदि परस्पर प्रेम एवं भाईचारे का संचार करेंगे तो “साधारण” प्रजा भी मिलकर सहयोग करेगी |
वास “धोबी” के घर
विक्रमी संवत 2074 का मेष संक्रान्ति में प्रवेश विशाखा नक्षत्र कालीन है तथा ज्योतिष गणना के अनुसार संवत में रोहिणी का वास तट पर होने से संवत का वास धोबे के घर रहेगा |
संवत के वाहन वृषभ का फल
इस नये संवत का वाहन कुछ विद्वान “वृषभ” को और कुछ “नौका” को मानते है | जो वृषभ (बैल) को संवत मानते है उनके अनुसार इस साल फसल अच्छी होने का योग बनता है | पहाडी क्षेत्रो में वर्षा बहुत होगी ,नदियों में पानी का वेग बढने से बाढ़ जैसी स्थिति भी बन सकती है | सब्जियों और फलो की पैदावार भी अच्छी होगी | पशुओ के चारे की कोई किल्लत नही रहेगी | कुछ राज्यों में राजनितिक मतभेदों के चलते अस्थिरता का वातावरण भी बन सकता अहि | जो संहिताकार संवत का वाहन “नौका” मानते है उनके अनुसार फसलो के उत्पादन में कमी रहेगी तथा अकाल जैसी स्थिति पैदा हो सकती है लोगो का एक -दुसरे राज्य में पलायन होंने , देश में आतंकी घटनाओं का भय तथा चौपाया पशुओ के लिए कष्टदायक भी हो सकता है |
नवसंवत्सर पूजन
प्रात;काल उठकर अपने स्नानादि नित्यकर्मो से निवृत होकर श्वेत वस्त्र धारण करे | एक नवनिर्मित वर्गाकार चौकी लेकर उस पर रेत की वेदी बनाये जिस पर हल्दी अथवा लाल चन्दन से रंगे चावलों के साथ अष्टदल कमल बनाये | उस पर श्री ब्रह्मा जी की चांदी अथवा ताम्बे आदि धातु से बनी मूर्ति स्थापित करे | श्री गणेश लक्ष्मी का पूजन करके “ॐ ब्रह्माने नम:” आदि मन्त्रो का उच्चारण कर श्री ब्रह्मा जी का विधिवत पूजन करते हुए इस मन्त्र बोले |
बाद में सभी देवी-देवताओं का पूजन करके सूर्य को जल चढाये और वर्ष के मंगलमय होने और सभी प्रकार की विघ्न बाधाओं को दूर करने के लिए प्रभु से प्रार्थना करे ताकि घर में सुख-शांति एवं खुशहाली बनी रहे | इस दिन अपनी सामर्थ्यानुसार ब्राह्मणों को भोजन कराए तथा उन्हें अन्न,वस्त्र ,मिठाई आदि वस्तुए भेंट करके साथ में दक्षिणा अवश्य दे | नवरात्रे भी इसी दिन से शुरू होते है तथा इस दिन से नवमी तक घर में अखंड ज्योति जलाए और घट की स्थापना करते हुए माँ दुर्गा के व्रत भी करे |
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