कारगिल युद्ध के वीर सपूत , जिन्होंने अपने अदम्य साहस से दिलाई विजय | Kargil War Heroes Bravery Story in Hindi

इस वर्ष 26 जुलाई को कारगिल विजय के 18 वर्ष पुरे हो रहे है यह दिन उस गौरव के पल को याद करने का दिन है जब देश के वीर सपूतो ने “ऑपरेशन विजय” को सफलतापूर्वक अंजाम देकर पाकिस्तानी घुसपैठियो को मार भगाया था | इस युद्ध में हमारे बहुत से जवान शहीद भी हुए | यह उन उन शहीदों को नमन करने का दिन है | कारगिल युद्ध में देश के वीर सपूतो ने अदम्य साहस और शौर्य का परिचय देकर दुश्मनों के नापाक इरादे को असफल कर दिया | आइये इस ख़ास मौके पर करते है उन वीर सपूतो को याद करने से पहले कारगिल युद्ध के बारे में संक्षिप्त जानकारी आपको देते है |
कारगिल युद्ध की विजय गाथा
दो महीने से भी ज्यादा समय तक पाकिस्तानी सेना से युद्ध चलने के बाद वह शुभ दिन आया , जब दुश्मन सैनिको को अपनी सीमाओं से भाग खड़े होना पड़ा | कारगिल युद्ध दुर्गम पहाडियों पर लड़ा गया था जहा दुश्मन सेना उपर पहाडी पर थी लेकिन भारतीय सेना ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए उन्हें खदेड़ दिया | आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इस युद्ध के दौरान भारतीय सेना के द्वारा तोपखाने से 2 लाख 50 हजार गोले ओर राकेट दागे गये थे | 300 से अधिक तोपों , मोर्टार और राकेटलॉन्चरो ने रोज करीब पांच हजार बम फायर किये थे |
लड़ाई के महत्वपूर्ण 17 दिनों में प्रतिदिन आर्टिलरी बैटरी से औसतन एक मिनट में एक राउंड फायर किया गया था | सरकारी आंकड़ो के मुताबिक दुसरे विश्व युद्ध के बाद यह पहली ऐसी लड़ाई थी जिसमे किसी एक देश ने दुश्मन देश की सेना पर इतनी बमबारी की थी | इन सबके बीच भारतीय सेना के वीर सपूतो के साहस की ताकत थी | कई गोलियाँ खाने के बाद भी वीर सपूतो दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए | 26 जुलाई 1999 जीत का परचम लहराया था | इस युद्ध में हमारी सेना ने करीब 527 से अधिक वीरो को खो दिया जबकि 1300 से ज्यादा सैनिक घायल हो गये थे | शहादत हासिल करने से पहले जिन वीर सपूतो ने जिस पराक्रम का परिचय दिया उससे देश के बच्चे बच्चे का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है | आइये इस ख़ास अवसर पर याद करते है बहादुर सपूतो की शौर्य गाथा |
कैप्टन विक्रम बत्रा
कैप्टन विक्रम बत्रा उन वीर योद्धाओ में से एक है जिन्होंने कारगिल युद्ध में सामरिक रूप से महत्वूर्ण टाइगर हिल जैसी चोटियों पर भारत का कब्जा दिलाया था | हिमाचल प्रदेश के छोटे से कस्बे पालमपुर के रहने वाले विक्रम को पाकितानी लडाको ने भी उनकी बहादुरी के लिए शेरशाह के नाम से नवाजा था | सामने से होती भीषण गोलीबारी में घायल होने के बावजूद उन्होंने अपनी डेल्टा टुकड़ी के साथ चोटी नम्बर -4875 पर हमला किया , मगर एक घायल साथी अधिकारी को युद्ध क्षेत्र से निकालने के प्रयास में विक्रम बत्रा 7 जुलाई की सुबह शहीद हो गये | कैप्टन विक्रम बत्रा चाहते तो खुद बच कर निकल सकते थे लेकिन उन्होंने दुश्मनों का सामना किया | उनके इस अदम्य साहस और बलिदान के लिए मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च सैनिक पुरुस्कार परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया |
कैप्टन अनुज नय्यर
17 जाट रेजिमेंट के बहादुर कैप्टन अनुज नय्यर टाइगर हिल्स सेक्टर की एक चोटी वन पिम्पल की लड़ाई के हीरो थे | नायर इस लड़ाई में अपने छह साथियो के शहीद होने के बाद मोर्चा सभालते रहे | वे गम्भीर रूप से घायल हो गये थे लेकिन उन्होंने पोस्ट नही छोड़ने का फैसला किया | आखिरकर इस लड़ाई में हमे जीत हासिल हुयी | इस वीरता के लिए कैप्टन अनुज को मरणोपरांत भारत के दुसरे सबसे बड़े सैनिक सम्मान महावीर चक्र से नवाजा गया |
कैप्टन सौरभ कालिया
कारगिल युद्ध में इंडियन एयरफ़ोर्स ने भी अपनी अहम भूमिका निभाई थी | तोलोलिंग की दुर्गम पहाडियों में छिपे घुसपैठियो पर हमला करते समय वायुसेना के कई बहादुर जवान शहीद हुए | सबसे पहले कुर्बानी देने वालो मेट हे कैप्टन सौरभ कालिया और उनकी पेट्रोलिंग पार्टी के जवान | घोर यातनाओं के बाद भी कैप्टन कालिया ने कोई भी जानकारी दुश्मनों को नही दी | स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा का विमान भी दुश्मन की गोलीबारी का शिकार हुआ फिर भी उन्होंने हार नही मानी और पैराशूट से उतरते समय शत्रुओ पर गोलीबारी जारी रखी और वे लड़ते लड़ते शहीद हो गये |
लेफ्टिनेट मनोज पाण्डेय
1/11 गोरखा राइफल्स के लेफ्टिनेट मनोज पाण्डेय की बहादुरी की कहानिया आज भी बटालिक सेक्टर के टॉप पर लिखी है अपनी गोरखा पलटन लेकर दुर्गम पहाडी क्षेत्र में उन्होंने दुश्मनों के छक्के छुड़ा दिए | अत्यंत दुर्गम क्षेत्र में लड़ते हुए मनोज पाण्डेय ने दुश्मनों के कई बंकर नष्ट कर दिए | गम्भीर रूप से घायल होने के बावजूद मनोज अंतिम क्षण तक लड़ते रहे | भारतीय सेना की परम्परा का मरते दम तक पालन करने वाले मनोज को उनके शौर्य और बलिदान के लिए मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया |
नायक ब्रिज मोहन सिंह
9 पैरा-स्पेशल फोर्सेज के नायक ब्रिज मोहन सिंह 30 सैनिको की टीम के कमांडर थे | उन्हें मशकोह सब सेक्टर में सैंडो टॉप पर कब्जा करने का मिशन दिया गया | इसके साथ ही उनका दूसरा टास्क 5250 मीटर की ऊँचाई के पहाड़ पर कब्जा करके पाकिस्तान के लोजिस्टिक बेस की तरफ बढना था |वे बड़ी बहादुरी से अपने मिशन की ओर बढ़ते रहे और उन्होंने दुश्मनों के छक्के छुड़ा दिए | उन्हें कारगिल युद्ध में अपने अदम्य साहस के लिए वीर चक्र से नवाजा गया |
ग्रेनेडियर योगेन्द्र यादव
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के रहने वाले योगेन्द्र यादव उन वीरो में से है जो कारगिल युद्ध के दौरान गम्भीर रूप से घायल हो गये | योगेन्द्र को 19 गोलियाँ लगी फिर भी चार दुश्मनों को ढेर कर दिया | दुश्मनों को लगा कि योगेन्द्र मर चुके है लेक्रिन फिर भी योगेन्द्र की साँस थमी नही थी | उसी हालत में उन्होंने दुश्मनों पर ग्रेनेड फेंका | कई वर्षो तक इलाज के बाद उन्हें बचा लिया गया | सर्वोच्च बहादुरी के लिए उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया |
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