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पैकैजिंग इंडस्ट्री में करियर के बेशुमार अवसर | Packaging Industry Career Details in Hindi

पैकैजिंग इंडस्ट्री में करियर के बेशुमार अवसर | Packaging Industry Career Details in Hindi
पैकैजिंग इंडस्ट्री में करियर के बेशुमार अवसर | Packaging Industry Career Details in Hindi

बाजार से जब भी कोई उत्पाद खरीदते है तो सबसे पहले उसकी पैकिंग ही हमे आकर्षित करती है फिर चाहे वह टूथब्रश हो या फिर टीवी | पैकिंग देखकर ही कई बार हम न चाहते हुए भी किसी उत्पाद को खरीद लेते है | अच्छे पैकिंग के लिए कम्पनियों द्वारा पकैजिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है | इस लिहाज से Packaging Industry के करियर को उभरता हुआ फील्ड माना जा रहा है इसलिए अगर किसी नये या उभरते करियर के बारे में आप सोच रहे है तो यह एक बढिया विकल्प हो सकता है | ख़ास बात यह है कि इस क्षेत्र में किसी भी स्ट्रीम के छात्र करियर बना सकते है | इसके लिए कोर्स और पढाई भी महंगी नही है |

करियर के लिहाज से उपयुक्त

देश में अभी 2500 संघठित सेक्टर है जिनके द्वारा बनाये जा रहे हर उत्पाद के लिए अलग अलग पकैजिंग यूनिट की जरूरत होती है यानि हर छोटी से छोटी प्रोडक्शन यूनिट में पकैजिंग इंडस्ट्री के लोगो की जरूरत है | जैसे जैसे संघठित सेक्टर में कम्पनियो की संख्या बढ़ेगी , इस सेक्टर में रोजगार के ओर भी अवसर पैदा होंगे | अभी देश में पैकिंग का बाजार करीब 473 मिलियन डॉलर है | भारत का यह बाजार दुनिया का चौथा सबसे बड़ा पकैजिंग बाजार है | ये सारे संकेत है कि आने वाला समय पकैजिंग इंडस्ट्री में रोगजार के लिहाज से अत्यधिक आशावादी है |

डिजाइनिंग सॉफ्टवेर की समझ जरुरी

आकर्षक डिजाईन , आकार-प्रकार , प्रिजर्वेशन तकनीक , उत्पाद की सुरक्षा , टारगेट ऑडियंस जैसे तमाम पहलुओ का ध्यान रखना होता है | इसके लिए साइंस और टेक्नोलॉजी की समझ बहुत जरुरी है | ज्यादातर कैंडिडेट इस सब्जेक्ट से सेलेक्ट किये जाते है | इसके अलावा डिजाईन की समझ होना फायदेमंद माना जाता है खासकर डिजाइनिंग सॉफ्टवेर की समझ |  पैकिंग किस तरह होनी चाहिए , इसके लिए उत्पाद की जरुरतो को समझना जरुरी होता है |
उत्पाद की जरूरते यानि इसकी व्वयस्था ,शैल्फ लाइफ , ट्रांसपोर्ट का माध्यम , कितनी दूर पहुचना है जैसे कई कारको को जानना जरुरी होता है | इसके बाद यह तय होता है कि किस तरह की पैकिंग होनी चाहिए | इन सबके अलावा इसमें बाजार की मांग के हिसाब से बदलाव , प्रोडक्शन लागत और वातावरण संतुलन का भी ध्यान रखना होता है | कई ऐसी कानूनी बाधाये है जिनका काम के दौरान ध्यान रखना पड़ता है |

चुनौती

कोई भी ग्राहक किसी सामान को देखकर उत्पाद नही खरीदता , अक्सर वह पैकिंग देखकर उत्पाद चुनता है | इस लिहाज से पैकिंग केवल उत्पाद को सुरक्षित बनाये रखने के लिए ही नही ग्राहकों का ध्यान खींचने का भी काम करती है | बाजार में मौजूद हर उत्पाद के लिए अलग अलग पैकिंग की जरूरत होती है | इसके लिए ऐसी तकनीक चाहिए होती है जो उत्पाद को ग्राहक तक बढिया हालत में पहुचा सके | पैकिंग उत्पाद की ब्रांडिंग से लेकर उसकी शेल्फ लाइफ तक के सभी फीचर्स जरुरी होते है |
जानकारों का मानना है कि पैकिंग उस उत्पाद के बारे में सीधे ,सरल और आकर्षक अंदाज में ग्राहकों को बताती है इसलिए उसका डिजाईन ,रंग और आकार ऐसे होते है जो ग्राहकों को उत्पादों की भीड़ में उसे चुनने के लिए आकर्षित करे | पैकिंग उसकी ढुलाई और उसकी सुरक्षा के लिए भी बहुत अहम होती है | ग्राहक को पैकिंग खोलते ही उत्पाद अच्छी गुणवत्ता में मिले , इसके लिए प्रोटेक्टिव मटेरियल और उन्नत तरीके से की गयी पैकिंग मायने रखती है |

वेतन

पैकिंजिंग कोर्स करने के बाद शुरुवाती दौर में कम्पनिया औसतन 3-4 लाख रूपये सालाना का पैकेज ऑफर करती है | इसके बाद दुसरे सेक्टर्स की तरह ही यहा भी काम और अनुभव के हिसाब से वेतन बढ़ता चला काटा है | ट्रेनिंग और इंटर्नशिप के दौरान मिलने वाले भत्ते भी करीब 25 हजार रूपये तक होते है |

योग्यता

इसमें बी.टेक को छोड़ दे तो ज्यादातर कोर्स डिप्लोमा और पी.जी.डिप्लोमा स्तर के है इसलिए इसमें कोर्स करने के लिए छात्र का स्नातक होना जरुरी है जबकि बी,टेक कोर्स में दाखिला 12वी के बाद ही मिल पाता है |

प्रमुख कोर्स

  • Post Graduate Diploma in Packaging (2 Years)
  • B.Tech in Packaging Technology (4 Years)
  • Diploma in Packaging (3 Months)
  • Certificate Program in Packaging (3 Months)
  • Distance Education Program in Packing (1 Year 6 Months)
  • Intensive Course in Packaging (3 Months)

प्रमुख संस्थान

  • एपेरेल मेड , काम कोटी मार्ग , नई दिल्ली
  • इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ पकैजिंग , मुम्बई , महाराष्ट्र
  • एस.आई.ई.एस. स्कूल ऑफ़ पैकेजिंग टेक्नोलॉजी सेण्टर , मुम्बई , महाराष्ट्र

 

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