
नजाकत और नफासत के लिए मशहूर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (Lucknow) की तहजीब उसकी पहचान है | एतेहासिक और आधुनिक काल की बहुत सी इमारते और वस्तुए देखने योग्य है | इनमे शाम-ए-अवध का नजारा , स्वाधीनता संग्राम सेनानियों और अंग्रेजो के बीच हुयी टकराहट को याद दिलाने वाली रेजीडेंसी देखना पर्यटक नही भूलते |
गोमती नदी के दोनों तटो पर काफी बड़े क्षेत्र में अवस्थित यह नगर सत्रहवी शताब्दी में अवध के चौथे नवाब आसिफुद्दोला के शासनकाल में राजधानी बना लखनऊ (Lucknow) थोड़े थोड़े समय के लिए राजपूत शासको , शेख्जादो , पठानों के अधीन रहने के बाद सत्रहवी शताब्दी में लोदी वंश के शासको के समय दिल्ली शासको के अधीन आ गया |
आसिफुद्दोला का शासनकाल अवध के इतिहास का स्वर्ण युग था | उसके शासनकाल में बड़ा इमामबाड़ा जैसी भव्य इमारतो का निर्माण हुआ | अवध के अंतिम नवाब वाजिद अली शाह के संगीत एवं कला प्रेम तथा उनके एशो आराम और विलासिता की कहानिया आज भी कही सूनी जाती है | वे साहित्य और संगीत के अनन्य प्रेमी थे | तारीखे-अवध के अनुसार उन्होंने छोटी बड़ी 40 पुस्तके लिखी है |कहा जाता है कि भगवान राम ने लखनऊ का कुछ हिस्सा अपने छोटे भाई लक्ष्मण जी को दे दिया था | उस समय इसका नाम लक्ष्मणपुर था | वही लक्ष्मणपुर आज का लखनऊ (Lucknow) है |
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लखनऊ (Lucknow) के दर्शनीय स्थल
बड़ा इमामबाड़ा – नवाब आसिफुद्दोला ने अकाल-राहत के लिए सन 1784 में इसका निर्माण कराया था | इसमें 409 गलियारे है जिनमे दरवाजे नही है | इसके आगे के हिस्से में 49.4 मीटर लम्बा , 16.2 मीटर चौड़ा और 15 मीटर ऊँचा हॉल है | इस इमारत के एक कोने में यदि कोई कागज फाड़ा जाए तो दुसरे कोने में कागज फटने की आवाज सुनाई देती है | इसमें एक बावड़ी है जिसमे गोमती नदी का पानी आता रहता है | बेगमे इसमें स्नान करती थी | यही असिफुद्दोला की मजार और ऊँचे चबूतरे पर एक मस्जिद है | कहा जाता है कि आसिफुद्दोला बड़े दानवीर थे | इस संबध में एक लोकोक्ति मशहूर है “जिसे न दे मौला , उसे दे आसिफुद्दोला” | यह इमारत इंडो सेरेनिक वास्तुकला की अनुपम मिसाल है | कहा जाता है कि दिन में इस इमारत का निर्माण शुरू होता था और रात में नवाब के आदेश से इसे गिरा दिया जाता था |
छोटा इमामबाड़ा – अवध के तीसरे नवाब अलीशाह ने सन 1840 में इस इमामबाड़े का निर्माण करवाया था | ताजमहल के आधार पर निर्मित इस इमारत की आन्तरिक सज्जा बहुत ही खुबसुरत है | इसका शाही हम्माम दर्शनीय है | नवाब अलीशाह और उसकी माँ की मजार यही है | नवाब अलीशाह द्वारा बाहरदरी के रूप में निर्मित कला दीर्घा में अवध के नवाबो के आदमकद चित्र देखने योग्य है |
रूसी दरवाजा – नवाब आसिफुद्दोला द्वारा निर्मित इस 60 फीट ऊँचे विशाल दरवाजे के उपर से बड़ा इमामबाड़ा में प्रवेश किया जा सकता है | ख़ास बात यह है कि इस दरवाजे के निर्माण में लकड़ी और लोहे का बिल्कुल इस्तेमाल नही किया गया है | शेर दरवाजा और गोल दरवाजा भी देखने योग्य है | इस विशालकाय दरवाजे पर शिल्पकला की खूबसूरती दर्शनीय है |
रेसीडेंसी – लखनऊ (Lucknow) आने पर रेजीडेंसी नही देखा तो समझिये एक महत्वपूर्ण दर्शनीय स्थल अनदेखा रह गया | अवध के दरबार की तरफ से नवाब असिफुद्दोला ने सन 1780 में यह इमारत बनवाई थी | नवाब शहादत अली खां के शासनकाल में यह इमारत बनकर तैयार हुयी | प्रथम स्वाधीनता संग्राम 1857 में अंगेजो ने इस पर अधिकार कर लिया और यहाँ रहने लगे इसलिए इसे रेजीडेंसी कहा जाने लगा | यहाँ अंग्रेजो के साथ स्वतंत्रता सेनानियों ने जबर्दस्त संघर्ष किया था | मस्जिद का गोलाकार दरवाजा अरबी स्थापत्य कला का उत्कृष्ट नमूना प्रस्तुत करता है | इमारत पर की गयी खूबसूरत चित्रकारी देखने योग्य है |
शहीद स्मारक – गोमती नदी के तट पर स्वतंत्रता सेनानियों की याद में 15 अगस्त 1957 को इस स्मारक का निर्माण करवाया गे था | पास ही गोमती नदी में नौका विहार का आनन्द लिया जा सकता है |
गौतम बुद्ध पार्क – बड़ा इमामबाड़ा और शहीद स्मारक के बीच गोमती नदी के तट पर अवस्थित इस पार्क में बच्चो के लिए झूले , अप्पूघर और पैडल बोट चलाने के लिए झील बनाई गयी है | यहाँ शीशे का फव्वारा है जिसमे देखने पर अपनी अजीबोगरीब शक्ल-सुरत दिखाई देती है | इसे हंसी का फव्वारा कहा जाता है |
घड़ी मीनार – 221 फीट लम्बी लखनऊ (Lucknow) की सबसे ऊँची मीनार और देश का सबसे बड़ा घंटाघर यह मीनार माना जाता है | घड़ी का डायल 12 पंखुडियो वाले खिलने वाले फुल जैसा है | इसका पेंडुलम 14 फीट लम्बा है | रूसी दरवाजे के पास स्थित यह मीनार 1881 में अंग्रेज अफसरों की देखरेख में बनी थी | इसमें सभी पुर्जे गन मेटल के बने है और चारो ओर घंटिया लगी है |
चिड़ियाघर – चारबाग रेलवे स्टेशन से 4 किमी दूर बनारसी बाग़ में स्थित इस चिड़ियाघर में विभिन्न पशु-पक्षियों को खुले वातावरन में मुक्त विहार करते देखा जा सकता है | पैडल बोट और बच्चो की रेलगाड़ी के अलावा हाथी पर बच्चो को घुमने की भी व्यवस्था की गयी है | यहाँ एक संग्रहालय भी है | यहा राजहंस नामक एक विमान भी देखा जा सकता है जिसका उपयोग पंडित नेहरु किया करते थे |
कुकरैल – यह एक खुबसुरत पिकनिक स्थल है | यहाँ मगरमच्चो की प्रजातियाँ विकसित की जाती है |
छतर मंजिल – इतालवी शैली से निर्मित इस खुबसुरत इमारत का निर्माण अवध के नवाब गाजीउद्दीन ने शुरू करवाया था किन्तु बीच में उनकी मृत्यु हो जाने पर नवाब नसीरुद्दीन ने इसे पूरा करवाया | गोमती नदी के किनारे बसी इस इमारत में बड़ा दीवानखाना , तहखाने और सुरंगे है |
म्यूजिकल फाउंटेन – चारबाग रेलवे स्टेशन से 5 किमी दूर राजाजी पुरम कॉलोनी में टिकैत राय नामक इस तालाब में निर्मित संगीतमय फव्वारे कोफ़्रांस से मंगवाया गया था | शाम को 6 से 8 बजे तक तरह तरह की धुनों पर झूमते रंग-बिरंगे फव्वारे बड़े अच्छे लगते है |
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