
मित्रो जैसा कि आप जानते है कि पिछले 2-3 वर्षो में Hinglish Blogging में होने वाली इनकम की तरफ आकर्षित होकर अनेको ब्लॉगर ने Hinglish में ब्लॉग बनाया था लेकिन अब हिंगलिश के सुनहरा दौर समाप्ति की कगार पर है जबकि इसमें गूगल ने को आधिकारिक घोषणा तो नही के है लेकिन इसके बारे में स्पष्ट बदलाव आप Hinglish blogs में देख सकते है |
एक हिंदी ब्लॉगर होने के नाते मैंने कभी Hinglish का सपोर्ट नही किया बल्कि कई ब्लॉग पर खुद मैंने इन ब्लॉग के बारे में अपने विचार व्यक्त किये थे लेकिन ज्यादा इनकम और जल्दी इनकम के लालच में कई ब्लॉगर बिना सोचे विचारे इस दिशा में आगे बढ़ते गये और इसका परिणाम यह हुआ कि जितने Hinglish ब्लॉग बने है उनमे से आधे से ज्यादा तो बंद हो चुके है और जो चल रहे है उन्हें शुद्ध हिंदी की ओर जाना पड़ रहा है |
बड़े सम्मान के साथ Hinglish Blog के सबसे बड़े महारथी supportmeindia.com के जुमेदीन खान ने स्वयं इस बात को महसूस किया है और इसे देखते हुए उन्होंने भी हिंदी भाषा का अधिक से इस्तेमाल शुरू कर दिया है | हालांकि ये भी सत्य है कि जुमेदीन खान और रोहित मेवाडा ये दोनों ही ऐसे प्रेरणादायक ब्लॉगर थे जिनके नक्शे कदम अनेको ब्लॉगर Hinglish ब्लॉग के लिए प्रेरित हुए थे जिसमे इन दोनों की कोई गलती नही है |
मै पिछले 2 वर्षो से ना केवल सभी हिंदी ब्लॉग बल्कि सभी Hinglish ब्लॉग का भी गहराई से अध्ययन कर रहा हु और इससे मुझे ये निष्कर्ष निकला है कि अलेक्सा रैंकिंग के हिसाब से केवल supportmeindia.com के अलावा वर्तमान में ऐसा कोई पॉपुलर ब्लॉग नही है जिसकी रैंकिंग 1 लाख से कम हो जबकि आज से छ महीने पहले स्थिति अलग थी | ओर तो ओर मैंने लगभग 30 से ज्यादा Hinglish ब्लॉग का प्रति महीने अध्ययन किया जिसमे से 15 तो इन्टरनेट से भी हट चुकी है जिनकी रैंकिंग एक दौर में 3 लाख के आसपास आ चुकी थी |
Kaisekare.in भी हिंगलिश का एक पॉपुलर ब्लॉग है जिन्होंने कमेंट बंदकर खुद अपनी रैंकिंग नीचे की जबकि उनके ब्लॉग पर कमेंट हिंगलिश ब्लॉगर में सबसे ज्यादा थे और वर्तमान में उनकी रैंकिंग 2 लाख से उपर चली गयी है | हम यह तो नही कहते है कि रैंकिंग कम होने से ब्लॉग पॉपुलर नही रहा लेकिन उनकी इनकम में जरुर कमी आयी होगी | वैसे पिछले 2-3 महीनों से देखे तो हिंदी ब्लॉगर को भी रैंकिंग कम होने से काफी नुक्सान हुआ लेकिन फिर भी उनकी रैंकिंग में थोड़ी स्थायीता तो है जबकि कई Hinglish ब्लॉगर की रैंकिंग 10 लाख के पार पहुच चुकी है जो Hinglish ब्लॉग्गिंग पर सवालिया निशान उत्पन्न करती है |
मै नयी शुरुवात करने वाले ब्लॉगर को अपनी एक निजी सलाह देना चाहता हु कि आप पारम्परिक ब्लॉग्गिंग के विषयों से हटकर कुछ नया करने की कोशिश करे | आजकल हर ब्लॉग के टॉपिक शुरू होते है ब्लॉग्गिंग से पैसा कैसे कमाये , लडकी कैसे पटाये , इलाज कैसे करे | आपको कुछ नया सोचना होगा लोग इंटरनेट पर इन सब बातो को जानते है और आपसे पहले कई बड़े बड़े ब्लॉगर से प्रेरणा ले चुके है है इसलिए अगर आप ऐसे विषयों पर जो उबाऊ हो चुके को लेकर ब्लॉग्गिंग करना चाहते है तो अपना समय व्यर्थ ना करे |
एक बात मै आपको सत्य रूप से कहना चाहता हु आप ब्लॉग्गिंग को जितना आसान समझ रहे हो उतना नही है | इन्टरनेट पर पढ़ लिया “घर बैठे पैसे कमाए ” ओर ब्लॉग शुरू कर दिया | अब वो दौर नही है आपको दिन रात मेहनत करनी पड़ेगी ऐसे विषयों को ढूंढने में जो अब तक लोगो के पास नही पहुचे है | कुछ लोग बस jio के बारे में अपडेट करते रहते है आप समझो Jio के बारे में आपसे अनेको अखबार और youtube के विडियो मौजूद है और जब तक आपका आर्टिकल इन्टरनेट पर सर्च में आएगा तब तक खबर बासी हो जायगी |
मेरा यह आर्टिकल उन सभी के लिए कटाक्ष है जो ब्लॉग्गिंग को आसान मानते है क्योंकि मै पिछले 3 वर्षो से सक्रिय है उसके बावजूद मै उतना सफल नही हु जितना होना चाहिए | कई हिंदी ब्लॉग अजबगजब , हिन्दिसोच ने अपने तीन सालो के बाद आज उतनी रैंकिंग पा ली है कि उनको पीछे मुड़ने की जरूरत नही है इसलिए मॉडर्न ब्लॉग्गिंग का पहला मन्त्र है कि नया विषय ले जो इन्टरनेट पर अब तक उपलब्ध ना हो और दूसरा है निरन्तरता बनाये रखे | फिर भी मेरे सभी हिंदी और Hinglish ब्लॉगर भाइयो को ब्लॉग्गिंग जगत में आगे बढ़ते रहने की ढेर सारी शुभकामनाये | सभी हिंदी और हिंगलिश ब्लॉगर इस पर अपने विचार सहमति या असहमति के रूप में प्रकट कर सकते है ताकि इस बात की प्रमाणिकता सिद्ध हो जाए कि Hinglish ब्लॉग्गिंग का भविष्य खतरे में है |
Pythagoras Biography in Hindi पाईथागोरस (Pythagoras) को महान दार्शनिक और गणितज्ञ माना गया है | इनका जन्म ईसा से भी 500 वर्ष पूर्व यूनान के सामोस नामक टापू में हुआ था | यह मनुष्य जाति का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि प्राचीनकाल में लोग अपने विषय में किसी प्रकार की कोई सुचना लिखित रूप में प्रस्तुत करके नही रखा करते थे अत: उनके विषय में विस्तार से कुछ मिल पाना बड़ा असम्भव सा होता था | यही स्थिति पाईथागोरस की भी है | उस समय लिखने और संचार के साधनों का उतना विकास भी नही हुआ था और न ही शायद छपाई आदि की कोई व्यवस्था उस समय रही थी | पाईथागोरस (Pythagoras) के समय में तो कदाचित भोज-पत्र पर भी लिखने की प्रक्रिया चल पड़ी थी अथवा नही , कहना कठिन है | बाद के लेखको को पूर्ववर्ती पीढियों द्वारा कहा सूनी के आधार पर जो कुछ सूचनाये प्राप्त हो जाया करती थी उनके आधार पर ही उन महान पुरुषो के बारे में कुछ जानकारी मिलने लगी है | पाईथागोरस उस समय उत्पन्न हुए थे जब गणित अपनी आरम्भिक अवस्था में ही था किन्तु अपनी विद्वता के कारण इस महान दार्शनिक ने एक ऐसी प्रमेय का सूत्रपात किया जो विश्वभर में प्राथमिक कक्षाओ में ही व...
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