
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से मैसूर (Mysore) के लिए मीटर गेज चलती थी अब ब्रॉड गेज में बदल दी गयी है | मैसूर क्षेत्र (Mysore) की हरी-भरी धरती धान के लहराते खेत और झूमते नारिकेल वृक्ष अद्भुद दृश्य प्रस्तुत करते है | मैसूर 2500 फुट की ऊँचाई पर स्थित है | यहाँ आज भी मौसम सुकून देने वाला है | पूरा शहर राजमहल को केंद्र में रखकर बसाया गया है | सुंदर पार्क , सडको के दोनों और छायादार पेड़ो की कतारे , मुस्कुराहट बिखेरते नर-नारी मैसूर की विशेषता है |
काष्ट ,हाथी दांत , चन्दन को तराशने और आकार देने की कला मैसूर में यथावत बनी हुयी है | बड़ी बात यह है कि उस कला को जीवन सापेक्ष बनाने का क्रम जारी है | मैसूर आर्ट गैलरी में जीवंत वस्तुए देखने को मिलती है | चित्रों में रंगो का समायोजन और उसी में रंगो के बीच चित्रों को मात देने वाली कल्पना कामिनी मिल जाए तो कैसा लगे ? आर्ट गैलरी ऐसा ही अनुभूतियो से भरी मिलती है | इस आर्ट गैलरी में शाही परिवार की चित्रकारी , फर्नीचर , वाध्य यंत्र , मुर्तिया , प्रेक्षागृह आदि है |
चामुन्डी मन्दिर
चामुंडी देवी राजा की कुल देवी के रूप में पूजित है | चामुन्डी का मुख्य मन्दिर चामुन्डी पहाड़ है | यह पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है |
श्रीरंगपट्टम
मैसूर (Mysore) के समीप है श्रीरंगपट्टम जो कावेरी के द्वारा तीन तरफ से संरक्षित है | भगवान श्रीरंगनाथ की विशाल लेटी हुयी प्रतिमा ऊँची किस्म की मूर्तिकला का परिचय देती है | टीपू सुल्तान भी श्रीरंगपट्टम में दर्शनार्थ आता था तथा मन्दिरों के रखरखाव का पूरा ध्यान रखता था | मन्दिर के पास ही कावेरी तट के साथ लगा यह प्रसिद्ध किला है | कहा जाता है कि जिस कोठरी में टीपू ने अंग्रेजो को बंदी बनाकर रखा था , इस कोठरी में हवा के लिए खिड़की या गवाक्ष नही थे | अंग्रेज सिपाही भूख-प्यास से मर गये किन्तु उदारमना टीपू ने ऐसा किया होगा विवादास्पद ही लगता है |
मैसूर (Mysore) दक्षिण के पर्यटनरूपी माला का मुख्य मणि है | यहाँ लम्बे चौड़े बाजार है जहां मैसूर सिल्क की साड़िया हर दूकान पर देखी जा सकती है | कावेरी एम्पोरियम में भी सिल्क साडिया , अगरबत्तिया , चन्दन की चीजे ,हाथी दांत से बनी चीजे खरीदते देशी-विदेशी पर्यटक कही भी देखे जा सकते है | यह सब भी पर्यटन केंद्र के रूप में मैसूर का आह्लादकारी पक्ष है |
मैसूर पैलेस
मैसूर (Mysore) का राजमहल एक प्रमुख दर्शनीय स्थान है | इस महल का निर्माण 1907 में हुआ था | महल के नक्काशीदार दरवाजे , भव्य सजावटी कक्ष तथा महाराज का म्यूजियम देखते ही बनते है | पयर्टको के दल के दल पैलेस देखने पहुचते है | दशहरे पर तो इसकी सजावट देखते ही बनती है | स्वर्ण सिंहासन तथा सुसज्जित राज प्रासाद | मैसूर का दशहरा तो प्रसिद्ध है किन्तु राजमहल का आकर्षण तो हर समय बना रहता है |
पहले राजमहल केवल दशहरे पर ही पर्यटकों के लिए खोला जाता था | अब हर रविवार को यह दर्शनार्थियों के लिए खुलता है | रात में राजमहल रोशनी में नहा उठता है | दर्शक ठगा सा रह जाता है | मैसूर गये और वृन्दावन गार्डन न देखा तो क्या देखा ? वृन्दावन गार्डन कृष्ण सागर बाँध का पानी कावेरी की धारा में पहुचे उससे पहले और करिश्मे कर दिखाता है | अनगिनत रंगीन फव्वारे , सीढी से उतरता रंग-बिरंगा दिखता पानी और बेशुमार मुस्कुराते फुल वृन्दावन गार्डन को स्वर्गीय कहलाने की गरिमा देता है | मैसूर का सुख आँख में बस जाता है |
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