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खजुराहो के मन्दिर , जहां पत्थर बोलते है | Khajuraho Temples History in Hindi

खजुराहो के मन्दिर , जहां पत्थर बोलते है | Khajuraho Temples History in Hindi
खजुराहो के मन्दिर , जहां पत्थर बोलते है | Khajuraho Temples History in Hindi

विश्व के सर्वश्रेष्ठ आकर्षण केंद्र खजुराहो के मन्दिर (Khajuraho Temples) अपनी अद्वितीय कला एवं चित्रकारी के कारण पर्यटकों एवं कला प्रेमियों का ध्यान बरबस अपनी ओर आकृष्ट कर लेते है | यह मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित एक छोटा सा गाँव है | खजुराहो की उत्पत्ति की प्राचीन परम्परा एवं नामकरण के संबध में यह कहा जाता है कि एक समय इसके द्वार पर दो सुनहरे खजूर के पेड़ थे | चीनी यात्री ह्वेनसांग के यात्रा वृतांत का अनुसार उसने इसे “चीन-ची-टू” कहा | गन्ददेव के शिलालेख में इसे श्री खुजूर वाहिका कहा गया है | कवि चंद ने इसे खजूरपूरा अथवा खाजीपपूरा नाम दिया | अलबरूनी ने सन 1031 में इसे खजुराहो कहा | अंत में इब्नतुता ने सन 1235 इसका नाम खजुराहो रखा |
कहते है कि खजुराहो कभी बड़ा शहर था जो आठ वर्गमील क्षेत्र में फैला हुआ था | वस्तुत: खजुराहो केवल एक ही मन्दिर नही है बल्कि दो दर्जन से अधिक मन्दिर है | ऐसा विश्वास है कि पूर्व में वहां 85 मन्दिर थे | 9वी एवं 12वी शताब्दी के बीच इन मन्दिरों का निर्माण शक्तिशाली चन्देल राजा यशोवर्धन ने करवाया | तत्पश्चात विद्याधर , कीर्ति वर्मन , मदन वर्मन आदि राजाओ ने इन मन्दिरों को बनवाया | 11वी शताब्दी में महमूद गजनवी ने भारत पर आक्रमण किया और सोमनाथ के मन्दिर को ध्वस्त कर दिया | उसके बाद वह खजुराहो भी गया था लेकिन क्न्दारिया महादेव मन्दिर की अद्भुद कला से वह इतना अभिभूत हुआ कि उसने उस मन्दिर को नही तुड़वाया |
खजुराहो में ब्राहमण ,वैष्णव , शैव , शाक्त और जैन सभी धर्मो एवं मतो के मन्दिर स्थित है | इसके आलावा चौसठ योगिनी , चित्रगुप्त , सौर मत ,ब्रह्मा वराह , देवी लक्ष्मण ,देवी जगदम्बा , जवारी ,वामन खाखरामठ , चतुर्भुज मन्दिर , ललगंवा महादेव ,विश्वनाथ , मंगतेश्वर , पार्वती तथा महादेव शैव मत के मन्दिर है | जैन मन्दिरों में पार्श्वनाथ और आदिनाथ मन्दिर मुख्य है | इन मन्दिरों की अपनी अपनी कला एवं नक्काशी है | चौसठ योगिनी , ल्ल्ग्नवा महादेव , ब्रह्मा मन्दिर एवं वराह मन्दिरों के निर्माण विशेष ढंग से करवाया गया है | कुछ मन्दिरों के उपरी भाग सादे है तो कुछ कलापूर्ण |
कन्दारिया महादेव में सबसे अधिक मैथुन (स्त्री-पुरुष संगम मुद्रा) को दिखलाया गया है | काम वासना में डूबे जोड़ो की मुर्तिया ,स्त्री-पुरुष के शारीरिक संबधो को बहुत सुंदर सहज और जीवंत रूपों में दर्शाया गया है | कुछ मुर्तिया इतनी सुंदर और जीवंत लगती है मानो वो अभी बोल पड़ेगी | इनका आध्यात्मिक एवं धार्मिक महत्व भी है तभी तो ये मन्दिरों में प्रतिष्टित है | खजुराहो के प्राय:सभी मन्दिर ग्रेनाईट और बलुआ पत्थर से निर्मित है | यहाँ गर्भगृह , अंतराल , महामंडप , मंडप तथा अर्द्धमंडप कई   मंदिरों में मिलते है | यहा देवताओं , सुन्दरियों ,परियोर नाग-कन्याओं की भी सैकड़ो मुर्तिया है | ऐसा  कहा जाता है कि लम्बी नाक और लम्बी गर्दन वाली औरतो की   मुर्तिया गुप्तकाल की   है |
कुछ लोग इन मूर्तियों में तन्त्र-मन्त्र की छाया पाते है वस्तुत: 11वी-12वी शताब्दी में भारत में तंत्र-मंत्र का बड़ा प्रभाव था | अनेक पाखंडी तांत्रिक धर्म के नाम पर औरतो से खिलवाड़ करते थे | ऐसा अनुमान है कि चौसठ योगीनी का मन्दिर इन तांत्रिको ने ही बनवाया था | उस काल में भारत कला ,साहित्य एवं धन दौलत से अत्यंत समृद्ध था | यह विश्व भर में सोने की चिड़िया के नाम से विख्यात था | खजुराहो के मन्दिर भारत में निर्मित किसी भी मन्दिर की अपेक्षा भव्य एवं भावोत्पादक है | वे अपने सौन्दर्य एवं सजावट के लिए विश्वप्रसिद्ध है | प्राय: सभी मन्दिर ऊँचे और पक्के चबूतरे पर निर्मित है | वे सभी तत्कालीन स्थापत्य कला से परिपूर्ण है |

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