
समुद्र तल से 7500 फीट की उंचाई पर स्थित ऊटी (Ooty) भारत का एक सुंदर पर्वतीय स्थल है | पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र ऊटी (Ooty) तमिलनाडू में नीलगिरी की पहाडियों में स्थित है | पर्वतीय प्राकृतिक सुन्दरता के कारण इसे पहाड़ो की रानी कहा जाता है | ऊटी के निकट ही दो ओर छोटे पर्वतीय स्थल है कुन्नूर और कोटागिरी | ऊटी के निकटतम रेलवे स्टेशन मेट्टूयलायम से ऊटी तक पर्वतीय रेल यात्रा बहुत ही आनन्ददायक है | चाय बागानों और पर्वतीय हरियाली का नजारा लेते हुए 4 घंटे का सफर बहुत ही सुखद प्रतीत होता है |
आकर्षक और खुबसुरत प्राकृतिक दृश्यों से परिपूर्ण नीलगिरी की पर्वतीय सुन्दरता पर्यटकों को बरबस अपनी ओर आकर्षित कर लेती है | ऊटी या ऊटकुंड 36 वर्ग किमी में फैला है | यहाँ चारो ओर नेत्र सुखद हरियाली ही हरियाली नजर आती है | यहाँ झरने और झीले है चाय और कॉफ़ी के बागान है | इस पहाडी का नाम नीलगिरी इसलिए पड़ा , क्योंकि अमेरिका के ग्रेट स्मोकीज पहाड़ो पर रहने वाले कुहरे की तरह यहाँ भी नीला कुहरा छाया रहता है | इस पहाडी जिले में कई आदिवासी जनजातियाँ रहती है जिनमे टोडा , कोटा , कुम्बा , पनिया , ईरुला आदि मुख्य है | ऊटी में चार भाषाए बोली जाती है तमिल , कन्नड़ , मलयालम और अंग्रेजी |
ऊटी (Ooty) भ्रमण के लिए अप्रैल से जून और सितम्बर से अक्टूबर का समय सर्वाधिक सुखद है | गर्मियों में यहाँ का अधिकतम तापमान 21 डिग्री और न्यूनतम 6 डिग्री तक रहता है | गर्मियों में हल्के उनी वस्त्रो से काम चल जाता है किन्तु सर्दियों में भरपूर उनी वस्त्रो की आवश्कयता होती है वायुयान ,रेल और बस तीनो से ऊटी जाया जा सकता है | वायुयान से यह कोच्चिन , चेन्नई तथा बंगलौर से जुड़ा हुआ है | कोयम्बतूर सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है | यह ऊटी से 89 किमी दूर है | चेन्नई , कोच्चिन , बंगलोर , मदुरै तथा तिरुचिराप्प्ली से ट्रेन द्वारा भी ऊटी जा सकते है |
भारत के सभी भागो से ऊटी सडक मार्ग से जुड़ा हुआ है |
डीलक्स बसे लगभग 4 घंटे में कोयम्बतूर से ऊटी पहुचा देती है | साधारण बसे 6 घंटे में पहुचाती है | कोयम्बतूर से रेल द्वारा ऊटी जाने में 12 घंटे लगते है | इस रेल यात्रा की विशेष बात यह है कि यह रेल मैदानी इलाको की रेल से भिन्न प्रकार की होती है | इसका रंग अन्य रेलों की तरह लाल या काला नही , सफेद या नीला होता है | इंजन रेल को खींचता नही , धक्का देकर उपर चढ़ा देता है | इस रेल में सिर्फ दो ही डिब्बे होते है | जो लोग कन्याकुमारी होते हुए ऊटी जाना चाहते है वे बस से जाना अधिक पसंद करते है | बीच में बहुत ही खुबसुरत शहर मदुरै देखा जा सकता है | कोटागिरी , कुन्नूर और ऊटी में कही भी जाने के लिए टैक्सी हमेशा उपलब्ध रहती है |
दर्शनीय स्थल
वानस्पतिक उद्यान -ऊटी के इस वानस्पतिक उद्यान की विशेषता यह है कि यहाँ 2 करोड़ वर्ष पुराना एक वृक्ष का तना सुरक्षित है | यहाँ साउथ इंडिया कैनल क्लब द्वारा वार्षिक डॉग शो आयोजित किया जाता है | यहाँ आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण और सजावट के लिए उपयुक्त बहुत सारे पेड़-पौधे है | मई में यहाँ फूलो और पौधों की प्रदर्शनी लगाई जाती है | इस उद्यान की नींव सन 1847 में रखी गयी थी | उद्यान के बीच में एक सुंदर झील है |
झील – वनस्पतिक उद्यान में सन 1824 में निर्मित इस झील में बच्चे घुड़सवारी , नाव चलाने तथा खिलौना गाड़ी पर घुमने का आनन्द लेते है | इस झील के किनारे फिल्मो की शूटिंग होती है | यहाँ हाउस बोट की भी व्यवस्था है |
कैटी वैली – ऊटी से 8 किमी दूर छोटे छोटे गाँवों का समूह है | ये गाँव कोयम्बतूर और मैसूर तक फैले हुए है | यहाँ सुई बनाने का उद्योग है |
दोड़बेट्टा – ऊटी से 10 किमी दूर नीलगिरी की इस सबसे ऊँची चोटी से पहाड़ो , मैदानों और पठारों का दृश्य नजर भर से देखा जा सकता है | यहाँ एक दूरबीन भी लगी हुयी है | ऊटी से यहाँ बस से जाया जा सकता है | तमिल में दोड़बेट्टा का अर्थ है सबसे बड़ी चोटी | दोड़बेट्टा ऊटी-कोलागिरी पर स्थित है |
लेक गार्डन – रेलवे स्टेशन और बस अड्डे के निकट यह उद्यान विशेषकर बच्चो के लिए है किन्तु प्राकृतिक सौन्दर्य के कारण यहाँ पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है |
कालहट्टी झरना – ऊटी से करीब 14 किमी की दूरी पर यह एक मनोरम पिकनिक स्थल है | लगभग 36 मीटर की उंचाई से गिरते हुए झरने का दृश्य बहुत ही मनोहारी है | बसे कालहट्टी गाँव तक ही जाती है | यहाँ से 3 किमी पैदल या बस द्वारा जाया जा सकता है | यह पिकनिक और ट्रैकिंग के लिए उत्तम स्थान है |
बेनलेक हाउस – ऊटी से 30 किमी दूर यहाँ जिमखाना क्लब , भेड़-पालन केंद्र और हिंदुस्तान फोटो फिल्म का कारखाना है | ऊटी मैसूर मार्ग पर 104 वर्ग किमी क्षेत्र के विस्तृत इस स्थान के गोल्फ लिकंस से सितम्बर और अक्टूबर में सूर्यास्त का दृश्य बहुत ही मनोरम होता है | उत्क्मन्द क्लब और जिमखाना क्लब का गोल्फ लिंक्स दर्शनीय है |
कोटागिरी – ऊटी से 29 किमी दूर कोटागिरी में सेंट कैथरीन फाल्स , रंगास्वामी पीक और कोयानाद व्यू देखने योग्य है |
एल्वा हिल्स – ऊटी से करीब घंटे भर पैदल चलकर यहाँ जाया जा सकता है | इस पहाडी से शहर और घाटी के खुबसुरत नजारे का आनन्द लिया जा सकता है |
एवेलांच – ऊटी से 25 किमी दूर इस वन क्षेत्र में टहलने-घुमने का अलग आनन्द है | एवलांच नदी में लोग मछली मारने का आनन्द लेते है | इसके अतिरिक्त फ्रोजन हिल , पिकारा डैम और स्नोडेन भी देखने लायक स्थान है |
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