
भगवान विष्णु का वाहन माना जाने वाला गरुड़ (Eagle) शिकारी पक्षियों में सबसे बड़ा होता है और सबसे भयंकर भी | आइये आपको गरुड़ (Eagle) और उसकी प्रजातियों से जुड़े रोचक तथ्य बताते है |
- गरुड़ (Eagle) के पंजे इतने मजबूत होते है कि उड़ते उड़ते अपने शिकार को पंजो से पकडकर उठा ले जाते है | इसकी दृष्टि तेज होती है |
- ऊँचे ऊँचे चट्टानों और वृक्षों पर बैठा रहता है | यह हवा में एक ही स्थान पर स्थिर उड़ान करता रहता है और फिर अचानक बड़ी तेजी से शिकार पर हमला बोलकर उसे दबोच लेता है |
- गरुड़ अमेरिका का राष्ट्रीय प्रतीक है | इसकी कई किस्मे है तथा इसकी कोई न कोई किस्म संसार के हर देश में पायी जाती है | कलंगीदार ,सर्पवत , श्वेतनेत्र , मत्स्य मारक आदि इसकी कई किस्मे है |
- हमारे देस में सभी किस्मे पायी जाती है | सफेद आँखों वाला गरुड़ , जिसकी टाँगे औरो की अपेक्षा अधिक लम्बी होती है केवल जाड़ो में आता है | यह देखने में भद्दा होता है | रंग हल्का ,पीला , भूरा या गाढ़ा काला होता है | इसकी दुम गोल होती है तथा नीचे से देखने से डैने पारदर्शक प्रतीत होते है |
- भारत में मिलने वाले कलँगीदार हाक इगल (Crested Hawk Eagle) के शरीर पर कई रंग अव्यस्थित से होते है | आमतौर पर उपर से भूरा , नीचे काला होता है | वक्ष पर चाकलेटी रंग की धारियाँ होती है | लम्बी पतली कलँगी सिर के पीछे होती है इसका मुख्य भोजन मछली ,साँप, चूहा ,केकड़ा आदि है | जंगल में किसी पेड़ की पत्तियों के बीच बैठकर जंगली मुर्गी , खरगोश आदि जन्तुओ पर भी इसकी निगाह रहती है | तेजी से झपट्टा मारकर शिकार को पकडकर ले जाता है | इसकी “की की की की की ” बोली शुरू में धीमी होती है फिर ऊँची होती हुयी चीख में बदल जाती है |
- बंगाल ,असम सहित उत्तरी भारत की झीलों या नदियों के पास मत्स्य मारक (Ring Taled Fishing Eagle) मिलती है | यह मछली पकडकर पंजो में दबा लेती है | साँप , चूहे ,केकड़े और मृत जन्तु भी इसका भोजन है | कभी कभी यह पनडुब्बी या अन्य जल पक्षियों को भी मार देती है | कर्कश चीख जैसी बोली होती है |
- भारत ,पाकिस्तान , बांग्लादेश , श्रीलंका ,बर्मा में क्रेस्टेड सर्पेंट ईगल (Crested Serpent Eagle)मिलती है | किसी ऊँचे पेड़ पर बैठकर शिकार को देखती रहती है और आसमान में बड़े बड़े चक्कर लगाती रहती है | इसकी बोली तेज सिटी जैसी होती है | भारत में इसे डोमेरा चील कहते है | यह स्थानीय रूप से प्रवास यात्रा करती है | मादा एक क्रीम रंग का अंडा देती है जिस पर लाल-भूरे धब्बे होते है |
- सी ईगल (Sea Eagle) का वजन 6 किलोग्राम या उससे अधिक होता है | इसके पंखो का फैलाव 8 फीट होता है | जिन्दा या मृत पसिफ़िक सालमन , पानी की चिड़िया आदि इसका भोजन है |
- अफ्रीकन स्नेक ईगल के पंख लम्बे ,दम छोटी होती है | अधिकतर समय यह आकाश में 200-500 फीट ऊँचाई पर 56-58 किमी प्रति घंटे की गति से उड़ता रहता है |
- हार्पी ईगल की मादा का वजन 6 किलोग्राम होता है जबकि नर का वजन 3-4 किलोग्राम होता है | यह दक्षिण और मध्य अमेरिका के जंगलो में मिलता है | यह बड़े जंगलो में स्तनपायी अगौतो स्लॉथ जैसे जन्तु का शिकार करता है |
- हार्पी जितना ही बड़ा फीलीपाइन का मंकी ईटिंग ईगल होता है जो फिलिपीन के द्वीपों पर मिलता है | फिलिपीन का गरुड़ बंदरो को खाना पसंद करता है | भयानक दिखने वाले इस पक्षी की ऊँचाई 5 फीट और वजन 4 किलोग्राम तक होता है | नीली ,आँखे बड़ी तीखी , मुडी हुयी चोंच और नुकीले पंखो के कारण यह बड़ा ही आकर्षक लगता है | यह शिकारी पक्षी फिलिपीन के गर्म प्रदेशो में बरसाती जंगलो में रहता है | अपने शिकार को मुड़े हुए पंजो से दबोच लेता है और अपनी तीखी हुकदार चोंच से उसे चीरकर उसका मांस निकालता है |
- क्राउंड ईगल (Cround Eagle) अपने घोंसले में बहुत खतरनाक होता है | यह 15-122 किलोग्राम वजन तक स्तनपायी जन्तुओ का शिकार कर लेता है |
- सफेद उदर वाला सी ईगल (White Bellied Sea Eagle) बड़े आकार का सुंदर उकाब होता है जिसका उपरी भाग भूरा और सिर , गर्दन और निचला भाग , दुम का अंतिम तिहाई भाग सफेद होता है | मुम्बई के दक्षिण से पूर्व तक के समुद्री तटो , मलेशिया और ऑस्ट्रलिया में यह पाया जाता है | समुद्र के किनारे किसी बड़े पेड़ की ऊँचाई पर टहनियों का मंच सा बनाकर घोंसला बनाता है जिस पर हरी पत्तियाँ बिछा दी जाती है | मादा 2 सफेद अंडे देती है |
- वेज टेल्ड ईगल (Wedge Tailled Eagle) दक्षिणी अमेरिका और मलेशिया को छोडकर विश्व-भर में पाया जाता है | चारागाह और खुले खेतो में अधिक रहता है | चार बड़े गरुडो में यह एक है | इसके पंखो का फैलाव ढाई मीटर तक होता है | चोंच से दुम तक यह एक मीटर लम्बा होता है | इसकी हुकनुमा चोंच शक्तिशाली होती है | आँखे चमकीली सुनहरी होती है पर भूरे-काले होते है | गले पर सुनहरे चिन्ह होते है | पंखो पर लाल रंग की झलक होती है | अवयस्क भूरे होते है जो उम्र के साथ गहरे होते चले जाते है | व्यस्क होने में इसे 4-5 वर्ष लग जाते है | नर-मादा एक जैसे होते है लेकिन मादा नर से कुछ बड़ी होती है |
- वेज टेल्ड ईगल दिन में छोटे जन्तुओ ,चिडियों ,रेंगने वाले जीवो का शिकार करता है | यह मरे हुए जन्तुओ को भी खा लेता है | टहनियों का प्लेटफार्म जैसा घोंसला बना लेता है | साल दर साल घोंसले का उपयोग करता रहता है | इसका घोंसला 3 मीटर गहरा , 2 मीटर ऊँचा और 400 किलोग्राम वजन तक का देखा गया है | कई बार पेड़ से ज्यादा वजन के घोंसले भी देखे गये है |
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