
गोडावण (Bustard) राजस्थान के मरुस्थल में पाया जाने वाला दुर्लभ पक्षी है | इसे हुकना , सारंग , सोहन तथा सोन चिरैया भी कहते है | अंग्रेजी में इसे Great Indian Bustard कहते है | आइये आपको गोदावण (Bustard) से जुड़े रोचक तथ्य बताते है |
- उड़ने वाले पक्षियों में एशिया और यूरोप का ग्रेट इंडियन बस्टर्ड सबसे भारी होता है | इसका अधिकतम वजन 21 किलोग्राम होता है |
- अफ्रीका के कोरी बस्टर्ड को कभी-कभी उड़ने वाले पक्षियों में सबसे भारी होने का गौरव मिलता है | इसका औसत वजन 13.6 किलोग्राम होता है |
- दक्षिणी अफ्रीका की प्रजाति का वजन 18.2 किलोग्राम होता है | लम्बाई 1.2 मीटर होती है और पंखो का फैलाव 2.5 मीटर होता है | मादा 75 सेमी से कम होती है |
- अफ्रीका में इसकी 16 प्रजातियाँ मिलती है | यूरेशिया में इसकी 6 और ऑस्ट्रेलिया में इसकी 6 और ऑस्ट्रेलिया में इसकी एक प्रजाति मिलती है जिसका वजन 16.5 किलोग्राम तक होता है |
- ऑस्ट्रलिया के नर बस्टर्ड का वजन 7 किलोग्राम और मादा का वजन 5.3 किलोग्राम होता है | इतने भारी वजन के बाद भी यह आसानी से उड़ सकती है |
- जब यह आसमान से नीचे जमीन पर उतरती है तब लगता है जैसे कोई एरोप्लेन रनवे पर उतर रहा हो | यूरोप और अफ्रीका के बस्टर्ड जब अपनी लम्बी प्रवास यात्रा पर होते है तब जमीन से 60 से 90 मीटर की ऊँचाई पर उड़ते है |
- गोडावण का माँस स्वादिष्ट और गरम होता है इसलिए कई लोग इसके शिकार के लिए भटकते रहते है |
- गोडावण का रंग झाड़ियो जैसा रहता है | बदन का उपरी हिस्सा बादामी होता है जिस पर काली लकीरे होती है | नीचे का हिस्सा सफेद होता है | सिर के उपर काले रंग का तुर्रा होता है | दांत लम्बे होते है |
- गर्वीले स्वभाव का यह पक्षी कभी पेड़ पर नही चढ़ता | जमीन पर ही यह अपना समय बिता देता है | यह उड़ सकता है लेकिन भारी शरीर के कारण चलना ही अधिक पसंद है | दिन भर में 8-15 किमी तक चल सकता है |
- यह समतल क्षेत्रो के खुले मैदानों की झाड़ियो में पाया जाता है | धुप से बचने के लिए यह रेगिस्तान में उगे सरकंडे और घने घास में छिपा रहता है | टिड्डी , गुबरैला , कीट-पतंगे , छिपकलिया , छोटे सर्प ,बीज ,फल ,बेर ,पौधों की कोपले आदि इसका भोजन है |
- छोटी नस्ल के गोडावण सर्दी के शुरू में मध्य एशिया से प्रवास यात्रा पर भारत आते है और सर्दी समाप्त होने के साथ ही कुच कर जाते है |
- असली गोडावण पुरे विश्व में सिर्फ राजस्थान में मिलते है | गोडावण की नस्ल के पक्षी सुंदर और भारी होते है | इनकी औसत ऊँचाई एक मीटर के लगभग होती है | लम्बी गर्दन , उठा , हुआ सीना और लम्बी चोंच इसके मुख्य आकर्षण है |
- जोड़ा बनाने के समय नर गला फुला-फुलाकर पंख फैलाकर जोर से आवाज करता है | माँसाहारी लोग इसके माँस के लिए शिकार करते है | अस्सी के दशक में इसका बहुत शिकार हुआ है |
- राजस्थान का राज्य पक्षी गोडावण का अस्तित्व खतरे में है | राजस्थान में ही नही , पुरे भारत में गोडावण की स्थिति चिंताजनक है |
- सर्दी के आरम्भ में गोडावण पुरे भारत में पाया जाता था | अंधाधुंध शिकार और इसके आवास स्थल पर मनुष्य के अतिक्रमण के कारण इसके अस्तित्व को खतरा बन गया है |
- 1985 में इसकी संख्या 1200 थी आज इसकी संख्या लगभग 300 रह गयी है जिसमे से 125 राजस्थान के अजमेर ,जैसलमेर जिले में है |
- जैसलमेर स्थित राष्ट्रीय मरु उद्यान गोडावण का आवास स्थल कहा जाता है लेकिन अब यहाँ 97 गोडावण रह गये है | तीन साल पूर्व इसकी संख्या 110 थी | इसी तरह हाडोती के मोरसन में इसकी संख्या कुछ वर्ष पहले 12 थी लेकिन आज यहाँ सिर्फ एक गोडावण नजर आता है |
- यह पक्षी अर्ध-मरुस्थलीय शुष्क जलवायु वाले प्रदेशो में मिलता है | सेवण घास इसके लिए अनुकूल होती है लेकिन पिछले कुछ सालो में सेवण घास के चारागाह में कमी आयी है |
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