Skip to main content

दीपावली - लक्ष्मी साधना एवं धन प्राप्ति का उचित अवसर | Deepawali Lakshmi Pooja Significance in Hindi

Deepawali Lakshmi Pooja Significance in Hindi
Deepawali Lakshmi Pooja Significance in Hindi

माँ लक्ष्मी प्रत्येक व्यक्ति की आराध्या है | संसार का आधार है | माँ महालक्ष्मी मात्र धन ही प्रदान नही करती क्योंकि मात्र धन से ही सुख-शान्ति नही मिलती | धन से भोजन खरीदा जा सकता है लेकिन भूख और स्वास्थ्य नही | रुपया-पैसा हजारो के पास हो सकता है लेकिन आवश्यक नही रूप , यौवन , धन , पद , प्रतिष्टा , यश कीर्ति सभी उपलब्ध हो जाता है | माँ लक्ष्मी सभी कुछ देने में समर्थ है |
दीपावली की परम्परा कब से आरम्भ हुयी यह बताना या जानना असम्भव है मगर आज से 21 लाख वर्ष पूर्व इस परम्परा का इतिहास अलग-अलग ढंग से हमारे ग्रंथो एवं पुराणों में वर्णित है | ज्योतिष की दृष्टि से जब सूर्य कन्या राशि में होता है पितृ श्राद्ध बनता है सूर्य के तुला राशि में प्रवेश होने पर पितृगण स्वस्थान को प्रवेश करते है | उनके मार्गदर्शन के लिए दीपदान का विधान कार्तिक मॉस की अमावस को ही दीपावली का दिन पड़ता है अन्य दिनों में नही कालरात्रि एक ओर जहा शत्रुविनाशिनी होती है वही उसे शुभ्त्वे की प्रतीक , सुख-सौभाग्य प्रदायिनी होने का भी गौरव है |
दीपावली की रात्रि को लक्ष्मी , कुबेर और गणपति की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है इस रात्रि को यंत्र-मन्त्र-तन्त्र की सिद्धि के लिए अति-सिद्ध और उचित अवसर माना जाता है | दीपावली की रात्रि के चार पहर अपना अलग अलग महत्व रखते है | प्रथम निशा , द्वितीय दारुण , तृतीय काल , चतुर्थ “महा” सामान्यतया दीपावली की रात्रि में आधी रात्रि के बाद स्थिर लग्न में अथवा डेढ़ से 2 बजे के समय महानिशा का समय निरुपित किया जाता है | मान्यता है कि इस काल में लक्ष्मी जी की साधना करने से अक्षय धन-धान्य की प्राप्ति होती है | इस काल को महानिशा भी कहते है | इस कालावधि में आराधाना करने से अक्षय लक्ष्मी की जहा प्राप्ति होती है | वहा माँ लक्ष्मी का उस स्थान पर स्थिर वास होता हो |
ज्योतिष गणना के अनुसार दीपावली के दिन सूर्य और चन्द्रमा एक ही राशि में अर्थात तुला राशि में होते है | तुला राशि का स्वामी शुक्र ग्रह है जो सुख-सौभाग्य का कारक है | रुद्रायामल तन्त्र में इसका उल्लेख है | जब सूर्य और चन्द्रमा तुला राशी में होते है तब इस योग से लक्ष्मी जी का पूजन करने से प्रचुर मात्रा में धन-धान्य की प्राप्ति होती है | इसी तरह तन्त्र साधना में दीपावली की अर्द्धरात्रि को किया गया जप-अनुष्टान अति-शीघ्र फलीभूत होता है | सफलतादायक सिद्धिदायक होता है |

दीपावली पर लक्ष्मी प्राप्ति के अचूक उपाय

दीपावली की रात्रि को एक बजोट (लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र या पीला वस्त्र बिछाकर उस पर पीले किये हुए चावल छिडक ले | कमलासन पर विराजमान लक्ष्मी जी और गणेश जी का चित्र रखे | पीले चावलों की एक ढेरी पर श्री यंत्र एवं कुबेर यंत्र की स्थापना करके उसके आगे प्रथम पंक्ति 11 गोमती चक्रो की रखे | दुसरी पंक्ति में 11 पिली कौड़िया , तीसरी में 11 कौल डोधे (कमल गट्टे के बीज) हो सके तो एक कमल का पुष्प भी इसके उपर रख दे |
गाय के घी से ज्योति प्रज्वलित कर ले | धुप-दीप जला ले , सामान पर जल का छींटा दे | रोली-मौली ,फल-फुल चढ़ाकर माँ लक्ष्मी से सदैव स्थिर वास करने का आह्वान करे | अति श्रुधा से श्री सुक्तम की 16 ऋचाओं (श्लोको) का 16 बार नियमित पाठ करे | लक्ष्मी जी के मूल मन्त्र की लाल आसन पर बैठे कमलगट्टे की माला पर 11 और 21 माला करे | यह मन्त्र जाप का क्रम भाईदूज तक चलने दे | यंत्र एवं लक्ष्मी गणेश जी की मूर्ति को मन्दिर में स्थापित करके बाकि का सामान लाल कपड़े पर रखा हुआ उसी कपड़े में बाँध अपने लॉकर और कैश बॉक्स में रखे |

  • रुका हुआ धन पुन:प्राप्त करने के लिए दीपावली की रात्रि को एक मिटटी अथवा आटे का चौमुख दीपक बना देसी घी , तिल के तेल से भर कर उसमे 4 बत्तिया रुई की रख के किसी चौराहे पर अर्ध रात्री को जलाए | उस दीपक में 3 काले हकीक एक-एक करके जिसमे रुपया वापस लेना है उसका नाम लेकर डाल दे | दीपक के उपर नागकेसर ,जावित्री , काले तिल एक-एक चम्मच भी डाल दे | यह क्रम आगे भी वर्ष भर हर आमावस को करते रहे |
  • दीपावली की रात्रि में के एक डिब्बी में (चाँदी की हो तो अति उत्तम) आधा शहद भरकर आधे बचे में नागकेसर भरकर दीपावली पूजन के साथ रखे | वर्ष भर रखे अगली दीपावली पर जल प्रवाह करे | धन वृद्धि होगी |
  • एक नये पीले वस्त्र (रुमाल साइज) में 10 ग्राम नागकेसर , 7 हल्दी की गाँठे , 7 सुपारी साबुत , एक चाँदी का सिक्का , एक तांबे का बिना छिद्र का पुराना पैसा , 20 ग्राम चावल बांधकर पोटली को लक्ष्मी जी की मूर्ति के आगे पूजन में रखे | धुप-दीप से पूजन करे | भाईदूज के दिन पोटली को अपनी अलमारी अथवा कैश बॉक्स में रखे | यह प्रयोग दीपावली अथवा किसी भी रवि पुष्य गुरु पुष्य नक्षत्र में किया जा सकता है | पूजन के समय “ॐ श्री श्रीयै नम:” मन्त्र का जाप कमल गट्टे की माला पर करे |
  • दीपावली की रात्रि को पूजन के समय 12 हकीक पत्थर अपने दांये हाथ की मुट्ठी बंद करके “ॐ श्री श्रीयै नम:” के मन्त्र का 108 बार जाप करके इन पत्थरों को पीले वस्त्र में बाँध गल्ले अथवा अलमारी में रखे | निसंदेह लक्ष्मी की कृपा बनी रहेगी |
  • दीपावली की रात्रि यदि 11 हकीक पत्थर अपने किसी शत्रु , मुकदमा , कोर्ट कचहरी में विजय प्राप्ति के लिय उसका पत्थरों पर नाम बोलते हुए बाहर कच्ची भूमि में दबा दे | शत्रु का पतन-मुकदमे में विजय होती है |
  • राजनितिज्ञो अथवा किसी चुनाव में विजय प्राप्ति के लिए दीपावली की रात्रि एक तांबे के दीपक में अलसी का तेल , आक के फल की रुई से बाती कर जलाया जाए और उस के आगे “ॐ क्रा क्रा धूम्रसारी वताक्ष विजयती जयति ॐ स्वाहा:” का जितना हो सके रुद्राक्ष की माला जप करने से विजय की प्राप्ति होती है |

Comments

Popular posts from this blog

Pythagoras Biography in Hindi | पायथोगोरस की जीवनी

Pythagoras Biography in Hindi पाईथागोरस (Pythagoras) को महान दार्शनिक और गणितज्ञ माना गया है | इनका जन्म  ईसा से भी 500 वर्ष पूर्व यूनान के सामोस नामक टापू में हुआ था | यह मनुष्य जाति का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि प्राचीनकाल में लोग अपने विषय में किसी प्रकार की कोई सुचना लिखित रूप में प्रस्तुत करके नही रखा करते थे अत: उनके विषय में विस्तार से कुछ मिल पाना बड़ा असम्भव सा होता था | यही स्थिति पाईथागोरस की भी है | उस समय लिखने और संचार के साधनों का उतना विकास भी नही हुआ था और न ही शायद छपाई आदि की कोई व्यवस्था उस समय रही थी | पाईथागोरस (Pythagoras) के समय में तो कदाचित भोज-पत्र पर भी लिखने की प्रक्रिया चल पड़ी थी अथवा नही , कहना कठिन है | बाद के लेखको को पूर्ववर्ती पीढियों द्वारा कहा सूनी के आधार पर जो कुछ सूचनाये प्राप्त हो जाया करती थी उनके आधार पर ही उन महान पुरुषो के बारे में कुछ जानकारी मिलने लगी है | पाईथागोरस उस समय उत्पन्न हुए थे जब गणित अपनी आरम्भिक अवस्था में ही था किन्तु अपनी विद्वता के कारण इस महान दार्शनिक ने एक ऐसी प्रमेय का सूत्रपात किया जो विश्वभर में प्राथमिक कक्षाओ में ही व...

पहिये के अविष्कार की रोचक कहानी | Wheel Invention Story in Hindi

पहिये के अविष्कार की रोचक कहानी | Wheel Invention Story in Hindi आदिमानव लगभग 20,000 साल पहले पहिये दार गाडियों का उपयोग किया करते थे लेकिन विश्वसनीय प्रमाणों के आधार पर ज्ञात होता है कि पहिये का प्रचलन 3500 से 4000 ईस्वी पूर्व सीरिया और सुमेरियसा में ही सबसे पहले हुआ था | 3000 ईसा पूर्व तक मेसापोटामिया में पहिये का ख़ासा प्रचलन शूर हो चूका था और सिन्धु घाटी में यह लगभग 2500 वर्ष ईसा पूर्व पहुचा | पहिये का आविष्कार संसार में कब और कहा ,किस प्रकार हुआ या किसने किया , इस संबध में निश्चित रूप से कुछ नही कहा जा सकता | पहिये का लाभ उठाकर पैदल चलने की इस क्रिया यानि साइकिल का अविष्कार भले ही लगभग पौने दो सौ वर्ष पूर्व हुआ हो लेकिन पहिये का अविष्कार निश्चित रूप से हजारो वर्ष पूर्व हुआ हो इसके सर्वत्र प्रमाण मौजूद है | पौराणिक सभ्यताओं से लेकर हजारो वर्ष पुराणी पूरा-सामग्री में भी रथो या बैलगाडियों के होने के प्रमाण उपलब्ध है | फिर भी ऐसा समझा जाता है कि पहिये का अविष्कार “मेसापोटामिया” में यानि आधुनिक ईराक के एक हिस्से में कभी हजारो वर्ष पूर्व हुआ था | कहा जाता है कि किसी पेड़ के गोल...

भारत के प्रधानमंत्री और उनसे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य | Indian Prime Ministers Facts in Hindi

भारत के प्रधानमंत्री और उनसे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य | Indian Prime Ministers Facts in Hindi प्रधानमंत्री (Prime Minister) , विधायिका और कार्यपालिका दोनों का वास्तविक प्रधान होता है तथा मंत्रियों एवं राष्ट्रपति के बीच संवाद के लिए सेतु का कार्य करता है | राष्ट्रपति की शक्तियाँ औपचारिक ही है | व्यवहार में उसकी शक्तियों का उपयोग PM ही करता है | राष्ट्रपति , लोकसभा में बहुमत दल के नेता को ही प्रधानमंत्री (Prime Minister) नियुक्त करता है परन्तु यदि किसी दल को पूर्ण बहुमत न मिला हो तो सबसे बड़े दल को , यदि वह भी न हो तो चुनाव पूर्व सबसे बड़े गठ्बन्धन वाली पार्टी के नेता को PM नियुक्त करता है | साथ ही निर्धारित समयावधि में लोकसभा में मंत्रीमंडल को विश्वास मत प्राप्त करने को राष्ट्रपति को कह सकता है | आइये पहले भारत के सभी प्रधानमंत्रीयो की सूची पर एक नजर डालते है | भारत के प्रधानमंत्रियों की सूची | Prime Minister of India List in Hindi क्र. प्रधानमंत्री का नाम जन्म-मृत्यु वर्ष कार्यकाल दल 1 जवाहरलाल नेहरु 1889–1964 1947-1964 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस 2 गुलजारीलाल नंदा 1898–1998 1964 (13 दिन) भारत...