पानी हमारे जीवन की लिए सबसे जरुरी है इसी कारण सभी प्राचीन सभ्यताए नदियों के किनारे विकसित हुयी है | बाद में विकास क्रम में जब लोग नदी से दूर भी बसने लगे तब पानी के स्त्रोत तालाब थे लेकिन जहा तालाब नही थे वहा पानी की कमी को दूर करने के लिए Step Wells का निर्माण किया | इन्हें बावड़ी भी कहा जाता है |
प्राचीनकाल में राजाओं द्वारा भी पानी की कमी को दूर करने के लिए कुछ बड़ी और भव्य बावडियो का निर्माण कराया गया | इन्हें विशेष प्रकार के कुए भी कहा जा सकता है | ये काफी चौड़े होते है और इनमे नीचे तक जाने के लिए सीढ़िया बनी होती है इसी कारण इसे स्टेप वेल कहते है | कई Step Wells तो काफी भव्य तरीके से बनाया गया था |
आज आधुनिक तकनीक और सुख-सुविधाओं के बावजूद भारत के कई हिस्सों में लोग पानी की कमी से जूझ रहे है | प्राचीनकाल में इस समस्या के समाधान के लिए लोग स्टेप वेल या बावडियो का निर्माण करवाया करते थे | आज भी देश के कई हिस्से में इसे देखा जा सकता है | आइये आज हम आपको देश के प्रमुख और सुंदर Step Wells की जानकारी देते है |
अग्रसेन की बावड़ी
यह स्मारक ASI की देखरेख में है | यह 60 मीटर लम्बी और 15 मीटर चौड़ी है | यह एतेहासिक स्टेपवेल नई दिल्ली के हेली रोड पर कनाट प्लेस के नजदीक है | इस स्टेप वेल में 103 स्टेप वेल है जो लाल पत्थरों से बनी है |
रानी की बावड़ी
इसे Queen’s Step Well भी कहते है | यह गुजरात के पाटन शहर में स्थित है | यह यूनेस्को के वर्ल्ड हेरिटेज साईट की लिस्ट में भी शामिल है | पूरब की ओर रुख किये यह बहुमंजिला स्टेप वेल है जिसमे बैठने के लिए जगह भी बनी हुयी है जो इसे दुसरे स्टेप वेल्स से अलग करते है |
अदालज स्टेप वेल
यह स्टेप वेल अहमदाबाद के निकट अदालज गाँव में स्थित है | इसे 1499 में रानी रूदा बाई ने बनवाया था | यह स्टेप वेल भी काफी सुंदर है और इसे देखने के लिए भी बड़ी संख्या में पर्यटक आते है | यह स्टेप वेल यहाँ के कई त्योहारों से भी जुड़ा है और इसे लेकर यहा कई प्रकार की मान्यताये भी जुडी है |
हम्पी स्टेप वेल
इसका नाम पुष्करिणी है जो चालुक्य कला का बेहतरीन नमूना है | यह कर्नाटक के हम्पी नामक जगह पर है | इस सुंदर स्टेप वेल को 15वी शताब्दी में बनाया गया था | उस समय यह क्षेत्र विजयनगर के अंतर्गत आता था | यह स्टेप वेल 22 मीटर चौड़ा और 7 मीटर गहरा है |
मोढेरा स्टेप वेल
यह स्टेप वेल पुष्पवती नदी के किनारे मोधेरा स्थित सूर्य मन्दिर के प्रांगण में स्थित है | यह मन्दिर ASI के देखरेख में है | इसे सूर्य कुंड नाम से भी जाना जाता है | यह आयताकर स्टेप वेल प्राचीन काल की विकसित ज्यामितीय कला को भी दर्शाता है |
चाँद बावड़ी

यह देश के सबसे प्रसिद्ध दर्शनीय स्थलों में से एक है | इस स्टेप वेल में छोटी छोटी 3500 सीढ़िया है और यह 13 मंजिला है | यह भारत के सबसे बड़े और गहरे स्टेप वेल्स में एक है | यह राजस्थान में स्थित है और यहाँ के सबसे प्राचीन एवं आकर्षक स्थलों में से एक है |
5 हजार साल पुराना स्टेप वेल
कच्छ के धोलावीरा नामक जगह पर खुदाई के दौरान एक 5000 साल पुराना स्टेप वेल मिला है | यह मोहनजोदड़ो के विशाल शस्त्रागार से भी तीन गुना बड़ा है | यह प्राचीन मिले अभी तक के स्टेप वेल में सबसे बेहतरीन हालत में है | यह आयताकर है यह 73.4 मीटर लम्बा और 29.3 मीटर चौड़ा है |
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