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क्रिकेट को रोमांचक बनाती तकनीको से जुड़े रोचक तथ्य | Technology Used in Cricket Facts in Hindi

मित्रो आजकल IPL T-20 का दौर चल रहा है और सभी गर्मी की छुट्टियों में शाम को इसका भरपूर मजा ले रहे होंगे | इन मैचो का मजा तब दुगुना हो जाता है जब तकनीक के सहारे आपके पसंदीदा खिलाड़ी के पक्ष में निर्णय आता है जिसका सारा श्रेय क्रिकेट में वर्तमान में प्रयुक्त हो रही प्रणाली है | इन तकनीको ने एम्पायर का काम भी आसान कर दिया और थोडा सा संदेह होते ही वो तकनीक का सहारा लेकर एकदम सही निर्णय ले लेते है | आइये आज आपको क्रिकेट में इस्तमाल होने वाली ऐसी ही आधुनिक तकनीको के बारे में रोचक जानकारी देते है जिससे यह खेल ओर भी रोमाचंक और मजेदार हो जाता है |

01 जिंग विकेट सिस्टम के कारण गिल्लियो से रोशनी

जिंग विकेट सिस्टम LED लाइट वाले स्टंप और उनके उपर लगने वाली गिल्ली है जो गेंद टकराते ही फ़्लैश होने लगती है यानि इसमें रोशनी चमक उठती है | इस तकनीक की के गिल्ली की कीमत तकरीबन 30 से 50 हजार रूपये कीमत के बराबर होती है और इसका पूरा सेट लगभग 25 लाख रूपये तक आता है | इसमें लगे In-built सेंसर की मदद से यह सैंकड़ के हजारवे हिस्से में ही पास आने वाली चीज को डिटेक्ट कर लेता है | रन आउट या स्टंप आउट के समय एक बल्लेबाज को तभी आउट दिया जाता है जब गिल्ली पुरी तरह हट जाए | स्टम्प में माइक्रोप्रोसेसर और कम वोल्टेज वाली बैटरी लगी रहती है |

02 सुपर स्लो मोशन कैमरे की देन रिप्ले

आपने क्रिकेट मैच में रिप्ले जरुर देखा होहा | ब्रॉडकास्टर्स स्लो मोशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कई सालो से कर रहे है | सुपर स्लो मोशन कैमरा को स्टेडियम में 500 फ्रेम प्रति सैंकड़ पर लगाया जाता है |वही एक समान्य कैमरा 24 फ्रेम प्रति सैंकड़ इमेज रिकॉर्ड करता है | आप इससे अंदाजा लगा सकते हो कि स्लो मोशन तकनीक कितनी कारगर साबित होती है | इस तकनीक का इस्तेमाल रीप्ले ,रन आउट और स्टम्पिंग देखने के लिए किया जाता है |

03 मैदान में मकड़े की जाल की तरह फैले कैमरे

टीवी पर आपको हर एंगल से मैदान दिखाने के लिए स्पाइडरमैन कैम का इस्तेमाल होता है यह कैमरा बहुत ही पतली केबल से जुडकर स्टेडियम के हर कोने में लगा रहता है | स्पाइडर कैमरा ब्रॉडकास्टर की जरुरतो के मुताबिक़ स्टेडियम में होने वाली गतिविधियों को टिल्ट , जम या फोकस करता है | इसके पतले केबल में फाइबर ऑप्टिक केबल भी होते है जो कैमरा में रिकॉर्ड होने वाली तस्वीरों को प्रोडक्शन रूम तक पहुचाते है | आपने काई बार मैच के दौरान ये कैमरे देखे होंगे |

04 झट से गेंद की गति मापती है स्पीड गन

इस तकनीक का इस्तेमाल सबसे पहले टेनिस में हुआ था |गेंदबाज के हाथ से बॉल किस गति पर छुटी , यह मापने के लिए स्पीड गन का इस्तेमाल किया जाता है | गेंद की गति का पता लगाने के लिए डोपलर रडार का भी प्रयोग होता है |स्पीड गन माइक्रोवेव तकनीक का इस्तेमाल करती है | यह हवा की तरंग फेंकी गयी गति का पता लगा लेती है |

05 हल्के से शोर को पकड़ लेता है स्निकोमीटर

क्रिकेट के मैदान में शोर शराबे की कमी नही होती | ऐसे में एम्पायर के लिए हल्की आवाजो को सुनना आसान नही होता | इस शोर से बचकर सही निर्णय देने में स्निकोमीटर उनकी मदद करता है | यह आवाज थोड़े बदलाब को भी पहचान लेता है | इससे यह पता लग जाता है कि बल्ले ने गेंद को छुआ या नही | स्निकोमीटर में एक माइक्रोफ़ोन लगा होता है | इसे पिच के दोनों तरफ किसी एक स्टम्प में लगाया जाता है और यह आसीलोस्कोप यंत्र से कनेक्ट रहता है जो ध्वनि तरंगो को मापता है | आपने देखा होगा कि गेंद और बल्ले के थोड़े से सम्पर्क को भी यह आसानी से डिटेक्ट कर लेता है |

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