
रामेश्वरम (Rameshwaram) भारतीय उपमहाद्वीप के दक्षिण-पूर्वी समुद्र तट पर पाक जलडमरू मध्य के द्वीप पर स्थित है | मुख्य भूमि से रामेश्वरम केवल रेलमार्ग से जुड़ा हुआ था | मुख्य भूमि के अंतिम स्टेशन मंडपम तक रेलमार्ग था | बस ,टैक्सी से आने वाले यहाँ से रामेश्वरम रेल से ही आते जाते थे | अब मुख्य भूमि और द्वीप के बीच पुल बन जाने से रामेश्वरम सीधा सड़क मार्ग से भी जुड़ गया है |
ऐसा विश्वास है कि लंका पर चढाई करने के लिए श्रीराम ने यहाँ धनुष्कोटी नामक स्थान पर समुद्र पर वास्तुविद नल-नील की सहायता से एक पुल का निर्माण किया था जिसे सेतुबंध रामेश्वर कहा जाता है | इस स्थान से श्रीलंका की दूरी मात्र 70 किमी है | यहाँ रामनाथ स्वामी मन्दिर हिन्दुओ का पवित्र स्थान है | यह मन्दिर उस जगह बना हुआ है जहां श्रीराम ने रावण का वध करने के बाद शिवजी की पूजा की थी |
शिल्प की दृष्टि से रामेश्वर मन्दिर सर्वोत्तम श्रेणी का माना जाता है | पौराणिक कथा के अनुसार भगवान श्रीराम ने रावण की हत्या के पाप से मुक्ति के लिए शिव की पूजा करने का संकल्प किया | इस हेतु उन्होंने बालू कस शिवलिंग बनाया था | इसे आजकल श्रीरामलिंगम कहा जाता है | श्रीरामनाथ स्वामी का निर्माण बारहवी शताब्दी में आरम्भ हुआ था | बारहवी शताब्दी मही श्रीलंका नरेश दराक्रय बाहू ने श्रीरामलिंगम के शिवलिंग और अम्बाल मन्दिरों का निर्माण करवाया था |
रामेश्वर मन्दिर का निर्माण 17वी शताब्दी में हुआ | इस मन्दिर के दक्षिण में पर्वतवर्धिनी (पार्वती) और इसके पास ही सेतुमाधव (विष्णु) का मन्दिर है | इसके पास ही हनुमदीश्वर मन्दिर है जिससे हनुमान द्वारा कैलाश पर्वत से लाई गयी शिवमूर्ति स्थापित है | इस काशी विश्वनाथ के नामा से जाना जाता है | यह मन्दिर 1000 फुट लम्बा और 600 फुट चौड़ा है | इसके चारो ओर 4000 फुट लम्बा बरामदा है | गोरुपम 38 मीटर उंचा है |
रामेश्वरम (Rameshwaram) भारत के चार धामों में से एक है | यह द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से भी एक है | रामेश्वरम में 24 तीर्थ है | इन्ही में से एक अग्नितीर्थम “सागर” है | माना जाता है कि सीता जी ने श्रीलंका से लौटने पर यही अग्नि-परीक्षा दी थी और उसके बाद अग्नितीर्थम कुंड में स्नान करने से बड़ी शान्ति का अनुभव होता है इस कुंड में स्नान करने के बाद लोग समुद्र तट पर रेत का शिवलिंग बनाते है पूजा करते है और इसे समुद्र में प्रवाहित कर देते है | इसके साथ ही यहाँ दो सरोवर , दो बावली और 19 कूप भी है जिनका धार्मिक दृष्टि से बड़ा महत्व है |
रामेश्वरम : हिंदी की गूंज
रामेश्वरम स्टेशन पर उतरते ही सुनाई पड़ता है “गेइड होना क्या महाराज” | यदि समय कम है तो गाइड की सहायता जरुर लेनी चाहिए | अन्यथा यहाँ वहां पूछकर रामेश्वरम दर्शनम की अभिलाषा पुरी की जा सकती है | गाइड महोदय आपके लिए दुभाषिये का काम भी करते है | आपकी सुविधा का भी ध्यान रखते है | होटल , गेस्ट हाउस , लॉज पर्यटक की प्रतीक्षा करते मिलेंगे | रेलवे रिटायरिंग रम , धर्मशालाये भी ठहरने के सुविधाजनक स्थान है |
रामेश्वरम (Rameshwaram) एक स्थान से दुसरे स्थान तक आने जाने के लिए सिटी बस से लेकर ऑटो टैक्सी उपलब्ध है | खिली हुयी चमकीली धुप , दूर दूर तक फैले रेतीले सागर तट , अथाह नीला सागर जल , सीपिया , शंख ,टापू और प्रकृति पद्दत अनेक मनोरम दृश्यों को संजोये रामेश्वरम शताब्दियों से देशी-विदेशी पर्यटकों और तीर्थयात्रीयो के आकर्षण का केंद्र रहा है | रामेश्वरम में काफी कुछ देखने के लिए है | राम झरोखा , राम कुंड , लक्ष्मण कुंड , शंकराचार्य मठ , भैरव तीर्थ और मन्दिरों की श्रुंखला के अलावा कतिपय अन्य दर्शनीय स्थान पर्यटन के केंद्र बिंदु है |
प्रवास शैलमाला
रामेश्वरम (Rameshwaram) के आसपास फ़ैली मुंगे की चट्टानों और टापूओ का अपना अलग ही आकर्षण है | ये प्रवाल शैलमालाये विश्व की सुंदरतम प्रवाल शैलमालाओ में से है | यह एक अच्छा पिकनिक स्थल भी है | खजूर , ताड़ आदि के लम्बे लम्बे वृक्षों से परिपूर्ण इन टापुओ की सुषमा देखते ही बनती है |
गंधमादन पर्वत
रामेश्वरम (Rameshwaram), जल डमरूमध्य के उत्तर में स्तिथ यह पर्वत यहाँ का सर्वोच्च शिखर है | यहाँ से सम्पूर्ण नगर का नजारा अत्यंत आकर्षक लगता है | पौराणिक कथाओं के अनुसार सूर्यवंशी राजा पुरुरवा ने उर्वशी के साथ इसी पर्वत पर विहार किया था | रामेश्वरम का सूर्योदय देखने की लालसा बहुत कम पुरी होती है | रामेश्वरम का समुद्र स्नान सुबह होता है | थोडा तैरने जानने वालों के लिए बी सुविधाजनक हहै यहाँ का समुद्र | ऊँची लहरों का भी डर नही है | समुद्र स्नान के बाद बाईस कुण्ड के जल से नहाने के लिए एक लम्बी परिक्रमा पर जाना भी एक प्रिय कार्य है |
रामेश्वरम गये और आपने शंख नही खरीदे तो क्या किया ? शंख खरीदना और उन पर थोड़ी बहुत चित्रकारी करवान और नाम लिखवाना भे एक कार्य है | शंखो की मालाये खरीदना भी अच्छा लगता है और इन सब चीजो को रखने के लिए ताड़पत्रों से बनी टोकरी भी खरीदना अनिवार्य नही हो तो आवश्यक अवश्य है | पहले ताड़पत्रों से बनी टोकरियो का प्रचलन था | अब हर जगह प्लास्टिक की माया है | रामेश्वरम से जब लौटते है तो हर एक के पास एक एक टोकरी अवश्य होती है | यही सम्भवत: रामेश्वरम यात्रा की पहचान है |
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