
कश्मीर का सबसे बड़ा शहर श्रीनगर (Srinagar) है जो जम्मू कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी है | अनेक जातियाँ , संस्कृतियों एवं भाषाओं का संगम बना यह शहर खुबसुरत पर्यटन स्थल है | कश्मीर , जिसे मुगल बादशाओ ने धरती का स्वर्ग कहा था आज आतंकवाद के कारण यहाँ पर्यटकों की सुख-सुविधाओं के साधन अपनी आभा खो चुके है लेकिन उन स्थलों की आभा अभी भी बरकरार है जो पर्यटकों को आकर्षित करते रहे है |
इस शहर की खासियत झरने तथा मुगल बादशाओ द्वारा बनाये गये उद्यान है जो चौथी और पांचवी सदी की खुबसुरत मिसाल है | नगीन और डल जैसी विश्व प्रसिद्ध झीले श्रीनगर की जान कही जाती है | श्रीनगर (Srinagar) झेलम नदी के दोनों किनारों पर फैला हुआ है | अपने लुभावने मौसम के कारण श्रीनगर (Srinagar) पर्यटकों को वर्ष भर आकर्षित करता है | यह समुद्र तल से 1730 मीटर की उंचाई पर स्थित है |
श्रीनगर (Srinagar) के प्रमुख पर्यटन स्थल
डल झील – विश्व प्रसिद्ध डल झील शहर के पूर्व में श्रीधरा पर्वत के चरणों में स्थित है | वर्तमान में डल झील का क्षेत्रफल 12 वर्ग किमी रह गया है जबकि कभी 25 वर्ग किमी के क्षेत्र में फ़ैली हुयी थी | इसके बीचो बीच अनेक द्वीप है जो अपने आप में खूबसूरती के केंद्र है | इसके अतिरिक्त शहर में कई उद्यान भी है जो मुगल उद्यानों के रूप में जाने जाते है और सूर्योदय से सूर्यास्त तक खुले रहते है |
शंकराचार्य मन्दिर – यह मन्दिर शहर से कुछ दूर एक हजार फुट की उंचाई पर स्तिथ है | जिस पहाडी पर यह मन्दिर है उसे तख्त-ए-सुलेमान के नाम से जाना जाता है | इस मन्दिर का निर्माण महाराजा अशोक के बेटे जलूका ने करवाया था जबकि मन्दिर के भीतर जो वर्तमान ढांचा है उसका निर्माण किसी हिन्दू श्रुधालू द्वारा जहांगीर के शासनकाल के दौरान कराया गया था | इस मन्दिर में पीर पंजाल पर्वत श्रुंखला का विहंगम दृश्य और शहर का प्रत्येक भाग देखा जा सकता है |
हरी पर्वत किला – श्रीनगर शहर (Srinagar) के उत्तर पूर्व में स्थित शरीफा पर्वत पर इस किले का निर्माण अफगान शासक अता मुहम्मद खां ने ओर किले की चारदीवारी का निर्माण अकबर ने करवाया था | इस किले के चारो ओर बादाम के बाग़ है | बसंत ऋतू में जब पेड़ो पर अंकुर फूटने लगते है तो ये बाग अपनी छटा से सभी का मन मोह लेते है | किले में जाने के लिए राज्य पुरातत्व विभाग की अनुमति लेनी आवश्यक है जिसका कार्यालय लालमंडी चौक में स्तिथ है |
नगीन झील – यह झील शहर से 8 किमी दूर है | हालांकि यह डल झील का ही एक हिस्सा है लेकिन यह अपनी खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध है | इस तक पहुचने के लिए सबसे छोटा रास्ता हजरतबल की ओर से है | नगीने की तरह चमकता इसका नीला पानी तथा चारो ओर अंगूठी की तरह दिखने वाला पेड़ो के झुण्ड के कारण इसका नाम नगीन पड़ा है | इसमें वाटर स्किंग तथा तैराकी की सुविधाए उपलब्ध है |
शाह हमदान मस्जिद – झेलम के किनारे बसी यह शहर की सबसे पुराणी मस्जिद है | इसकी दीवारों पर पेपरमोशी की कारीगरी की गयी है | इस तक पहुचने के लिए सडक मार्ग यह फिर शिकारे से जाया जा सकता है |
हजरतबल दरगाह – यह दरगाह डल झील के पश्चिमी किनारे पर शहर से 9 किमी दूर है | एक ओर झील तथा दुसरी ओर पर्वत श्रुंखला होने के कारण यह बहुत ही खुबसुरत दृश्य पेश करती है | इसकी महत्ता कश्मीर के इतिहास में इसलिए भी है क्योंकि हजरत मुहम्मद साहब की निशानी के रूप में उनका एक पवित्र बाल इसमें रखा गया है जिसका प्रदर्शन विशेष अवसरों पर किया जाता है |
पत्थर मस्जिद – शहर से 6 किमी दूर पत्थर से बनी इस मस्जिद का निर्माण नूरजहाँ ने करवाया था और इसमें तब सिर्फ शिया मुसलमान ही इबादत किया करते थे |
गुलमर्ग – विश्व के प्रसिद्ध हिल स्टेशनों में गुलमर्ग एक है | अगर सोनमर्ग को सोने की घाटी कहते है तो गुलमर्ग फूलो की घाटी के रूप में मशहूर है | यहाँ सर्दियों में खेल होते है | यद्यपि यहाँ सालभर में कभी भी जा सकते है लेकिन अक्टूबर से मार्च का मौसम बढिया रहता है |
पहलगाम – श्रीनगर (Srinagar) से 96 किमी की दूरी पर स्थित पहलगाम एक बहुत ही रमणीक पर्यटन स्थल है तथा अमरनाथ की वार्षिक यात्रा का आधार कैंप भी है | पहलगाम जाने के लिए अप्रैल से नवम्बर के प्रथम सप्ताह तक का मौसम सबसे बढिया होता है |
सोनमर्ग – यहाँ भी अक्टूबर से मार्च तक का मौसम सुहावना होता है | श्रीनगर लेह मार्ग पर है तथा कहा जाता है यहाँ का पानी अपने आप में सोना समेटे हुए है |
श्रीनगर (Srinagar) के निकटवर्ती दर्शनीय स्थल
- पहलगाम मार्ग पर स्तिथ मट्ठन (प्राचीन नाम मार्तण्ड) हिन्दुओ का पवित्र स्थान माना जाता है जिसमे एक शिव मन्दिर और खुबसुरत झरना भी है | श्रीनगर से यह 61 किमी दूर है | मट्ठन से 3 किमी आगे चलकर मार्तण्ड के कुछ खंडहर है जो सूर्य मन्दिर के नाम से भी जाने जाते है | इसका निर्माण 7वी एवं 8वी सदी में ललितादित्य ने करवाया था जो कश्मीर का एक प्रसिद्ध योद्धा था |
- अच्छाबल तक पहुचने का रास्ता अनंतनाग से है | श्रीनगर से 58 किमी दूर स्तिथ इस स्थान को कभी नूरजहाँ के पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाता था | यहाँ एक मुगल उद्यान भी है जो अपनी खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध है |
- अवन्तिपुर में अवन्ती वर्मा के शासनकाल के खंडहर है | यह श्रीनगर से 29 किमी दूर है | यह अवशेष 9वी सदी में बने मन्दिरों के है |
- करीब 2020 मीटर की उंचाई पर और श्रीनगर शहर से 70 किमी की दूरी पर स्थित कोकरनाग अपने खुबसुरत झरनों के लिए जाना जाता है |
- झेलम नदी का उद्गम स्थल बेरीनाग है जो श्रीनगर से 80 किमी दूर और समुद्रतल से 1876 मीटर की उंचाई पर स्तिथ है |
- कश्मीर के प्रसिद्ध सूफी संत शेख नुरुद्दीन जो नन्द ऋषि के नाम से भी जाने जाते है की दरगाह चारे शरीफ युस्मर्ग के रस्ते में जो श्रीनगर से 30 किमी दूर है |
- बुलर झील एशिया की सबसे बड़ी स्वच्छ और ताजे पानी की झील है | 125 वर्ग किमी के क्षेत्रफल में फ़ैली यह झील श्रीनगर से करीब 60 किमी दूर है |
श्रीनगर पहुचने के मार्ग
- वायु मार्ग – अमृतसर ,चंडीगढ़ , दिल्ली , मुम्बई से लेह तथा श्रीनगर के लिए इंडियन एयरलाइन्स , जेट एयरवेज से सीधी उड़ाने है | हवाई अड्डे से शहर तक आने के लिए टैक्सी की सुविधा उपलब्ध है |
- रेल मार्ग – श्रीनगर का निकटतम रेलवे स्टेशन जम्मू है जो यहाँ से 300 किमी दूर है | जम्मू के लिए देश के सभी प्रमुख शहरों से रेल सेवाए उपलब्ध है |
- सड़क मार्ग – राष्ट्रीय राजमार्ग से श्रीनगर देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है | श्रीनगर से प्रदेश के अन्य प्रमुख शहरों के लिए बस सुविधा भी है |
श्रीनगर जाने का उपयुक्त समय
पर्यटक वर्ष के किसी भी महीने में श्रीनगर आने का कार्यक्रम बना सकते है पर सर्दियों में कडाके की ठंड होती ही | यहाँ गर्मियों में भी इतनी ठंड है तो रहती है कि उनी कपड़े पहनने पड़ते है |
श्रीनगर से खरीदने लायक वस्तुए
कश्मीर से पर्यटक खाने की चीजे जैसे बादाम , अखरोट , चेरी आदि खरीद सकते है | इसके अलावा सिल्क , पश्मीना के कपड़े , बेंत के सामान तथा कालीन भी खरीदे जा सकते है | कश्मीर का केसर भी विश्वभर में प्रसिद्ध है | खरीददारी के लिए सरकारी एम्पोरियम और खादी ग्रामोद्योग को ही प्राथमिकता दे |
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