
तमिलनाडु की राजधानी मद्रास का नाम अब चेन्नई (Chennai) है | 1639 ई. में ईस्ट इंडिया कम्पने ने चेन्नई (Chennai) नामक एक छोटे से गाँव को अपना प्रथम व्यापारिक केंद्र बनाया था | विविधताओं का यह नगर भारत के 4 महानगरो में एक है | यहाँ आधुनिकता के साथ साथ प्राचीन सभ्यता और संस्कृति सुरक्षित है | चेन्नई कभी पल्लव राजाओं की राजधानी थी | चेन्नई को भारत का प्रवेश द्वार कहा जाता है | चेन्नई (Chennai) जाने के लिए शरद ऋतू सबसे अधिक उपयुक्त है | इस ऋतू में यहाँ का मौसम बहुत ही सुहावना रहता है | दिसम्बर-जनवरी में यहाँ अनेक स्थलों पर सांस्कृतिक कायर्क्रम प्रस्तुत किये जाते है | इन समारोहों में दक्षिण भारत के प्रत्येक क्षेत्र की झलक देखी जा सकती है |
चेन्नई के प्रमुख दर्शनीय स्थल | Tourist Places of Chennai
मेरीना बीच – मेरीना बीच संसार के सभी समुद्रतटो में दूसरा सबसे बड़ा और सुरम्य बीच है | इस सागर तट पर लाइट हाउस भी है और अन्ना और एम.जी.रामचन्द्रन की समाधियाँ है | तट के साथ-साथ चौड़ी ,स्वच्छ और सुंदर सड़क है | सडक के दुसरी ओर विश्वविद्यालय ,प्रेसिडेंसी कॉलेज और आइस हाउस है | रात के समय बिजली की जगमगाहट सागर तट को आकर्षक बना देती है | तट पर शंख और सीपियो से बनी सुंदर वस्तुए बिकती है |
इलियट्स बीच – यह बीच पिकनिक के लिए उपयुक्त स्थान है | बीच के किनारे अष्टलक्ष्मी मन्दिर और बेलाकानी चर्च है |
वल्लुवरकोट्टम – तमिल के संत कवि तिरुव्ल्ल्लुवर की स्मृति में निर्मित इस भवन में 23 मीटर लम्बे रथ पर स्थापित तिरुवल्लुवर की प्रतिमा दर्शनीय है इस भवन के विशाल हॉल में 4000 लोग बैठ सकते है |
थियोसोफिकल सोसायटी – इलियट्स बीच के पास ही के बड़े बगीचे में स्थित सोसायटी के अंदर प्रवेश करने पर बड़ी शांति महसूस होती है | दर्शक आत्मकेन्द्रित हो जाते है | यहाँ के प्राचीन पुस्तकालय भी है जो प्रात: 8 से 10 और शाम 2 से 4 बजे तक खुला रहता है | यहाँ 40 हजार वर्गफुट क्षेत्र में फैले एक पुराने पीपल वृक्ष के नीचे प्रवचन होता है |
कलाक्षेत्र – प्रसिद्ध नृत्यांगना रुक्मिणी देवी अरुंडेल द्वारा 1936 ई. ने स्थापित इस प्रसिद्ध नृत्य विद्यालय में नृत्य संगीत ,चित्रकला , बुनाई और टेक्सटाइल डिजाइनिंग का प्रशिक्षण दिया जाता है |
हार्टी कल्चर उद्यान – जो लोग हरियाली के प्रेमी है | उनके लिए घुमने का यह सर्वोत्तम स्थान है | 22 एकड़ जमीन पर फैले इस उद्यान में तरह तरह के फुल और पेड़-पौधे मन-मोह लेते है |
गिंडी नेशनल पार्क – इस पार्क में बिल्ली- हिरण ,सियार, बन्दर तथा तरह तरह के पक्षियों को देखा जा सकता है | इसके मुख्य द्वार पर मगरमच्छ बैंक , सर्पघर और मनोरंजन पार्क है | मगरमच्छ बैंक में मगरमच्छ की तरह तरह की प्रजातियों और सर्पघर में तरह तरह के सांप है |
वंडलूर जू – चेन्नई से 30 किमी दूर 150 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस चिड़ियाघर में अनेको प्रकार के पशुओ को उन्मुख वातावरण में विचरण करते देखा जा सकता है | तरह तरह के पक्षियों के सम्मिलित स्वर से एक कर्णप्रिय संगीत की सृष्टि होती है |
बिडला प्लेनेटेरीयम – 1988 में निर्मित इस प्लेनेटेरियम में सूर्य चन्द्रमा और तारो की स्थिति ,अन्तरिक्ष यान , कामेट , सूर्यग्रहण के दृश्यों को विस्तार से दिखाया जाता है | प्रात: 10:45 , अपराह्न 01:15 और शाम 03:45 पर ये शो दिखलाए जाते है | प्रवेश शुल्क देना होता है |
सरकारी संग्रहालय – इस प्राचीन संग्रहालय में पल्लव , चोल और पांड्या राजाओं के समय की कलाकृतिया तथा ताम्बे की वस्तुए देखी जा सकती है | यहाँ एक आर्ट गैलरी भी है जिसमे आधुनिक और समकालीन कला के नमूने , खासकर शिल्पकला की बारीकी देखते ही बनती है | संग्रहालय के अलग-अलग कक्षों में जीव विज्ञान , भू-विज्ञान , पुरातत्व विज्ञान तथा वनस्पति शास्त्र संबंधी वस्तुए देखी जा सकती है |
कपालेश्वर मन्दिर – मायलापुर में 13वी शताब्दी में निर्मित चेन्नई के सबसे बड़े मन्दिर के 37 मीटर लम्बे गोपुर में उत्कीर्ण पौराणिक कथाये द्रवित शिल्पकला के उत्कृष्ट नमूने प्रस्तुत करती है | इस मन्दिर में स्वच्छ जल का एक सुंदर सरोवर है जिसके चारो ओर सीढ़िया बनी हुयी है | कहा जाता है कि इस मन्दिर के आस-पास तमिल भाषा के महान ग्रन्थ तिरुक्क्ल के प्रणेता विद्वान संत एवं तमिल कवि तिरुवल्लुवर रहते थे |
पार्थसारथी मन्दिर – तिरुवल्लीकेनी में 8वी सदी में पल्लव राजाओं द्वारा निर्मित इस मन्दिर में विष्णु के पांचो अवतारों की मुर्तिया है | यहाँ जनवरी में बैकुंठ एकादशी का उत्सव होता है | मुख्य मन्दिरों के अलावा वादापलानी मन्दिर में नवम्बर-दिसम्बर में करथिगई उत्सव होता है |
मामल्लूपुरम के मन्दिर – पल्लव राजाओ का समुद्री बन्दरगाह मामल्लूपुरम एक एतेहासिक नगर था | इस क्षेत्र के 6 मन्दिर जलमग्न हो गये ,शेष शिव मन्दिर देखने योग्य है | टैगोर गुफा, 5 रथ , दीवारों पर उकेरे गये चित्र और अर्जुन की तपस्या तथा महिषासुर मर्दन के दृश्य एवं प्रतिमाये बहुत ही सुंदर और दर्शनीय है | पत्थरों को तराश कर बनाये गये मन्दिरों में 5 पांड्वो के और एक द्रौपदी के नाम पर है | कृष्ण मंडप के सामने तपस्यारत अर्जुन की प्रतिमा है |
सेंट मेरी चर्च – एशिया का सबसे प्राचीन एग्लिकन गिरिजाघर है | यहाँ की बड़ी रोशनी वाली मस्जिद दर्शनीय है |
जलपक्षी विहार और पार्क – चेन्नई से 58 किमी दूर वेदान्तनगर चेन्नई का ही नही , देश का जलपक्षी विहार है | जल में विहार करते पक्षियों का दृश्य बड़ा मनोहारी होता है जिसे देखकर बड़ी प्रसन्नता होती है |
चेन्नई से 35 किमी दूर मातवरम के पास किष्किन्धा
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