
एक जमाना था जब किन्नौर (Kinnaur) और लाहौल-स्पीती जैसे जनजातीय क्षेत्र आम सैलानी की पहुच से दूर थे | केवल साधू-महात्मा और साहसी व्यापारी लोग ही अपनी जिन्दगी जोखिम में डालकर यहाँ आया जाया करते थे लेकिन 20वी शताब्दी में पर्यटन जिस गति से बढ़ा उसने इन स्थानों को विश्व के मानचित्र पर ला दिया | अब साधारण पर्यटक भी आसानी से इन पर्यटन स्थलों पर भ्रमण कर सकता है | हालांकि ये दोनों जनजातीय जिले भारी हिमपात की वजह से तकरीबन वर्ष म 6 से 8 महीने तक देश के दुसरे भागो से कटे रहते है लेकिन शेष महीनों में यहाँ खूब पर्यटन होता है |
किन्नौर (Kinnaur) हिमाचल प्रदेश का एक जनजातीय जिला है जिसका क्षेत्रफल 6401 वर्ग किमी और जनसंख्या तकरीबन 65 हजार है | किन्नौर का इतिहास बहुत प्राचीन है | सतलज नदी सम्पूर्ण किन्नौर से बहती हुयी मैदानों में पहुचती है | इस जिले की यात्रा इस नदी के किनारे चल कर की जा सकती है | किन्नौर से भारत का संवेदनशील मार्ग गुजरता है जिसे भारत-तिब्बत मार्ग के नाम से जाना जाता है | जब यह मार्ग नही था तब किन्नौर के मैदानों तक तथा यहाँ से शिपकी दर्रा होते हुए चीन तक पैदल यात्रा हुआ करती थी | प्राचीनकाल में यह पैदलमार्ग पशनीमा उन , सूखे फल और मेवे के व्यापार के लिए प्रयोग होता था | अब इसे राष्ट्रीय उच्च मार्ग 22 के नाम से भी जाना जाता है |
कुछ साल पहले तक किन्नौर पर्यटकों के लिए संवेदनशील होने के कारण सुरक्षा की दृष्टि से प्रतिबंधित था | सिर्फ किन्नौर के निवासी ही परमिट लेकर इधर उधर जा सकते ठे | 13 दिसम्बर 1991 को भारत सरकार ने एक अधिसूचना के तहत हिमाचल प्रदेश सरकार को यह अधिकार दे दिया कि वह विदेशी पर्यटकों को किन्नौर भ्रमण के लिए परमिट जारी कर सकती है | इसके बाद ही किन्नौर में पर्यटन शुरू हो पाया | धीरे धीरे किन्नौर के पर्यटन स्थल विकसित होने लगे | उनमे आवास और जलपान की सुविधाए जुटने लगी और आज प्रदेश सरकार ,पर्यटन विकास निगम एवं पर्यटन विभाग द्वारा अनेक सुविधाए उपलब्ध है |
किन्नौर (Kinnaur) के पर्यटन स्थलों के भ्रमण के लिए शिमला से किन्नौर होते हुए लाहौल स्पीती घूमकर मनाली पहुच सकते है | यही यात्रा आप मनाली से लाहौल स्पीती और किन्नौर होते हुए शिमला तक कट सकते है | शिमला से चलते हुए पहला पर्यटन स्थल कुफरी आता है | यह 14 किमी दूर है | यह स्थान बर्फ के दिनों में स्कीइंग के लिए विख्यात है | कुफरी के बाफ फागु है | यहाँ से हिमाच्छादित पर्वतमालाओ और घाटियों के दृश्य आकर्षित करते है | इसके बाद ठियोग , मतियाना , शिलारु गाँव से होते हुए प्रसिद्ध पर्यटन स्थल नारकंडा पहुचते है |
Pythagoras Biography in Hindi पाईथागोरस (Pythagoras) को महान दार्शनिक और गणितज्ञ माना गया है | इनका जन्म ईसा से भी 500 वर्ष पूर्व यूनान के सामोस नामक टापू में हुआ था | यह मनुष्य जाति का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि प्राचीनकाल में लोग अपने विषय में किसी प्रकार की कोई सुचना लिखित रूप में प्रस्तुत करके नही रखा करते थे अत: उनके विषय में विस्तार से कुछ मिल पाना बड़ा असम्भव सा होता था | यही स्थिति पाईथागोरस की भी है | उस समय लिखने और संचार के साधनों का उतना विकास भी नही हुआ था और न ही शायद छपाई आदि की कोई व्यवस्था उस समय रही थी | पाईथागोरस (Pythagoras) के समय में तो कदाचित भोज-पत्र पर भी लिखने की प्रक्रिया चल पड़ी थी अथवा नही , कहना कठिन है | बाद के लेखको को पूर्ववर्ती पीढियों द्वारा कहा सूनी के आधार पर जो कुछ सूचनाये प्राप्त हो जाया करती थी उनके आधार पर ही उन महान पुरुषो के बारे में कुछ जानकारी मिलने लगी है | पाईथागोरस उस समय उत्पन्न हुए थे जब गणित अपनी आरम्भिक अवस्था में ही था किन्तु अपनी विद्वता के कारण इस महान दार्शनिक ने एक ऐसी प्रमेय का सूत्रपात किया जो विश्वभर में प्राथमिक कक्षाओ में ही व...
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