Skip to main content

लोनावाला , जहा गर्मी से निजात के साथ देखे सुंदर सह्याद्री पहाडियों के मनोरम दृश्य | Lonavala Tourism Guide in Hindi

Lonavala Tourism Guide in Hindi
Lonavala Tourism Guide in Hindi

गर्मी हो या सर्दी , लोनावाला (Lonavala) में सभी मौसमो में आनन्द लिया जा सकत है | प्राकृतिक सुन्दरता का आनन्द लेना हो तो यहा बारिश में आकर इसका ख़ास मजा ले | वैसे मई से लेकर अक्टूबर तक यहा का मौसम लगभग एक सा होता है और यह समय सबसे माकूल समय होता है जब सैलानियों का हुजूम इस ओर उमड़ पड़ता है |
प्राकृतिक सुन्दरता लोनावाला (Lonavala) को विरासत में मिली है | मुम्बई की भागदौड़ भरी जिन्दगी ,शोर-शराबा से दूर यह जगह तन-मन को सुकून पहुचाती है | आसपास के लोग वीकेंड पर तो यही भागे चले आते है | समुद्र स्तर से 625 मीटर उंचाई पर स्थित , यह अति सुंदर पहाडी क्षेत्र , लुभावनी सह्याद्री पहाडियों का एक हिस्सा है और विस्तार में 38 वर्ग किमी के आसपास है | लोनावाला मुम्बई से 96 किमी और पुणे से केवल 64 किमी दूर है |
लोनावाला (Lonavala) को “सह्याद्री का गहना” भी कहा जाता है | यहा की जलवायु सुखद है और साल भर पर्यटकों को अपनी और खींचता है | लोनावाला एक एक तरफ दक्कन का पठार और दुसरी तरफ यह कोंकण तट के मनोरम दृश्य है | लोनावाला (Lonavala) में घुमने लायक ढेर सारी जगहे है | आप यहा खुबसुरत वादियों के दिलकश नजारों का लुत्फ़ उठा सकते है | ट्रेकिंग का मन हो तप पहाड़ पर चढने की सुविधा भी मौजूद है | इसके अलावा इस जगह के साथ कई एतेहासिक किले , प्राचीन गुफाये और आसपास की शांत झीले भी जुडी हुयी है |

लोनावाला में क्या देखे | What to See in Loavala

बुशी डैम | Bhushi Dam

लोनावाला से महज 6 किमी की दूरी पर स्थित है बुशी डैम | यह यहाँ का प्रसिद्ध पिकनिक स्पॉट के रूप में जाना जाता है | खासकर मानसून के समय यहा वीकेंड में काफी भीड़ इकट्ठी हो जाती है | वैसे इस डैम में तैरने की अनुमति नही है | यहा अगर आप जाते है तो इस बात का ख्याल रखे कि डैम में पानी अचानक बढ़ जाता है |

ड्यूक नोज | Duke’s Nose

ड्यूक नोज को नागफनी के नाम से भी जाना जाता है | इसका नाम एक ब्रिटिश गर्वनर के नाम पर पड़ा | खंडाला स्टेशन से इसके शिखर पर आसानी से पैदल चढ़ा जा सकता है | इस पहाडी के समीप ही सौसेज हिल और INS शिवाजी है | सौसेज हिल पर एक छोटा सा जंगल है | यहा पक्षियों की विभिन्न प्रजातियाँ देखी जा सकती है |

कार्ल तथा भज गुफा | Karla Caves

लोनावाला से पुणे जाने के मार्ग पर बौद्ध धर्म से संबधित पत्थरों को काटकर बनाई गयी कई गुफाये है | लोनावाला से यहा जाने के लिए आप ऑटो ले सकते है | आप मालावी स्टेशन से लोकल ट्रेन से भी यहाँ जा सकते है | मालावी के दांयी तरफ भज और बांयी तरफ कारले है | पत्थरों को काटकर बनाई गयी कार्ल की गुफाओं के स्तम्भों पर बेहतरीन नक्काशी की गयी है | हानियाँ सम्प्रदाय द्वारा निर्मित इस गुफा को बाद में महायान सम्प्रदाय ने अपने नियन्त्रण में लिया | इस गुफा के मुख्य हाल के बाहर कोली मन्दिर है |
कार्ल की गुफाओं के विपरीत दिशा में भज की गुफाये स्थित है | यह मालावी स्टेशन से 3 किमी की दूरी पर स्थित है | भज की गुफाओं का निर्माण दुसरी शताब्दी ईसा पूर्व में हुआ था | यहा की गुफाये कार्ले की गुफाओं से ज्यादा सुरक्षित अवस्था में है | इसके अलावा लोनावाला के आसपास कई किले है | इनमे लौहगढ़ किला , विशपुर किला ,तिकोना किला ,तुंग किला काफी प्रसिद्ध है |

वैक्स म्यूजियम

वर्सोली रेलवे स्टेशन से महज दूर टोल प्लाजा के पास एक वैक्स म्यूजियम है | यह म्यूजियम पुराने मुम्बई-पुणे हाईवे पर  पुणे से 60 किमी की दूरी पर है | इस म्यूजियम में आध्यात्मिक गुरु ,राजनीतिज्ञ ,संगीतकार , क्रिकेटर और अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त व्यक्तियों की मोम की मुर्तिया मौजूद है | इन मूर्तियों में मदर टेरेसा ,महात्मा गांधी ,यसुदास ,विवेकानंद ,हिटलर और माइकल जैक्सन आदि की मुर्तिया शामिल है |

झीले | Lonavala Lake

लोनावाला में कई झील है लेकिन इनमे कोई भी प्राकृतिक नही है | इन झीलों में लोनावाला झील ,मानसून झील और वालवान झील प्रमुख है | इन झीलों में कुछ का पानी बिजली उत्पादन के काम आता है | लोनावाला के प्राकृतिक दृश्य मनमोहक है और यहा फैले पहाड़ और झरने बरबस ही सैलानियों को लुभाते है | वैसे तो लोनावाला का आकर्षण है यहा स्थित बुदधिस्त रॉक ,राजमाची | इसके अलावा यहा आप लोनावाला झील और टंगरी झील की सैर भी कर सकते है |

कैसे पहुचे | How to Reach at Lonavala ?

  • वायु मार्ग – लोनावाला से नजदीकी हवाई अड्डा पुणे है | यहा उतरकर टैक्सी के जरिये लोनावाला पहुचे सकते है | लोनावाला मुम्बई और पुणे के बीचोबीच बसा है इसलिए आप अगर मुम्बई के एयरपोर्ट पर भी आते है तो वहा से सीधे लोनावाला पहुच सकते है | पुणे एअरपोर्ट लोनावाला से 64 किमी दूर है जबकि मुम्बई का छत्रपति शिवाजी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा यहा से 104 किमी दूरी पर है |
  • सडक मार्ग – लोनावाला मुम्बई-पुणे एक्सप्रेस वे पर है और सडक मार्ग दुसरे शहरों से भी जुड़ा हुआ है | खोपोली ,करजात ,तालेगांव से भी यहा के लिए कई बसे चलती है |
  • रेलमार्ग– पुणे से प्रत्येक 2 घंटे में लोनावाला के लिए लोकल ट्रेन चलती है | ट्रेन के जरिये मुम्बई से यहा पहुचने में ढाई घंटे लगते है जबकि पुणे से यहा डेढ़ घंटे में पहुचा जा सकता है | रेल से आने वाले यात्री पुणे या मुम्बई पहुचे और टैक्सी या बस के जरिये भी यहा पहुच सकते है |

कब जाए | Best Time to Visit

लोनावाला का मौसम ज्यादातर सुहावना ही रहता है | यहा किसी भी मौसम में आ सलते है लेकिन मई से अक्टूबर के बीच यहा आयेंगे तो मजा कई गुना बढ़ जाएगा | बारिश के मौसम में यहा की हरियाली लाजवाब होती है | सर्दियों में यहा का तापमान 12 डिग्री तो गर्मियों में 36 डिग्री तक रहता है |

Comments

Popular posts from this blog

Pythagoras Biography in Hindi | पायथोगोरस की जीवनी

Pythagoras Biography in Hindi पाईथागोरस (Pythagoras) को महान दार्शनिक और गणितज्ञ माना गया है | इनका जन्म  ईसा से भी 500 वर्ष पूर्व यूनान के सामोस नामक टापू में हुआ था | यह मनुष्य जाति का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि प्राचीनकाल में लोग अपने विषय में किसी प्रकार की कोई सुचना लिखित रूप में प्रस्तुत करके नही रखा करते थे अत: उनके विषय में विस्तार से कुछ मिल पाना बड़ा असम्भव सा होता था | यही स्थिति पाईथागोरस की भी है | उस समय लिखने और संचार के साधनों का उतना विकास भी नही हुआ था और न ही शायद छपाई आदि की कोई व्यवस्था उस समय रही थी | पाईथागोरस (Pythagoras) के समय में तो कदाचित भोज-पत्र पर भी लिखने की प्रक्रिया चल पड़ी थी अथवा नही , कहना कठिन है | बाद के लेखको को पूर्ववर्ती पीढियों द्वारा कहा सूनी के आधार पर जो कुछ सूचनाये प्राप्त हो जाया करती थी उनके आधार पर ही उन महान पुरुषो के बारे में कुछ जानकारी मिलने लगी है | पाईथागोरस उस समय उत्पन्न हुए थे जब गणित अपनी आरम्भिक अवस्था में ही था किन्तु अपनी विद्वता के कारण इस महान दार्शनिक ने एक ऐसी प्रमेय का सूत्रपात किया जो विश्वभर में प्राथमिक कक्षाओ में ही व...

पहिये के अविष्कार की रोचक कहानी | Wheel Invention Story in Hindi

पहिये के अविष्कार की रोचक कहानी | Wheel Invention Story in Hindi आदिमानव लगभग 20,000 साल पहले पहिये दार गाडियों का उपयोग किया करते थे लेकिन विश्वसनीय प्रमाणों के आधार पर ज्ञात होता है कि पहिये का प्रचलन 3500 से 4000 ईस्वी पूर्व सीरिया और सुमेरियसा में ही सबसे पहले हुआ था | 3000 ईसा पूर्व तक मेसापोटामिया में पहिये का ख़ासा प्रचलन शूर हो चूका था और सिन्धु घाटी में यह लगभग 2500 वर्ष ईसा पूर्व पहुचा | पहिये का आविष्कार संसार में कब और कहा ,किस प्रकार हुआ या किसने किया , इस संबध में निश्चित रूप से कुछ नही कहा जा सकता | पहिये का लाभ उठाकर पैदल चलने की इस क्रिया यानि साइकिल का अविष्कार भले ही लगभग पौने दो सौ वर्ष पूर्व हुआ हो लेकिन पहिये का अविष्कार निश्चित रूप से हजारो वर्ष पूर्व हुआ हो इसके सर्वत्र प्रमाण मौजूद है | पौराणिक सभ्यताओं से लेकर हजारो वर्ष पुराणी पूरा-सामग्री में भी रथो या बैलगाडियों के होने के प्रमाण उपलब्ध है | फिर भी ऐसा समझा जाता है कि पहिये का अविष्कार “मेसापोटामिया” में यानि आधुनिक ईराक के एक हिस्से में कभी हजारो वर्ष पूर्व हुआ था | कहा जाता है कि किसी पेड़ के गोल...

भारत के प्रधानमंत्री और उनसे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य | Indian Prime Ministers Facts in Hindi

भारत के प्रधानमंत्री और उनसे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य | Indian Prime Ministers Facts in Hindi प्रधानमंत्री (Prime Minister) , विधायिका और कार्यपालिका दोनों का वास्तविक प्रधान होता है तथा मंत्रियों एवं राष्ट्रपति के बीच संवाद के लिए सेतु का कार्य करता है | राष्ट्रपति की शक्तियाँ औपचारिक ही है | व्यवहार में उसकी शक्तियों का उपयोग PM ही करता है | राष्ट्रपति , लोकसभा में बहुमत दल के नेता को ही प्रधानमंत्री (Prime Minister) नियुक्त करता है परन्तु यदि किसी दल को पूर्ण बहुमत न मिला हो तो सबसे बड़े दल को , यदि वह भी न हो तो चुनाव पूर्व सबसे बड़े गठ्बन्धन वाली पार्टी के नेता को PM नियुक्त करता है | साथ ही निर्धारित समयावधि में लोकसभा में मंत्रीमंडल को विश्वास मत प्राप्त करने को राष्ट्रपति को कह सकता है | आइये पहले भारत के सभी प्रधानमंत्रीयो की सूची पर एक नजर डालते है | भारत के प्रधानमंत्रियों की सूची | Prime Minister of India List in Hindi क्र. प्रधानमंत्री का नाम जन्म-मृत्यु वर्ष कार्यकाल दल 1 जवाहरलाल नेहरु 1889–1964 1947-1964 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस 2 गुलजारीलाल नंदा 1898–1998 1964 (13 दिन) भारत...