Skip to main content

Kovalam Tour Guide in Hindi | कोवलम के प्रमुख पर्यटन स्थल

Kovalam Tour Guide in Hindi
Kovalam Tour Guide in Hindi

भारत में जितने समुद्र तट है उनमे सर्वाधिक सुंदर , सुखद और मनोरम है केरल का कोवलम (Kovalam) | 14वी शताब्दी में केरल में कोवलम नाम के अत्यंत लोकप्रिय कवि थे | उन्ही के नाम पर इस समुद्र तट का  नाम कोवलम (Kovalam) रखा गया है | केरल की राजधानी त्रिवेन्द्रम (अब तिरुवनंतपुरम) के दक्षिण में 10 किमी की दूरी पर स्थित यह समुद्रतट देशी विदेशी पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है | कोवलम बस अड्डे पर उतरने के बाद बांये हाथ पर एक लम्बी ढलान है | यही से कोवलम (Kovalam) बीच का मुख्य दर्शनीय स्थल आरम्भ हो जाता है | इस समुद्र तट पर विहार तथा यहाँ उठती-गिरती लहरों का नृत्य देखने और निर्मल स्वच्छ जल में स्नान का आनन्द लेने के लिए नवम्बर से फरवरी का समय उपयुक्त माना जाता है |
इस समुद्र तट की सबसे बड़ी विशेषता , जो अन्य समुद्रो में नही पायी जाती , यह है कि समुद्र के अंदर प्रवेश करने पर लगभग 100 मीटर तक काफी कम गड्ढे मिलते है | पूरा ,दीघा आदि समुद्र तटो के जल में इतना अधिक लवण है कि स्नान के बाद आदमी तरोताजा अनुभव नही करता | उसके लिए पुन: स्वच्छ जल में स्नान करना आवश्यक हो जाता है | वही कोवलम के समुद्र तट के स्वच्छ जल में पर्यटक घंटो स्नान और जल क्रीडा का आनन्द लेते रहते है | स्नान करने के बाद तिरंगी रेत पर पर्यटक युवक युवतियों को लेटकर धुप स्नान करते देखना बड़ा सुखद और नेत्ररंजक लगता है | रंग-बिरंगी छतरियो के नीचे , आँखों पर काला चश्मा लगाये धुप स्नान करते विदेशी युवक युवतियों को यहाके लोग दूर से देखते है तो देखते ही रह जाते है | यह दृश्य भी बड़ा आनन्ददायक होता है |
समुद्र में 200 से 250 गज अंदर जाने पर कुछ चट्टाने मिलती है | यहाँ पर पानी का प्रवाह कम होता है इसलिए कुछ पर्यटक पिकनिक भी मनाते है किन्तु स्नान करना खतरनाक हो सकता है | इस क्षेत्र में पानी के अंदर पत्थर के बड़े बड़े टुकड़े है | इन प्रस्तर खंडो से टकरा जाने पर पैरो में चोट लग सकती है | इस समुद्र तट के दुसरे सिरे पर एक खुबसुरत मस्जिद है जिसका निर्माण दक्षिण भारतीय शैली से किया गया है | यहाँ समुद्र तट पर टहलते रहने में भी एक विशेष आनन्द की अनुभूति होती है | कोवलम के समुद्र तट पर सभी ऋतुओ में देशी विदेशी पर्यटकों को देखा जा सकता है |
तिरुवनंतपुरम के निकटतम अन्य समुद्र तटो की अपेक्षा यह समुद्र तट अधिक मनोरम है इसलिए पर्यटक यहाँ अधिक संख्या में आते रहते है | प्राकृतिक सौन्दर्य के प्रेमी पर्यटक नारियल के ऊँचे ऊँचे वृक्षों से घिरे इस समुद्र तट को अधिक पसंद करते है |कोवलम समुद्र तट के चारो ओर हरियाली ही हरियाली है | तट पर चमचमाती रेट और उठती-गिरती नृत्यनिरत समुद्री जल की तरंगे इस समुद्र तट को अनुपम प्राकृतिक सुषमा से मंडित करती है | इस मनोरम प्राकृतिक दृश्य को देखकर पर्यटक मन्त्रमुग्ध हो जाते है | कोवलम के प्राकृतिक सौन्दर्य पर मुग्ध होकर किसी फ़्रांसिसी पर्यटक ने कभी लिखा था “भारत में केवल तीन चीज दर्शनीय है ताजमल .कोवलम समुद्र तट और यहाँ की गरीबी” | उक्त पर्यटक की इस उक्ति में किसी को भी सच्चाई नजर आयेगी |
लम्बे रेतीले तट , ताल वृक्षों के समुह और इन वृक्षों से घिरी दो छोटी खाड़ियो ने इस समुद्र तट को बहुत ही खूबसूरत और आकर्षक बना दिया है | यहाँ समुद्र तट की उठती हुयी लहरे असमान छूती सी जान पडती है | ये लहरे जब गिरती है तो तट पत काफी दूर तक फ़ैल जाती है | कोवलम के समुद्री तट की एक ओर उल्लेखनीय विशेषता है यह प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर और पर्यटकों के लिए आकर्षक तो है ही उपजाऊ भी है | मुख्य तट से पीछे रहने वाले यहाँ खेती करते है और मछुआरे रात में जाकर मछली मारते है |
कोवलम (Kovalam) समुद्र तट से 1 किमी दूर दक्षिण विझीनजम बन्दरगाह है | यहाँ उत्तर की ओर हरे गुलाबी रंग की मस्जिद और दक्षिण की ओर विशाल कैथोलिक चर्च देखने लायक है | सूर्यास्त होते ही यहाँ  से काफी बड़ी संख्या में समुद्र में मछली मारने के लिए नौकाये निकल पड़ती है | रात्रि में जब उन पर रोशनी पडती है तो लगता है जैसे किसी ने आकाश के गले मके गले में हार डाल दिया है | कोवलम के जनसंकुल समुद्र तट से 8 किमी दूर पुलिनकुड़ी और सोमती राम दर्शनीय स्थल है | सोमती राम आयुर्वेदिक बीच रिसोर्ट में आप प्राकृतिक तरणताल , संगीत ,मार्शल आर्ट या नृत्य का आनन्द ले सकते है | अशोक बीच रिसोर्ट बस स्टैंड से 15 मिनट की दूरी पर दुसरी खाड़ी का लाईट हाउस किनारा है | यहाँ भी बहुत से रस्टोरेंट और होटल है |

Comments

Popular posts from this blog

Pythagoras Biography in Hindi | पायथोगोरस की जीवनी

Pythagoras Biography in Hindi पाईथागोरस (Pythagoras) को महान दार्शनिक और गणितज्ञ माना गया है | इनका जन्म  ईसा से भी 500 वर्ष पूर्व यूनान के सामोस नामक टापू में हुआ था | यह मनुष्य जाति का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि प्राचीनकाल में लोग अपने विषय में किसी प्रकार की कोई सुचना लिखित रूप में प्रस्तुत करके नही रखा करते थे अत: उनके विषय में विस्तार से कुछ मिल पाना बड़ा असम्भव सा होता था | यही स्थिति पाईथागोरस की भी है | उस समय लिखने और संचार के साधनों का उतना विकास भी नही हुआ था और न ही शायद छपाई आदि की कोई व्यवस्था उस समय रही थी | पाईथागोरस (Pythagoras) के समय में तो कदाचित भोज-पत्र पर भी लिखने की प्रक्रिया चल पड़ी थी अथवा नही , कहना कठिन है | बाद के लेखको को पूर्ववर्ती पीढियों द्वारा कहा सूनी के आधार पर जो कुछ सूचनाये प्राप्त हो जाया करती थी उनके आधार पर ही उन महान पुरुषो के बारे में कुछ जानकारी मिलने लगी है | पाईथागोरस उस समय उत्पन्न हुए थे जब गणित अपनी आरम्भिक अवस्था में ही था किन्तु अपनी विद्वता के कारण इस महान दार्शनिक ने एक ऐसी प्रमेय का सूत्रपात किया जो विश्वभर में प्राथमिक कक्षाओ में ही व...

पहिये के अविष्कार की रोचक कहानी | Wheel Invention Story in Hindi

पहिये के अविष्कार की रोचक कहानी | Wheel Invention Story in Hindi आदिमानव लगभग 20,000 साल पहले पहिये दार गाडियों का उपयोग किया करते थे लेकिन विश्वसनीय प्रमाणों के आधार पर ज्ञात होता है कि पहिये का प्रचलन 3500 से 4000 ईस्वी पूर्व सीरिया और सुमेरियसा में ही सबसे पहले हुआ था | 3000 ईसा पूर्व तक मेसापोटामिया में पहिये का ख़ासा प्रचलन शूर हो चूका था और सिन्धु घाटी में यह लगभग 2500 वर्ष ईसा पूर्व पहुचा | पहिये का आविष्कार संसार में कब और कहा ,किस प्रकार हुआ या किसने किया , इस संबध में निश्चित रूप से कुछ नही कहा जा सकता | पहिये का लाभ उठाकर पैदल चलने की इस क्रिया यानि साइकिल का अविष्कार भले ही लगभग पौने दो सौ वर्ष पूर्व हुआ हो लेकिन पहिये का अविष्कार निश्चित रूप से हजारो वर्ष पूर्व हुआ हो इसके सर्वत्र प्रमाण मौजूद है | पौराणिक सभ्यताओं से लेकर हजारो वर्ष पुराणी पूरा-सामग्री में भी रथो या बैलगाडियों के होने के प्रमाण उपलब्ध है | फिर भी ऐसा समझा जाता है कि पहिये का अविष्कार “मेसापोटामिया” में यानि आधुनिक ईराक के एक हिस्से में कभी हजारो वर्ष पूर्व हुआ था | कहा जाता है कि किसी पेड़ के गोल...

भारत के प्रधानमंत्री और उनसे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य | Indian Prime Ministers Facts in Hindi

भारत के प्रधानमंत्री और उनसे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य | Indian Prime Ministers Facts in Hindi प्रधानमंत्री (Prime Minister) , विधायिका और कार्यपालिका दोनों का वास्तविक प्रधान होता है तथा मंत्रियों एवं राष्ट्रपति के बीच संवाद के लिए सेतु का कार्य करता है | राष्ट्रपति की शक्तियाँ औपचारिक ही है | व्यवहार में उसकी शक्तियों का उपयोग PM ही करता है | राष्ट्रपति , लोकसभा में बहुमत दल के नेता को ही प्रधानमंत्री (Prime Minister) नियुक्त करता है परन्तु यदि किसी दल को पूर्ण बहुमत न मिला हो तो सबसे बड़े दल को , यदि वह भी न हो तो चुनाव पूर्व सबसे बड़े गठ्बन्धन वाली पार्टी के नेता को PM नियुक्त करता है | साथ ही निर्धारित समयावधि में लोकसभा में मंत्रीमंडल को विश्वास मत प्राप्त करने को राष्ट्रपति को कह सकता है | आइये पहले भारत के सभी प्रधानमंत्रीयो की सूची पर एक नजर डालते है | भारत के प्रधानमंत्रियों की सूची | Prime Minister of India List in Hindi क्र. प्रधानमंत्री का नाम जन्म-मृत्यु वर्ष कार्यकाल दल 1 जवाहरलाल नेहरु 1889–1964 1947-1964 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस 2 गुलजारीलाल नंदा 1898–1998 1964 (13 दिन) भारत...