
हरियाणा (Haryana) भारत की एक पवित्र भूमि है जहां प्रसिद्ध हिन्दू ग्रन्थ महाभारत की रचना महर्षि वेदव्यास ने की थी इसी कारण इसका धार्मिक महत्व जादा है | इसके अलावा हरियाणा (Haryana )को Green Land of India भी कहा जाता है | आइये अब आपको हरियाणा (Haryana) के प्रमुख पर्यटन स्थलों के बारे में विस्तार से बताते है |
कुरुक्षेत्र | Kurukshetra Tour Guide in Hindi
इस पवित्र स्थान में महर्षि मनु ने मनुस्मृति की रचना की थी तथा ऋषियों एवं बुद्धिजीवियों ने ऋग्वेद एवं सामवेद जैसे धार्मिक ग्रंथो में संबध स्थापित किया | कौरवो एवं पांड्वो के पूर्व राजा कुरु ने यहाँ रहने वाले लोगो के लिए महान बलिदान दिया था | इसी स्थान पर महाभारत का युद्ध हुआ एवं अर्जुन द्वारा बाण से प्रगट की गयी बाणगंगा एवं वर्तमान की भुगत सरस्वती भी इसी क्षेत्र में बहती है | तकरीबन 48 कोस में फैले हुए क्षेत्र को कुरुक्षेत्र कहा जाता है | यहाँ महाभारत कालीन 360 तीर्थ स्थलों के दर्शन किय जा सकते है | इनमे प्रमुख दर्शनीय स्थल हो पेहोवा , कलयात , थानेश्वर , ज्योतिसर एवं कुरुक्षेत्र आदि |
कुरुक्षेत्र के प्रमुख दर्शनीय स्थल
ब्रह्मसरोवर – समस्त सरोवरों में ब्रह्मसरोवर का जल सबसे पवित्र माना जाता है | इस सरोवर का क्षेत्रफल करीबन ३६००x५५०० फीट है | इसे सभ्यता का गढ़ माना जाता है | सूर्यग्रहण के अवसर पर सरोवर में स्नान करने से समस्त पाप धुल जाते है | प्रतिवर्ष नवम्बर एवं दिसम्बर माह में गांधी जयंती समारोह के दिन दीप दान एवं आरती एक आकर्षक अवसर है | सरोवर में प्रवासी पक्षी भे दूर दूर से यहाँ आते है | ब्रह्मसरोवर के ही नजदीक बिरला गीत मन्दिर एवं बाबा नाथ की हवेली देखने योग्य है |
सन्नहित सरोवर – यह पवित्र ताल तकरीबन 1500×450 फीट क्षेत्र में फैला है | यह विश्वास किया जाता है कि यह सरोवर सात पवित्र सरस्वतीयो का संगम स्थल है | कहते है कि अमावस्या या चन्द्रग्रहण की रात्रि को सरोवर का जल इकट्ठा करे तो समस्त पाप धुल जाते है | ताल में स्नान करने से अश्मवेध यज्ञ करने के समान पूण्य प्राप्त होता है | यहाँ का कुम्भ मेला भी बहुत प्रसिद्ध है |
कृष्ण संग्रहालय – भगवान कृष्ण के जीवन की विभिन्न झाँकियो को इस संग्रहालय में प्रदर्शित किया गया है |
ज्योतिसर – कुरुक्षेत्र का यह पवित्र क्षेत्र भगवतगीता का जन्म स्थल माना जाता है | यहाँ खुदाई करने पर रेतीले पत्थरों की बने हुए कई प्राचीनतम प्रतिमाये मिली है | प्राचीनकाल में इस कस्बे का नाम राजा पृथु के नाम से पृथुदक था | यहाँ अभी भी घाट एवं मन्दिरों का निर्माण किया जा रहा है |
फल्गु – स्थानीय बोली में इस कस्बे का नाम फुर्ल है | यह कुरुक्षेत्र से 53 किमी की दूरी पर है | पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान ब्रह्मा की प्रार्थन पर भगवान विष्णु स्वयम यहाँ प्रकट हुए थे | स्थानीय लोगो के अनुसार कुंड में दुबकी लेने से धन एवं समृधि प्राप्त होती है | कुंड के घाटो को लाल पत्थर से सुसज्जित किया गया है |
कुरुक्षेत्र का गुरुद्वारा – अपनी कुरुक्षेत्र यात्रा के दौरान गुरु नानक देव ने यहाँ विश्राम किया था | यह गुरुद्वारा सिद्ध्व्ती के नाम से प्रसिद्ध है | सन्निहित सरोवर के निकट स्थित गुरुद्वारा छठवे गुरु हरगोविंद सिंह जी को समर्पित है |
शेख चिल्ली का मकबरा – थानेश्वर के उत्तरी दिशा में एवं शेरशाह सुरी द्वारा निर्मित सराय के नजदीक ही शेख चिल्ली का संगमरमर निर्मित मकबरा है | शेखचिल्ली ईरान के सूफी संत थे | वे 16वी शताब्दी में हजरत क़ुतुब जलालुदीन से मुलाक़ात करने के लिए थानेश्वर आये थे परन्तु उनका यही देहांत हो गया | शाहजहाँ उनका इतना आदर करते थे कि उन्होंने हजरत जलालुद्दीन के लिए निर्मित मकबरे में शेखचिल्ली को दफनाने के आदेश दिया |
बाणगंगा की गाथाये – बाणगंगा के गाथाये महाभारत युद्ध के ग्रन्थ से जुडी है | इस स्थल पत भीष्म पितामह की प्यास बुझाने के लिए अर्जुन ने अपने बाण से पवित्र गंगा को प्रवाहित किया था | यह स्थल कुरुक्षेत्र से 3 मील की दूरी पर स्थित है तथा भीष्म कुंड के नाम से प्रसिद्ध है | कुरुक्षेत्र से ठीक 5 किमी दूर कुरुक्षेत्र किरमिच मार्ग पर एक अन्य स्थल बाणगंगा है यहाँ 78×110 फीट आकार के इस कुंड में हनुमान मन्दिर एवं महाभारत के प्रमुख पात्रो की मुर्तिया प्रतिष्टित है | वैशाखी के दिन यहाँ एक मेला भी लगता है |
यातायात सुविधाय – कुरुक्षेत्र सडक ,रेल एवं वायु परिवहन द्वारा भली भाँती जुडा हुआ है | समस्त यात्रा रूट पर बहुत सुविधाए होने के फलस्वरूप यात्रा बड़ी आरामदायक होती है | यहाँ का नजदीकी हवाई अड्डा दिल्ली एवं चंडीगढ़ है जो रेल एवं सडक द्वारा कुरुक्षेत्र से भली भाँती जुड़े हुए है |
पिंजौर
पिंजौर एक प्राचीन शहर है | यह चंडीगढ़ से मात्र 22 किमी की दूरी पर चंडीगढ़ शिमला राजमार्ग पर बसा हुआ खुबसुरत कस्बा है | चंडीगढ़ से स्थानीय बसे एवं टैक्सीयाँ नियमित पिंजौर जाती है | कहा जाता है पिंजौर का निर्माण पंजाब के तत्कालीन गर्वनर फिदाई खान ने 17वी शताब्दी में कराया था | पिंजौर नगर में प्राचीन मुगल साम्राज्य सहित पटियाला शाही खानदान की कई यादे बिखरी हुयी है | वर्तमान में यह एक अच्छा पर्यटन स्थल बन चूका है | चंडीगढ़ घुमने आने वाले पिंजौर की यात्रा जरुर करते है | पिंजौर उद्यान पर्यटकों का मन मोह लेता है | यहाँ कई छोटे बड़े सुंदर बाग़ है | पिंजौर में ठहरने के लिए छोटे बड़े होटलों सहित हरियाणा राज्य पर्यटन विभाग के होटल भी है |
दर्शनीय स्थल -“यादवेन्द्र उद्यान” पिंजौर का मुख्य आकर्षण है | इस उद्यान का निर्माण औरंगजेब ने कराया था | कहा जाता है कि मातहत फिदाई खान को यहाँ खुबसुरत झरने इतने भा गये थे कि उसने एक अमोद स्थल बनाने की ठान ली थी | इसका निर्माण कार्य पूर्ण होने पर नवाब अपनी बेगम सहित यहाँ रहने आ गये थे | यादवेन्द्र गार्डन को कभी मुगल गार्डन भी कहा जाता था | यह मुगल वास्तुशिल्प का एक अनूठा नमूना है | यहाँ की हरी भरी मखमली घास एवं नाना प्रकार के रंग-बिरंगे फुल पर्यटकों को बरबस ही आकर्षित करने लगते है | बाग़ के बीचो-बीच बनाई गयी नहर भी पर्यटकों का मन मोह लेती है | इस गार्डन में बंने शीशमहल , रंग महल , जल महल यानि तीनो खुबसुरत महल यहाँ के मुख्य आकर्षण है | पर्यटक इनकी सुन्दरता निहारते ही ढ़ह जाते है |
शीश महल को फिदाई खान का दरबार कहा जाता है जबकि उसी के सामने बना रंगमहल उसकी बेगमो के मनोरंजन स्थल के रूप में जाना जाता है | बेगमो के स्नान के लिए बनाया गया जल महल भी बहुत ही खुबसुरत है | यह रंगमहल से लगा हुआ है | इसमें प्राकृतिक जल से भरे लम्बे-चौड़े तलाब एवं झरने है | बाहर से प्राकृतिक नजारों का आनन्द लेने के लिए रंगमहल में झरोखे भी बने हुए है | पिंजौर का फ्लाइंग क्लब वायुयान एवं ग्लाइडर उड़ान का प्रशिक्षण देता है | देश-विदेश से आये लोग यहाँ प्रशिक्षण प्राप्त करते है |
अन्य पर्यटन स्थल – पिंजौर एक खुबसुरत कस्बा है | यहाँ का मिनी जू देखने लायक है | यहाँ के सुंदर रेस्तौरेंट , ओपन एयर थिएटर , जापानी बाग़ कैफ़े ,ऊंट की सवारी दर्शनीय है | पर्यटक यहाँ के मनोरम दृश्यों को देखकर मन्त्रमुग्ध हो उठते है |
लाडवा
उत्सवो तथा मेलो का नगर लाडवा कुरुक्षेत्र से 18 किमी पूर्व में पीपली-यमुना नगर रोड पर स्तिथ है | यह एक प्राचीन नगर है | यहाँ लाडली वाला सुंदर देवी का लगभग 500 साल पुराना प्राचीन मन्दिर है | सम्भवत: लाडली देवी के नाम से ही नगर का नाम लाडवा पड़ा |
लाडवा के दर्शनीय स्थल
बाला सुन्दरी का मन्दिर – यह प्राचीन मन्दिर लाडवा नगर के पूर्व की ओर यमुना नगर मार्ग पर स्थित है | यहाँ हर साल उतरते चैत्र की चौदस को बहुत बड़ा मेला लगता है जो एक सप्ताह तक चलता है | इस मेले में लाडवा नगर तथ आस-पास के गाँवों के लोग लाखो की संख्या में देवी को चढावा चढ़ाने आते है |
सोहन-तालाब/एकादशी रूद्र तीर्थ – यह तीर्थ सोहन तालाब के नाम से प्रसिद्ध है | यह लगभग 5000 साल पुराना तीर्थ है तथा लाडवा के पश्चिम में पीपली-कुरुक्षेत्र रोड पर स्थित है | इस पवित्र तीर्थ के निर्माण में लाडवा के प्रसिद्ध तावा खानदान की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रही है | प्रतिदिन इस तीर्थ में हजारो लोग आते है और स्नान करते है | सोहन तालाब के दक्षिणी किनारे पर एक बहुत विशाल एवं भव्य मन्दिर का निर्माण लाला मंगल सेन ने करवाया था | इस मन्दिर में शिवलिंग तथा अन्य देवी देवताओं की मुर्तिया स्थापित है | यह तीर्थ एक रमणीय स्थल है जो पर्यटकों का मन मोह लेता है |
एकादश रूद्र तीर्थ में शिवरात्रि के पर्व पर 3 दिन तक मेला लगता है | इस मेले में भगवान शिव शंकर जी के कीर्तन भजन एवं प्रवचन होते है | इस मेले की सबसे दिलचस्प बात यह है कि फूलो की किश्तियाँ बनाकर तथा उनमे दीपक जलाकर रात के समय सोहने तालाब में प्रवाहित की जाती है जोकि बहुत ही सुंदर दृश्य प्रस्तुत करती है | इस सुंदर दृश्य का अवलोकन करने के लिए बहुत दूर दूर से लोग यहाँ आते है |
रामकुंडी तीर्थ तथा आर्य समाज मन्दिर – एकादश रूद्र तीर्थ बाला सुन्दरी देवी मन्दिर के बीच रामकुंडी नाम का तीर्थ है जो कि 500 साल पुराना , पक्की सीढियों वाला बहुत बड़ा तालाब है | तालाब के पश्चिमी किनारे पर बहुत प्राचीन शिव मन्दिर है | यहाँ प्रत्येक वर्ष कई धार्मिक मेलो का आयोजन किया जाता है |
आठवाडिया मन्दिर – यह भगवान राधाकृष्ण का प्रसिद्ध मन्दिर है | इसका निर्माण आठवादिया खानदान ने करवाया था इसलिए इसे आठवादिया मन्दिर कहा जाता है | इस मन्दिर में भगवान शिव की बेहद प्राचीन मूर्ति है तथ हाल ही में हनुमान जी की एक विशाल मूर्ति स्थापित की गयी है |
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