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तुगलक वंश , जो अपनी कट्टरता के लिए हुआ कुख्यात | Tughlaq dynasty History in Hindi

अलाउदीन खिलजी की मौत के बाद फ़ैली अर्थव्यवस्था का लाभ उठाते हुए गयासुद्दीन तुगलक ने 1320 ईस्वी में तुगलक वंश (Tughlaq dynasty) की स्थापना की | उसके पुत्र मुहम्मद तुगलक ने सल्तनत का राज्य मध्य एशिया तक फैलाया | उसने कृषि सुधार , सांस्कृतिक मुद्रा चलाई और अनेक सुधार किये | उसके बाद उसका चचेरा भाई फिरोज तुगलक गद्दी पर बैठा परन्तु उसकी मृत्यु के पश्चात राज्य लडखडा गया | यो तो तुगलक वंश का राज्य 1412 ईस्वी तक चलता रहा परन्तु 1398 में तैमुर आक्रमण ने दिल्ली सल्तनत को हिलाकर रख दिया था | आइये तुगलक वंश (Tughlaq dynasty) के शासको के बारे में विस्तार से आपको जानकारी देते है

गयासुदीन तुगलक ने रखी तुगलक वंश की नीव

तुगलक वंश की नींव रखने वाले गाजी मलिक ने सत्ता में आने के बाद अपना नाम गयासुद्दीन तुगलक रख दिया | गयासुद्दीन तुगलक के पिता तुर्की और माँ हिन्दू थी | सत्ता में आने के बाद सबसे पहले उसने दिल्ली के पास दिल्ली सल्तनत को मंगोलों से सुरक्षित रखने के लिए तुगलकाबाद का निर्माण करवाया | इन सब से उपर उसने तुगलक दुर्ग को अपने सभी मलिक ,अमीरों और खिलजी वंश के मंत्रियों , जिन्होंने सत्ता में आने के लिए उसका साथ दिया , को सौंप दिया | उसने खिलजी के उत्तराधिकारी खुसरो खान का साथ देने वालो को सजा दी |
गयासुद्दीन तुगलक ने मुस्लिमो पर लगान दर कम कर दी लेकिन हिन्दुओ पर बढ़ा दी ताकि वो धन की कमी से विदोह न कर सके | 1321 में उसने अपने बड़े बेटे उलुग खान (मुहम्मद तुगलक ) को आरंगल और तिलंग के हिन्दू राजाओ को तबाह करने को भेजा | पहले प्रयास में तो वो असफल रहा लेकिन चार महीने बाद गयासुदीन ने भारी सेना के साथ एक बार फिर आरंगल भेजा | इस बार उलुग खान क सफलता मिली | आरंगल का पतन हुआ जिसका नाम बदलकर सुल्तानपुर कर दिया गया | वहा से सारी सम्पति लुटकर दिल्ली सल्तनत में लाई गयी |
अब बंगाल के फिरोज शाह के खिलाफ युद्ध करने के लिए वहा के अमीरों ने गयासुद्दीन तुगलक को आमन्त्रण दिया | उसने दिल्ली को अपने बेटे उलुग खान को सौंपकर अपनी सेना को लुख्नौटी की ओर बढ़ा और अपने अभियान में सफलता पाई | जब गयासुदीन और उसका बेटा महमूद खान लखनौती से वापस दिल्ली लौट रहे थे तो उसके बड़े बेटे ने उसकी मौत की ऐसी साजिश रची ताकि सभी को ये एक दुर्घटना लगे | उसने निजामुद्दीन ओलिया के साथ मिलकर एक लकड़ी के आकृति कुश्क में उनको मार दिया |1325 ईस्वी में इस तरह की साजिश से उलुग खान अपन पिता और भाई को मारने में सफल था |

मुहम्मद बिन तुगलक अपनी कट्टरता से हुआ कुख्यात | Muhammad bin Tughluq History in Hindi

मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल ने दिल्ली सल्तनत का काफी विस्तार हुआ | उसने मालवा ,गुजरात ,तिलंग ,कम्पिला , लखनौती ,चटगाँव जैसे कई प्रदेशो पर आक्रमण कर उन्हें लुट लिया | उसने सुदूर अभियानों में काफी खर्च होता था लेकिन अपने हर हमले में वो गैर मुस्लिम साम्राज्यों से अपार धन सम्पदा लुटकर लाता था | उसने लगान ना देने वालो की लगान दरे बढ़ा दी थी | गंगा और यमुना की उपजाऊ जमीन पर सुलतान गैर मुस्लिम लोगो पर भूमि कर दस गुना और दुसरी जगहों पर बीसगुना कर दिया था |
बढ़ते हुए लगान को देखकर हिन्दू किसानो के सारे गाँवों ने खेती करना छोडकर जंगलो में भाग गये और भूमि पर कुछ भी उगने से मना कर दिया | उनमे से कई तो लुटेरे बन गये | सुल्तान ने ओर अधिक क्रूरता से उनको जवाब देते हुए उनकी सामूहिक गिरफ्तारी करवाई और मौत के घाट उतार दिया | ईतिहास के पन्नो में मुहम्मद तुगलक को एक कट्टर मुस्लिम शासक बताया है जिसने ना केवल गैर मुस्लिम बल्कि मुसलमानों के भी कुछ सम्प्रदायों से क्रूरता की | उसने शिया मुसलमान ,सूफी कलंदर और दुसरे मुसलमानों को फांसी पर लटकाया |
मुहम्मद बिन तुगलग ने एक नये शहर जहापनाह की स्थापना की , जो पुराने दिल्ल्ली के नजदीक है | बाद में उसने अपनी सल्तनत की राजधानी दिल्ली से महाराष्ट के देवगढ़ को बनाया | उसने दिल्ली की जनता को सामूहिक रूप से देवगढ़ चलने को विवश किया और मना करने वालों को मौत के घाट उतार दिया | एक अँधा व्यक्ति जो देवगढ़ जाने में असमर्थ था , को चालीस दिनों तक घसीट घसीट कर ले जाया गया | उसकी मौत हो गयी थी और उसका केवल बंधा पैर ही दौलताबाद पहुच पाया था |
मुहम्मद बिन तुगलक का राजधानी बदलने का फैसला असफल हुआ क्योंकि दौलताबाद के बंजर इलाक था और वहा पीने के लिए पर्याप्त पानी भी नही था | आखिरकार मुहम्मद बिन तुगलक को वापस दिल्ली लौटना पड़ा | उसके इस स्थानान्तरण में दिल्ली से आये अनेक मुस्लिम दक्कन इलाके में रुक गये और वहा पर मुस्लिम आबादी का विकास हुआ | 1327 में मुहम्मद बिन तुगलक के खिलाफ बगावत शुरू हो गयी , जिससे समय के साथ दिल्ली सल्तनत सिकुडती गयी |
इतिहासकार बताते है कि मुहम्मद बिन तुगलक ने हिन्दुओ के घरो को सिक्को की टकसाल बना दिया और नकली ताम्बे के सिक्के बनाना शूरू किया जिससे लगान वसूल किया जा सके | इसके बाद लोगो के बढ़ते क्रोध को देखते हुए उसने बाद में चांदी के सिक्के बनवाये थे जिससे उसका खजाना खाली हो गया था | उसके शासन में उसकी नीतियों से राज्य का राजस्व गिर चूका था | इस राजस्व को संतुलित करने के लिए उसने लगान ओर बढ़ा दिया था | मुहम्मद बिंग तुगलक की मौत के समय दिल्ली सल्तनत सिकुडकर विन्ध्याचल तक सिकुड़ गयी थी |

फिरोज शाह था दोधारी तलवार | Feroz Shah Tughluq History in Hindi

मुहम्मद तुगलक की मौत के बाद उसके चचेरे भाई फिरोज तुगलक को मंत्रियों ने सुल्तान घोषित कर दिया | फिरोज तुगलक एक दयालु और पवित्र स्वभाव का इन्सान था | वो किसानो का सच्चा मित्र था और उसने अपने पूर्वजो द्वारा लगाये सारे ऋण माफ़ कर दिए | उसने कुरान के लिखे अनुसार लगान की दर भी नियंत्रित कर दी | बंजर जमीनों पर फिर से खेती होने लगी | उसने सजा के रूप में दिए जाने वाले यातना और विकृति के लिए फौजदारी कानून भी बनाया | उसने दिल्ली में दीवाने खैरात नाम से एक दान विभाग भी बनाया |
फिरोज तुगलक एक उत्साही इमारत निर्मानकर्ता भी था और अपनी जन सेवा के लिए काफी प्रसिद्ध हुआ | उसने दिल्ली की नई राजधानी फिरोजाबाद बनाई | उसने हिस्सार ,फतेहाबाद ,फिरोजपुर और जौनपुर की भी स्थापना की | फिरोज ने फिरोजपुर और हिस्सार तक पानी पहुचने के लिए यमुना नहर का भे निर्माण करवाया | उसने काली मस्जिद और लाल गुम्बद का निर्माण करवाया | उसने अशोक के दो स्थम्भो को दिल्ली में स्थापित किया जिसमे से एक खिजराबाद से और दूसरा मेरठ से लाया गया था |
फिरोज शाह ने “फतुह्त फिरोज शाही” ली रचना भी के थी | उसने कई संस्कृत पुस्तको का पारसी में अनुवाद करवाया था | गुलामो को व्यवस्था में लाने का श्रेय भी फिरोज शाह को ही दिया जाता है | उसने शरिया के अनुसार लगान लेना शुरू किया | फिरोज शाह पहला मुस्लिम सुल्तान था जिसने ब्राह्मणों पर जजिया कर लगाना शूरू किया जो अब तक लगान से बच रहे थे | फिरोज गैर मुस्लिमो के प्रति असहिष्णु था और मुस्लिम समुदाय में फिरोज ने सुन्नियो को स्वीकार किया था शिया और इस्माइल को नही |
हिन्दू मन्दिर तो फिरोज ने भी तुड़वाये थे | उसने एक बार एक ब्राह्मण को मुसलमान को  उपदेश देते हुए देखा तो उसे जिन्दा जला दिय था | फिरोज तुगलक को तुगलक वंश के पतन के लिए जिम्मेदार माना जाता है | उसकी जागीर प्रथा और गुलाम व्वयस्था से साम्राज्य का पतन हुआ | दुसरी तरफ उसकी हिन्दुओ और शिया मुसलमानों के प्रति असहिष्णुता भी उसके पतन का कारण था | उसके मौत के बाद उत्तराधिकारी की जंग में तुग्लको के बाद दिल्ली के पास छोटा सा इलाका ही शेष रह गया था |

गृह युद्ध से हुआ तुगलक वंश का पतन

फिरोज शाह तुगलक की मौत के चार साल पहले ही 1384 ईसवी में प्रथम गृह युद्ध की शुरुवात हो चुकी थी जबकि दूसरा गृह युद्ध फिरोज शाह की मौत के छ साल बाद 1394 ईस्वी में हुयी थी | इन गृह युद्धों का मुख्य कारण सुन्नी इस्लाम समुदाय के प्रति अपनी अलग अलग विचारधारा था | 1376 ईस्वी में फिरोज शाह के पौते के मौत हो गयी | इसके बाद से फिरोज शाह वजीरो की मदद से शरिया ओर ज्यादा माँगना शूरू कर दिया |
1384 में फिरोज शाह बीमार पड़ गया | इससे पहले उसको सत्ता में लाने वाले सभी मुस्लिम मंत्री मर चुके थे और उनके वंशज सत्ता के लिए आपस में लड़ रहे थे | फिरोज शाह का के एक वफादार वजीर खान जहा प्रथम का बेटा खान जहा द्वितीय उसके पिता की मौत के बाद अपनी शक्ति को बढ़ा रहा था | उस युवा वजीर ने फिरोज शाह के पुत्र मुहम्मद शह से खुली दुश्मनी ले रखी थी |
वजीर की बढती शक्ति के कारण अमीर और मंत्री भी उसके साथ हो गये थे | खान जहा ने फिरोज शाह को उसके एकमात्र बचे इकलौते पुत्र को सत्ता से हटाने के लिए कहा | अपने बेटे को हटाने की बजाय फिरोज शाह ने वजीर को हटा दिया | इसी कारण पहला गृह युध्ह छिड गया | वजीर की गिरफ्तारी और हत्या से दिल्ली के आस्पा विद्रोही बढ़ गये थे | 1387 में मुहम्मद शह को भी देश निकाला दे दिया गया |
1388 में फिरोज शाह की मौत के बाद तुगलक खान ने सत्ता सम्भाली लेकिन आपसी जंग में वो भी मारा गया | 1389 में अबू बकर शाह सत्ता में आया लेकिन वो भी एक साल के अंदर मर गया | ये गृह युद्ध सुलतान मुहम्मद शाह के शासन मे भी चलता रहा |  जैसे जैसे गृह युद्ध बढ़ रहा था हिमालय की तलहटी के उत्तर भारत के लोगो के विद्रोह करते हुए कर देना बंद कर दिया | दक्षिण भारत के कुछ विद्रोही भी उनके साथ मिल गये |
सुल्तान मुहम्मद शाह ने दिल्ली के पास हिन्दू विद्रोहियों पर आक्रमण कर सामूहिक कत्ल कर दिया | 1394 में लाहोर और दक्षिण एशिया के क्षेत्रो पर हिन्दुओ ने राज करना शूरू कर दिया | मुहम्मद शाह ने अपने बेटे हुमायु खान के साथ मिलकर उन पर आक्रमण किया | जब आक्रमण की तैयारी हो रही थी तभी 1394 जनवरी में सुल्तान मुहम्मद शाह की मौत हो गयी | उसके बेटे हुमायु खान ने सत्ता सम्भाली लेकिन उसको भी दो महीनों के अंदर मार दिया गया | हुमायु खान का भाई नसीरलुदीन महमूद शाह अब सत्ता में आ गया और उसने वजीरो और अमीरों से सहायता लेना शूरू कर दिया | 1394 में मुस्लिम मंत्रियों ने मिलकर दूसरा गृह युद्ध छेड़ दिया और इन गृह युद्धों के बीच तैमुर ने आक्रमण कर तुगलक वंश को नस्तेनाबुद कर दिया |

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