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ऋषिकेश के प्रमुख पर्यटन स्थल | Rishikesh Tour Guide in Hindi

Rishikesh Tour Guide in Hindi
Rishikesh Tour Guide in Hindi

संतो , योगियों और साधको की साधना भूमि तथा प्राकृतिक सौन्दर्य से सुषमा-मंडित ऋषिकेश (Rishikesh) हिन्दुओ का पवित्र तीर्थ ही नही , पर्यटकों के लिए प्राकृतिक सुन्दरता की दृष्टि से दर्शनीय पर्यटन स्थल भी है | ऋषिकेश (Rishikesh) बद्रीनाथ ,केदारनाथ ,गंगोत्री एवं यमुनोत्री जैसे तीर्थो का प्रवेश द्वार है | गंगा पहाड़ो के अंचल को छोडकर यहाँ मैदानी क्षेत्र में फ़ैल जाती है | ऊँचे-नीचे पर्वतीय मार्गो से उछलती , प्रस्तर खंडो से टकराती अल्हड गंगा हरे-भरे जंगलो की छाया में मंथर गति से प्रवाहित होती है |
गंगा-तट के दृश्य बहुत ही मोहक औ आकर्षक है | शाम को गंगा के किनारे घूमते हुए मुनि की रेती , स्वर्गाश्रम तथा शिवानन्द आश्रम की ओर जाने पर विभिन्न भावमुद्राओं में ध्यान लगाये – भारत के अलावा अमेरिका , जापान , फ्रांस और जर्मनी आदि देशो के जिज्ञासु मिल जाते है | नौका विहार और जल क्रीडा के लिए यहाँ बड़ी संख्या में लोग आते रहते है | गंगा के दुसरी तरफ घने जंगलो में तरह तरह के वन्य प्राणियों को देखा जा सकता है | समुद्र तल से लगभग 7700 फीट की ऊँचाई पर ऋषिकेश हरिद्वार से 24 किमी और देहरादून से 42 किमी दूर है |
कहा जाता है कि प्राचीनकाल में यहाँ एक ऋषि ने कठिन तपस्या की थी | भगवान ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर दर्शन दिए | तभी से इस स्थान को ऋषि के नाम पर ऋषिकेश कहा जाने लगा | यह भी कहा जाता है कि भगवान राम अनुज लक्ष्मण के साथ यहाँ आये थे | ब्राह्मण राजा रावण के वध से लगे पाप से मुक्ति पाने के लिए राम ने ऋषिकेश में और लक्ष्मण ने तपोवन में कुछ दिनों तक तप किया | ऋषिकेश संतो , आश्रमों ,आध्यात्मिक साधना केन्द्रों और मन्दिरों का नगर है | यहाँ योग साधना की शिक्षा लेने और योगाभ्यास के लिए विदेशी पर्यटक भी आते है | यहाँ के मन्दिरों की वास्तुकला भी दर्शनीय है | ऋषिकेश (Rishikesh) को प्राचीन परम्पराओं और आधुनिक विकास का अनुपम संगम कहा जा सकता है |

ऋषिकेश के दर्शनीय स्थल

लक्ष्मण झुला – समुद्रतल से 150 मीटर की ऊँचाई पर गंगा के उपर 1939 में लोहे के तारो से निर्मित झूलते हुए विशाल पुल को पारकर स्वर्गाश्रम जाया जाता है | वैसे नाव  से भी गंगा पार कर यहाँ पहुचा जा सकता है लेकिन पुल पर से गंगा का दृश्य बहुत ही लुभावना प्रतीत होता है | गर्मियों में पुल पर टहलते हुए शीतल पवन के झोंको का स्पर्श बड़ा सुखद लगता है | पुल के समीप लक्ष्मण जी का प्राचीन मन्दिर और लक्ष्मण घाट है | पुल के पार यात्रियों के ठहरने के लिए कैलाश आश्रम है | कहा जाता है कि यहाँ लक्ष्मण जी ने तप किया था | गंगा को पार करने के लिए उन्होंने अपने बाणों से पुल का निर्माण किया | इसी पुल से झूलते हुए उन्होंने गंगा को पार किया इसलिए इस पुल को लक्ष्मण झुला कहा जाता है |
राम झुला – शिवानन्द आश्रम और स्वर्गाश्रम के बीच लक्ष्मण झुला के निकट ही नवनिर्मित झूलते हुए इस झूले को शिवानन्द झुला ही कहते है |
भरत मन्दिर – ऋषिकेश (Rishikesh) के बीच बाजार में भगवान राम के अनुज भरत जी के नाम पर भरत मन्दिर है | इसकी बनावट बौद्ध मन्दिरों जैसी है | कहा जाता है कि भरत जी ने यहा तपस्या की थी |
त्रिवेणी घाट – भरत मन्दिर के आगे गंगा तट पर कुब्बा भ्रमक नाम का एक कुंड है जिसमे पर्वत से तीन स्त्रोतों से जल आता है | इन स्त्रोतों को गंगा ,यमुना और सरस्वती माना जाता है इसलिए इसे त्रिवेणी घाट कहा जाता है | इसके समीप कई मन्दिर है जिनमे रघुनाथ मन्दिर वास्तुकला की दृष्टि से दर्शनीय है | त्रिवेणी घाट में प्रात:काल बड़ी संख्या में लोग स्नान करने और शाम को आरती देखने आते है | घाट की सीढियों पर बैठकर गंगा की लहरों और आस-पास के प्राकृतिक दृश्यों को देखने में बड़ा आनन्द आता है |
नीलकंठ महादेव – ऋषिकेश (Rishikesh) से 12 किमी दूर 1700 मीटर ऊँचाई पर शांत वन में स्थित इस मन्दिर के विषय में कहा जाता है कि शिवजी ने समुद्र मंथन से निकले विष को पी लिया था |
स्वर्गाश्रम – यहाँ अनेक मन्दिर और आश्रम है | यहाँ एक मन्दिर में श्री बद्रीनाथ जी की मूर्ति है | यहाँ ठहरने के लिए रेस्टोरेंट उपलब्ध है तथा खाने पीने की बहुत सी दुकाने है | एक औषधि निर्माणशाला भी है | शिवानन्द आश्रम से मोटर बोट अथवा राम झुला की ओर से यहाँ जाया जा सकता है |
गीता भवन – स्वर्गाश्रम से आगे कई मन्दिर और भवन है | गीता प्रेस गोरखपुर ट्रस्ट द्वारा निर्मित गीता भवन के अंदर लक्ष्मी नारायाण मन्दिर है जिसके चारो ओर आवासीय कमरे बने है | भवन की दीवारों पर रामायण -महाभारत की कथाये चित्रों में अंकित है | गीता भवन का उद्देश्य समाज सेवा और धर्म प्रचार है | गीता भवन में प्रवेश करते ही बाई ओर पंक्तिबद्ध पौराणिक कथाओं के आधार पर बनी सुंदर मुर्तिया है | दाई ओर विभिन्न देवताओं की विशाल मुर्तिया , चारो ओर लगे दर्पण पर परावर्तित प्रतिबिम्ब देखने में बड़ा अच्छा लगता है | आश्रम के बाहर गंगा तट पर घंटा घर है |
शिवानन्द आश्रम – ऋषिकेश (Rishikesh) से लक्ष्मण झुला जाने वाले मार्ग पर योगी शिवानन्द जी द्वारा स्थापित शिवानन्द आश्रम “दिव्य जीवन संघ” के नाम से भी जाना जाता है | यहाँ आँखों के अस्पताल में निशुल्क चिकित्सा की जाती है तथा रोगियों को भोजन दिया जाता है | एक प्रेस है जहां योग-वेदान्त तथा धार्मिक पुस्तके प्रकाशित होती है |
काली कमलीवाला पंचायत क्षेत्र -विशुद्धानन्द जी द्वारा स्थापित इस क्षेत्र का संचालन कोलकाता स्थित एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है | संस्था की बद्रीनाथ , केदारनाथ ,गंगोत्री तथा यमुनोत्री स्थित शाखाओं द्वारा यात्रियों को आवास , निधनो को कम्बल तथा रोगियों को निशुल्क चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाती है | संस्था द्वारा आत्मविज्ञान भवन का निर्माण किया गे है |
रिवर राफ्टिंग – ऋषिकेश से बद्रीनाथ मार्ग पर कौडियाला ,लासी के आस-पास कुछ एजेंसीयो द्वारा रिवर राफ्टिंग का प्रशिक्ष्ण दिया जाता है प्रशिक्षुओ के रहने के लिए टेंटो की व्यवस्था की जाती है |
चीला -ऋषिकेश (Rishikesh) से 20 किमी दूर  ,300 मीटर की ऊंचाई पर यह मनोरम पर्यटन स्थल है | गंगा से एक नहर निकालकर जलाशय का निर्माण किया गया है | यहाँ के अभ्यारण्य में अनेक प्रकार के वन्य पशु देखे जा सकते है | पर्यटकों के रहने के लिए पर्यटक आवास गृह है |
नरेंद्र नगर – ऋषिकेश (Rishikesh) से 15 किमी दूर टिहरी-चम्बा मार्ग पर टिहरी रियासत में राजा नरेंद्रशाह द्वारा बसाया गया छोटा सा एतेहासिक नगर है | यहाँ का राजमहल और नन्दी बैल की प्रतिमा दर्शनीय है |

कैसे जाये

निकटतम हवाई अड्डा जौलीग्रांट (18 किमी) के लिए दिल्ली से कुछ छोटे विमान आते-जाते रहते है | हरिद्वार और देहरादून होते हुए ऋषिकेश देश के विभिन्न भागो से सडक मार्ग से जुड़ा हुआ है | दिल्ली , आगरा ,देहरादून , मसूरी ,हरिद्वार , चंडीगढ़ ,पटियाला ,सहारनपुर और शिमला से ऋषिकेश के लिए सरकारी और निजी बसे उपलब्ध रहती है | ऋषिकेश से आगे उत्तरी क्षेत्र में जाने के लिए बस स्टैंड एवं देहरादून से बसे मिलती है | स्थानीय भ्रमण के लिए टैक्सी , ऑटो-रिक्शा ,तांगा और साइकिल रिक्शा उपलब्ध है |

क्या खरीदे

यहाँ हस्तशिल्प की तरह तरह की वस्तुए मिलती है | सीपी , शंख ,मोती , रंग-बिरंगे पत्थर और हींग आदि खरीदने योग्य वस्तुए है | इनके अलावा साड़िया , कुर्ते , चादरे आदि भी खरीदी जा सकती है |

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