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Delhi Tour Guide in Hindi | दिल्ली के प्रमुख पर्यटन स्थल

Delhi Tour Guide in Hindi
Delhi Tour Guide in Hindi

अपने विगत को सुनहरे एतेहासिक अस्तित्व में समेटे है भारत की राजधानी दिल्ली (Delhi) | जहां इसे राजनीतिक दांव-पेचो का अखाड़ा माना जाता है वही यह अनेक पर्यटन स्थलों को अपने में संजोये पर्यटन के लिए केंद्र बिंदु है | एतेहासिक तथ्यों के अनुसार दिल्ली (Delhi) 17 बार बसी और 17 बार उजड़ी | इस उजड़ने और बसने के क्रम में पौराणिक काल से आधुनिक काल तक अनेक राजवंशो की गाथा अपने में समेटे है दिल्ली |
आज दिल्ली (Delhi) को देखकर लगता है कि दिल्ली कितनी बार उजड़कर बसी उसकी खूबसूरती उतनी ही बढी | राजपूत राजाओ और मुगल बादशाहों के वास्तुशिल्प और स्थापत्य कला के साक्ष्य अपने में सहेजे दिल्ली अभूतपूर्व एतेहासिक गौरव की साक्षी है | सन 1911 के पश्चात अंग्रेजो ने आधुनिक दिल्ली (Delhi) की रुपरेखा का स्वरूप तैयार किया |

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आज दिल्ली (Delhi) अतीत और वर्तमान के खुबसुरत सामंजस्य को दिखाती है | जहां एक ओर एतेहासिक मकबरे ,किले और मीनारे है वही गगनचुंबी इमारते और चमकते-दमकते बाजार पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते है | यमुना के पश्चिमी किनारे पर बसी दिल्ली वस्तुत: दो भागो में बंटी है पुरानी दिल्ली और नई दिल्ली |
पुरानी दिल्ली क्षेत्र में लाल किला , जामा ,मस्जिद , चांदनी चौक जैसी मशहूर इमारते और बाजार दर्शनीय है | दुसरी ओर नई दिल्ली क्षेत्र में संसद भवन  , राष्ट्रपति भवन , इंडिया गेट ,राष्ट्रीय संग्रहालय ,प्रगति मैदान ,जन्तर-मन्तर , लोटस टेम्पल , बिरला मन्दिर आदि पर्यटन स्थल है | वर्तमान दिल्ली जहां एक ओर उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद , नोएडा को छूती है वही हरियाणा के गुडगाँव क्षेत्र को भी स्पर्श करती है |

दिल्ली के प्रमुख दर्शनीय स्थल | Popular Tourist Places of Delhi

लाल किला (Red fort) – शाहजहाँ में लाल पत्थरों से लाल किले का निर्माण आरम्भ करवाया था जो 1648 में जाकर पूरा हुआ | यह किला 2 किमी के लम्बे क्षेत्र में फैला है किले में आकर्षण के केंद्र है मोती मस्जिद , दीवान-ए-आम , दीवान-ए-ख़ास , शाही स्नानगृह या हमाम और रंगमहल आदि | इसके अलावा यहाँ बने संग्रहालय में मुगलकालीन कला के नमूने संग्रहित है जिनमे वस्त्राभूषण ,अस्त्र-शस्त्र एवं चित्रकला की उत्कृष्ट कृतियाँ है | विदेशी सैलानियों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण यहाँ लगने वाला मीना बाजार है | इस प्रसिद्ध बाजार की खूबसूरती मुगलकालीन तो नही रही है फिर भी यहाँ मिलने वाली चीजो पर मीनाकारी और नक्काशी सहज ही लोगो को आकर्षित करती है | इसके अलावा लाल किले में प्रत्येक शाम प्रस्तुत किया जाने वाला लाइट एंड साउंड का कार्यक्रम हमारी एतेहासिक पृष्टभूमि की झलक देता है |
जामा मस्जिद (Jama Masjid)– लाला किले के प्रवेश द्वार के ठीक सामने सडक के दुसरी ओर बनी है मुगल स्थापत्य की अनूठी मिसाल जामा मस्जिद , इसकी 2 विशाल मीनारे 40 मीटर ऊँची है और 3 विशाल प्रवेश द्वार इसकी भव्यता को ओर बढाते है | 1644 में मुगल बादशाह शाहजहाँ ने इसका निर्माण आरम्भ करवाया था | मस्जिद के पूर्वी छोर से लाल किले का खुबसुरत दृश्य देखा जा सकता है | जामा मस्जिद इतने बड़े क्षेत्रफल में फ़ैली है कि यहाँ 25 हजार लोग एक साथ नमाज अदा कर सकते है |
चाँदनी चौक (Chandni chauk) – जामा मस्जिद और लाल किले से कुछ कदम की दूरी पर है चांदनी चौक | यह दिल्ली का होल-सेल मार्केट है जहां पर्यटक हर प्रकार की जरूरत का सामान आसानी से खरीद सकते है | इसी के साथ है लाजपतरॉय मार्किट , जहा इलेक्ट्रॉनिक का छोटा से छोटा एवं बड़े से बड़ा सामान मिल जाता है |
राजघाट (Rajghat) – लाल किले से लगे रिंग रोड के दुसरे किनारे पर बनी है देश की विभूतियों की समाधियाँ |राजघाट में महात्मा गांधी , विजय घात पर लाल बहादुर शास्त्री और शान्ति वन में जवाहरलाल नेहरू की समाधियाँ है | इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की समाधियाँ क्रमश: शक्ति स्थल और वीरभूमि के नाम से जानी जाती है | इन समाधियो का सबसे बड़ा आकर्षण जहां इन एतेहासिक हस्तियों की सहेजी यादे है वही यहाँ के हरे-भरे उद्यान अपनी प्राकृतिक छटा से पर्यटकों को सफर के तनाव से मुक्त कर देते है |
गांधी स्मारक संग्रहालय – महात्मा गांधी समाधि स्थल के पास ही बनाया गया है गांधी स्मारक संग्रहालय , जहां महात्मा गांधी के जीवन से सम्बद्ध वस्तुए संग्रहित कर उन्हें सुरक्षित रखा गया है |
प्रगति मैदान – राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियो का केंद्र है प्रगति मैदान | यहाँ प्रत्येक वर्ष 14 से 27 नवम्बर तक अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला आयोजित होता है | इसके अलावा यहाँ पुस्तक मेला और कई अन्य मेले भी समय समय पर आयोजित होते रहते है |
पुराना किला (Old Fort) – हमारे पौराणिक अतीत को अपने में समेटे है पुराना किला | माना जाता है कि इसे महाभारत काल में पांड्वो ने बनवाया था | पांड्वो द्वारा निर्मित यह स्थापत्य की अनूठी मिसाल अब खंडहर में तब्दील होती जा रही है |
चिड़ियाघर (Zoo)– पुराने किले के दक्षिण में बसाया गया है वन्य प्राणियों का निवास स्थल , जहां विभिन्न जातियों के जीव-जन्तु एवं पशु-पक्षी देखे जा सकते है | यह गर्मियों में सुबह 8 से शाम 6 बजे तक और सर्दियों में सुबह 9 से शाम 5 बजे तक खुला रहता है |
इंडिया गेट (India Gate) – राजपथ के पूर्वी छोर पर बना है 42 फीट उंचा शहीदी स्मृति स्मारक इंडिया गेट | यहाँ अमर जवान ज्योति प्रज्वलित रहती है | यह स्मारक प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान शहीद हुए जवानो की याद में बनाया गया | 90 हजार शहीदों के नाम यहाँ अंकित है |
राष्ट्रपति भवन – राजपथ पर इंडिया गेट के ठीक विपरीत छोर पर राष्ट्रपति भवन स्थित है | यह भवन स्वतंत्रता पूर्व परतंत्र भारत के आखिरी वायसराय लार्ड माउंटबेटन का भी निवास स्थान रहा | सुरक्षा कारणों के मद्दे\नजर इसके अंदरुनी क्षेत्रो को आम जनता के लिए नही खोला गया है | प्रत्येक वर्ष फरवरी से मार्च तक राष्ट्रपति भवन में बना मुगल गार्डन आम जनता के दर्शनार्थ खोला जाता है |
संसद भवन (Parliament) – राष्ट्रपति भवन – राष्ट्रपति भवन के समीप एवं राजपथ के दक्षिण में बना है भारतीय ससंद भवन | यह वास्तुशिल्प एवं स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है | यह भवन गोलाकृति में बना है | इसका व्यास 171 मीटर है |
क्नॉट पैलेस (Canaught Place) – दिल्ली (Delhi) का केंद्र बिंदु माना जाता है कनाट प्लेस | यह गोलाकार है जिसकेआउटर और बाह्य स्केल में अनेक बड़ी कम्पनियों के कार्यालय बने है | यहाँ भूमिगत पालिका बाजार भी है | यहाँ बड़े बड़े पार्क एवं विम्पी और मेकडोनाल्ड जैसे रेस्तरां है |
जन्तर-मन्तर (Jantar Mantar) – कनाट प्लेस से कुछ दूरी पर बना है जन्तर-मन्तर | जिसे जयपुर के सवाई राजा जयसिंह ने 1725 को बनवाया | यहाँ बनी धुप घड़ी ग्रह-नक्षत्रो का स्थान एवं खगोलीय घटनाओं की जानकारी देती है | खगोल विज्ञान में रूचि रखने वाले पर्यटकों के लिए यह आकर्षण का केंद्र है |
बिरला मन्दिर (Birla Temple) –  कनाट प्लेस से लगभग 1 किमी की दूरी पर स्तिथ है बिरला मन्दिर | यह आधुनिक भारतीय वास्तुशिल्प की उत्कृष्ट कृति है | इसे उद्योगपति बिरला ने 1938 में बनवाया था |
कुतुबमीनार (QuutbMinar)-वास्तुशिल्प एवं पर्यटन की दृष्टि से दिल्ली के महरौली क्षेत्र में बनी कुतुबमीनार महत्वपूर्ण है | 1193 में इस कुतुबुद्दीन ऐबक ने बनवाना शुरू किया | इसकी एक मंजिल बनते ही कुतुबुद्दीन ऐबक का निधन हो गया फिर उसके उत्तराधिकारियों ने इसे पूर्ण किया | पहले इसमें 7 मंजिले थी पर अब 5 ही शेष है | इसकी उपरी मंजिले देखने के लिए मीनार के अंदर घुमावदार सीढ़िया बनाई गयी है | लगभग 80 के दशक से पर्यटक इसे मात्र बहर से ही देख सकते है | इस एतेहासिक स्मारक के पास बना है लौह स्तम्भ | इस स्तम्भ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह हर मौसम को सहते हुए भी बिना जंग के खड़ा है | यह लौह स्तम्भ काफी प्राचीन माना जाता है |
लोटस टेम्पल (Lotus Temple)– दक्षिण दिल्ली के नेहरु प्लेस के करीब बना है बहाई धर्मावलम्बियों का लोटस टेम्पल | इस टेम्पल के अंदर पहुचने पर एक अनोखी शान्ति का आभास होता है | 80 के दशक में बना यह कमलाकृति मन्दिर पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है |
राष्ट्रीय संग्रहालय (National Museum) – राष्ट्रपति भवन के समीप बना राष्ट्रीय संग्रहालय सम्पूर्ण भारत की विभिन्न कालो की कलात्मक और पुरातत्वीय वस्तुओ को अपने में सहेजे है | यहाँ लकड़ी धातु और टेराकोटा एवं पत्थर से बनी अनेक मूर्तियों का संग्रह है |यह सुबह 10 से शाम 5 बजे तक दर्शको के लिए खोला जाता है | यह सोमवार को बंद रहता है |

दिल्ली (Delhi) पहुचने के मार्ग

  • वायु मार्ग – दिल्ली (Delhi) वायु मार्ग द्वारा देश के सभी प्रमुख शहरों से जुडी है | दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा कनाट प्लेस से मात्र 20 किमी दूर स्थित है | यहाँ से देश-विदेश के लिए उड़ाने उपलब्ध है | घरेलू उड़ानों के लिए पालम हवाई अड्डा  भी इसके निकट ही है |
  • रेल मार्ग – दिल्ली (Delhi) में तीन बड़े रेलवे स्टेशन तथा अन्य कई स्टेशन भी है | नई दिल्ली , पुराणी दिल्ली तथा निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन द्वारा दिल्ली पुरे देश के रेलवे स्टेशनों से जुडी हुयी है तथा यहाँ रेल मार्ग द्वारा भी आने-जाने की श्रेष्ट सुविधाए उपलब्ध है |
  • सड़क मार्ग – दिल्ली (Delhi) राष्ट्रीय राजमार्ग द्वारा देश के सभी प्रमुख शहरों एवं कस्बो से जुडी हुयी है |

दिल्ली भ्रमण करने के लिए यात्रा के साधन

यूँ तो पुरी दिल्ली (Delhi) ही देखने योग्य है लेकिन पुरी दिल्ली देख पाना आसान नही है | अगर पर्यटक पुरी दिल्ली के दर्शनीय स्थल   देखना चाहते है तो नई दिल्ली स्थित सिंधिया हाउस से दिल्ली परिवहन की विशेष बसों द्वारा यात्रा करके सभी दर्शनीय स्थल देख सकते है | इसके अलावा रेलवे स्टेशन के बाहर प्राइवेट बसों वाले भी भ्रमण करा देते है | आम पर्यटक के लिए बेहतर यही होगा , इन्ही विशेष बसों से ही दिल्ली भ्रमण करे अन्यथा टैक्सी या स्कूटर द्वारा घुमने से कई गुना अधिक खर्चा आएगा |

खान-पान एवं खरीददारी की वस्तुए

दिल्ली (Delhi) में ठहरने के लिए सभी प्रकार एक छोटे तथा बड़े होटल एवं लॉज है | रेलवे स्टेशनों तथा बस अड्डे के पास होटलों की भरमार है | दिल्ली (Delhi) से हर चीज खरीदी जा सकती है | यहाँ बड़े बड़े व्यावसायिक केंद्र है | चांदनी चौक , खारी बावली , अजमल खान रोड , सदर बाजार . साउथ एक्सटेंशन रोड , लोधी रोड , कनाट प्लेस , पालिका बाजार तथा विभिन्न सुपर बाजारों से मनचाही खरीददारी की जा सकती है |

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