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रूप चौदस पर मिलेगी अकाल मृत्यु से मुक्ति | Roop Chaturdashi Significance in Hindi

रूप चौदस पर मिलेगी अकाल मृत्यु से मुक्ति | Roop Chaturdashi Significance in Hindi
रूप चौदस पर मिलेगी अकाल मृत्यु से मुक्ति | Roop Chaturdashi Significance in Hindi

18 अक्टूबर को कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के उपलक्ष्य में छोटी दीपावली , नरक चतुर्दशी एवं रूप चौदस का पर्व मनाया जाएगा | दीवाली के पंच दिवस उत्सव का यह दूसरा दिन मूलतः मृत्यु के देवता यमराज के पूजन के लिए समर्पित है | इस दिन यम के निमित्त श्राद्ध एवं यम तर्पण का विधान है | इस दिन चतुर्दश यम अर्थात यमराज , धर्मराज , मृत्यु , अनंत ,चित्रगुप्त के निमित्त पूजन किया जाता है | इस दिन शाम के मस्य यम तर्पण और दीपदान दक्षिण दिशा में मुंह करके किया जाता है |
मान्यतानुसार रूप चौदस के दिन जो व्यक्ति सूर्योदय से पूर्व अभ्यंग स्नान अर्थात तिल का तेल लगाकर अपामार्ग अर्थात चिचड़ी की पत्तियाँ जल में डालकर स्नान रके उसे यमराज की कृपा वश नरक गमन से मुक्ति मिलती है | व्यक्ति के सारे पाप नष्ट होते है | रूप चौदस के  दिन पाप एवं नरक से मुक्ति हेतु व्रत भी प्रचलित है | प्रात:काल अभ्यंग स्नान के बाद राधा-कृष्ण के मन्दिर में दर्शन करने से पाप का नाश होता है और रूप सौन्दर्य की प्राप्ति होती है |

पौराणिक सन्दर्भ

  • पौराणिक मान्यतानुसार रूप चौदस के दिन ही भगवान श्रीकृष्ण ने अत्याचारी और दुराचारी दुर्दान्त असुर नरकासुर का वध किया था तथा देवताओं एवं ऋषियों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई और सोलह हजार एक सौ कन्याओं को नरकासुर से मुक्त कराकर उन्हें सम्मान प्रदान किया था | इस उपलक्ष्य में दियो की सज्जा की जाती है |
  • रूप चौदस के दिन यमराज ने महापराक्रमी एवं महादानी राजा रन्तिदेव की गलती सुधारने हेतु उन्हें जीवनदान देकर नरक के कोप से मुक्ति दिलाई थी |
  • मान्यतानुसार रूप चौदस के दिन देवर्षि नारद ने राजा हिरण्यगभ को उनके कीड़े पड़ चुके सड़े हुए शरीर से मुक्ति का मार्ग बताया था जिससे राजा हिरण्यगभ को सौन्दर्य एवं स्वास्थ्य प्राप्त हुआ | इसी कारण इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में शरीर पर चन्दन का लेप लगाकर तिल मिले जल से स्नान करने का महत्व है |
  • इस दिन यमराज , श्रीकृष्ण और महाकाली का विशेष पूजन किया जाता है | रात्रि के समय घर की दहलीज पर दीप लगाये जाते है |
  • रूप चौदस के विशेष स्नान पूजन एवं उपायों से लम्बे समय से चल रही बीमारी दूर होती है | नरक से मुक्ति मिलती है तथा व्यक्ति लम्बे समय तक जवान और खुबसुरत रहता है |

रूप चौदस पूजन का विधि-विधान

  • १८ अक्टूबर २०१७ को शाम के ०४:४७ से ०६:२७ तक पूजा का शुभ मुहूर्त
  • शुभ मुहूर्त में यम देवता के लिए दीपदान करे
  • नरक चतुदर्शी की हनुमान जी की पूजा
  • मुक्ति के दाता भगवान विष्णु का पूजन
  • पूजा सामग्री में कलश के उपर चौमुखी दिया ,हरी मुंग कुमकुम ,मिठाई ,गंगाजल
  • यम दीपदान हेतु चार बत्ती वाला मिटटी का दीपक घर के मुख्य द्वार पर रखे |
  • पारिवारिक रोग से मुक्ति हेतु सभी परिजनों के सिर से 4 काली मिर्च के दाने वारकर कर्पुर से जला दे |
  • सुंदर और युवा बने रहने के लिए श्रीकृष्ण पर चढ़ा हल्दी-चन्दन का लेप शरीर पर लगाये |

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