
होमी जहांगीर भाभा (Homi Jehangir Bhabha) का जन्म मुम्बई में 30 अक्टूबर 1909 को हुआ था | उनके पिता का नाम जहांगीर होरमुस जी भाभा था तथा माता का नाम मेहेरेन | उनका एक समृद्ध औद्योगिक पारसी परिवार था जिनका शिक्षाक्षेत्र और देशसेवा में भी नाम प्रसिद्ध था | भाभा परिवार टाटा परिवार से भी सम्बद्ध था | भाभा ललित कला ,संगीत एवं चित्रकला आदि से भी जुड़े रहे जिनसे उनके व्यक्तित्व में कलात्मक निखार आया |
उनकी प्रांरभिक शिक्षा बम्बई में हुयी | एल्फिन्स्टन कॉलेज तथा रॉयल इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस में पढने के बाद वे कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में मैकेनिकल इंजीनियरिंग पढने गये | वहा अनेक प्रतिष्टित भौतिकशास्त्रियों के सम्पर्क में आने पर उनकी रूचि भौतिकशास्त्र में जागृत हुयी | भौतिकी में (1932) डिग्री पाने के बाद वही वे शोध करने लगे | उनका प्रथम शोधपत्र कॉस्मिक Rays से सम्बन्धित था | इसी विषय पर आगे भी रिसर्च चलती रही डॉक्टरेट प्राप्त की |
तभी 31 वर्ष की उम्र में वे रॉयल सोसाइटी ऑफ़ लन्दन के फेलो चुने गये | 1939 में वे छुट्टी पर भारत आये तभी द्वीतीय विश्वयुद्ध छिड़ गया और वे अपना शोध जारी रखने नही जा सके | तब भौतिकी में रीडर के रूप में इंडियन इंस्टीट्यूट ओद साइंस में वे पढाने लगे | फिजिक्स विशेषत: नुक्लेअर फिजिक्स उनका प्रिय विषय रहा | वे प्रमुख वैज्ञानिक और एक स्वप्नदृष्टा थे | उन्होंने भारत के परमाणु उर्जा कार्यक्रम की कल्पना की तथा कुछ वैज्ञानिकों को साथ लेकर 1944 में नाभिकीय उर्जा पर अनुसन्धान शुरू किया |
टाटा की सहायता से उन्होंने कॉस्मिक रे रिसर्च इंस्टीट्यूट और टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ फंडामेंटल रिसर्च बम्बई में स्थापित किये | यह 1945 में भारत को परमाणु शक्ति बनाने के मिशन में पहला कदम था | यही कारण है उन्हें “भारतीय परमाणु कार्यक्रम” का जनक या पिता कहा जाता है | जब भाभा ने यह कार्य शुरू किया तो उससे पहले यहा न्यूक्लियर फिजिक्स के क्षेत्र में मौलिक कार्य करने की आवश्यक सुविधाए नही थी |
भाभा (Homi Jehangir Bhabha) के प्रयत्नों से बम्बई सरकार से सहायता लेकर एटॉमिक एनर्जी एस्टाब्लिश्मेंट (AEET) 1954 में शुरू किया गया | इसी वर्ष डिपार्टमेंट ऑफ़ एटॉमिक एनर्जी DAE भी स्थापित हुआ | अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई संस्थाओं में भाभा ने भारत का प्रतिनिधित्व किया | परमाणु शक्ति के शांतिपूर्ण प्रयोगों से संबध यूनाइटेड नेशन्स कांफ्रेंस जिनेवा के वे अध्यक्ष बने | 1958 में वे अमेरिकन अकेडमी ऑफ़ आर्ट्स एंड साइंस के विदेशी मानद सदस्य चुने गये |
डा.होमी भाभा (Homi Jehangir Bhabha) ने मिशिगन यूनिवर्सिटी में पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाले नौशेरवा जी सेठना में बहुत सम्भावनाये देखी तथा उन्हें अपने मिशन में शामिल किया | केरल के अलवाए स्थित इंडियन रेयर अर्थ लिमिटेड का प्रमुख सेठना को बनाया जहां उन्होंने मोनोजाईट रेत से दुर्लभ नाभिकीय पदार्थो के अंश निकाले |
1959 में सेठना ट्राम्बे स्थित संस्थान के प्रमुख वैज्ञानिक अधिकारी बने | यहाँ उन्होंने नाभिकीय ग्रेड का युरेनियम तैयार करने के लिए थोरियम संयंत्र का निर्माण करवाया | भाभा एवं सेठना के प्रयासों से प्लुटोनियम पृथक करने का प्रथम संयंत्र का निर्माण सम्भव हो सका | अन्य देशो में परमाणु शक्ति के लिए यूरोनियम पर निर्भरता विद्यमान थी परन्तु थोरियम के विशाल भंडार को देखकर उसे परमाणु शक्ति का आधार बनाने का स्वप्न भाभा की बड़ी विशेषता रही |
डा.भाभा एक कुशल इंजिनियर , समर्पित वास्तुशिल्पी , सतर्क नियोजक एवं निपुण कार्यकारी थे | वे लोक प्रकार की भावना से परिपूर्ण थे | 24 जनबरी 1966 को एक विमान दुर्घटना में उनकी दुखद मृत्यु हुयी | उनके सम्मान में AEET का नाम भाभा एटॉमिक एंड रिसर्च सेण्टर रखा गया |
Pythagoras Biography in Hindi पाईथागोरस (Pythagoras) को महान दार्शनिक और गणितज्ञ माना गया है | इनका जन्म ईसा से भी 500 वर्ष पूर्व यूनान के सामोस नामक टापू में हुआ था | यह मनुष्य जाति का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि प्राचीनकाल में लोग अपने विषय में किसी प्रकार की कोई सुचना लिखित रूप में प्रस्तुत करके नही रखा करते थे अत: उनके विषय में विस्तार से कुछ मिल पाना बड़ा असम्भव सा होता था | यही स्थिति पाईथागोरस की भी है | उस समय लिखने और संचार के साधनों का उतना विकास भी नही हुआ था और न ही शायद छपाई आदि की कोई व्यवस्था उस समय रही थी | पाईथागोरस (Pythagoras) के समय में तो कदाचित भोज-पत्र पर भी लिखने की प्रक्रिया चल पड़ी थी अथवा नही , कहना कठिन है | बाद के लेखको को पूर्ववर्ती पीढियों द्वारा कहा सूनी के आधार पर जो कुछ सूचनाये प्राप्त हो जाया करती थी उनके आधार पर ही उन महान पुरुषो के बारे में कुछ जानकारी मिलने लगी है | पाईथागोरस उस समय उत्पन्न हुए थे जब गणित अपनी आरम्भिक अवस्था में ही था किन्तु अपनी विद्वता के कारण इस महान दार्शनिक ने एक ऐसी प्रमेय का सूत्रपात किया जो विश्वभर में प्राथमिक कक्षाओ में ही व...
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