
राव जोधाजी के सुपुत्र बीकाजी द्वारा स्थापित बीकानेर (Bikaner )ने इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है | यहाँ के किले मन्दिर तथा लालगढ़ महल विशेष रूप से देखने योग्य है | इस शहर के मध्य में स्थित लक्ष्मीनारायण मन्दिर देश भर में प्रसिद्ध है | अन्य मन्दिरों में रतनबिहारी जी एवं शिव को समर्पित शिवबाड़ी में मन्दिर भक्तो को आकर्षित करते है | बीकानेर (Bikaner) से 30 किमी दूरी पर कोलायत जी नामक धार्मिक स्थल है जो पुष्कर के नमूने पर बना है और अपने धुनीनाथ के मन्दिर तथा कपिलमुनि आश्रम के कारण विख्यात है |
बीकानेर (Bikaner) से 20 मील दूर देशनोक में स्थित करणी माता का मन्दिर सम्भवत: संसार में अपने ढंग का अनोखा मन्दिर है | इस मन्दिर में हजारो चूहे बिना किसी भय के विचरण करते है | देखा जाए तो यह चमत्कार ही है कि इस मन्दिर में चूहों की इतनी संख्या होने के बावजूद भी यहाँ आज तक कोई महामारी नही फ़ैली | इस मन्दिर का निर्माण बीकानेर के शासको ने अपनी कुलदेवी करणी माता के आशीर्वाद से किया |
राजस्थान में उत्तर में बसा बीकानेर (Bikaner) रेगिस्तान का शहर है | इस जोधा सिंह के पुत्र राव बीकाजी ने बसाया था | प्राचीन समय में यह शहर व्यापार का मुख्य केंद्र था जो अफ्रीका तथा पश्चिमी एशिया से निकलने वाले कारवा के मार्ग में पड़ता था | बीकानेर का पुराना नाम जंगल देश था | यहाँ गुर्जर , प्रतिहारो , चौहानों तथा जैसलमेर की भट्टी जातियाँ निवास करती है | लाल और पीले रंग के बालुई पत्थरों से निर्मित इस शहर की अनेक इमारते राजस्थानी वास्तुकला तथा शिल्पकला की समृधि का प्रतीक है | बीकानेर ऊँटो के सफर के लिए विश्व प्रसिद्ध है | देश-विदेश के सैलानी यहाँ दूर-दूर से ऊँटो की सवारी का आनन्द लेने आते है |
बीकानेर के प्रमुख दर्शनीय स्थल
लालगढ़ महल – यह किला राजा गंगासिंह द्वारा बनवाया गया था | यहाँ जंगल जीवन के अनेक दुर्लभ फोटो , ट्रोफी तथा अन्य संग्रहनीय वस्तुए देखने को मिलती है | इसका कुछ हिस्सा होटल के रूप में परिवर्तित हो चूका है |
जूनागढ़ किला – यह किला सम्राट अकबर के बहादुर सेनापति राजा राजसिंह द्वारा सन 1588 से 1593 की अवधि में बनवाया गया था | यह किला अपनी विशालता के लिए प्रसिद्ध है | 986 मीटर लम्बी किले की दीवारे 37 बुर्ज तथा दो प्रवेश द्वारा सूरज पोल तथा सन गेट से युक्त इस किले के दामन में अनेक खुबसुरत महलो में समेटे है जिनमे चन्द्रमहल तथा फुलमहल प्रमुख है इसके अतिरिक्त इस किले में अनूपमहल ,धरनमहल , बीजनमहल , डूंगर निवास , गंगा निवास और रंगमहल भी दर्शनीय है |
गंगा गोल्डन जुबली म्यूजियम – टूरिस्ट बंगले के निकट स्थित इस म्यूजियम में हडप्पा संस्कृति से पूर्व गुप्तकाल तथा कुषाण काल की अनेक कलाकृतिया का संग्रह देखने को मिलता है जिसमे प्राचीन युद्ध के शस्त्र ,बर्तन तथा दुर्लभ सिक्के इत्यादि भी है |
गार्डन एवं पार्क – यहाँ खुबसुरत बाग़-बगीचे तथा घुमने के पार्क है जिनेम गंगा निवास पार्क ,रत्न निवास पार्क , भवन पैलेस पार्क तथा नीला जी पार्क प्रमुख है | गंगा निवास पार्क में एक छोटा चिड़ियाघर भी है |
भांडासर जैन मन्दिर – बीकानेर शहर में लक्ष्मीनाथ जी के मन्दिर के पास यह स्थित है | इसका निर्माण कार्य विक्रम संवत 1521 को आरम्भ हुआ और 1571 में पूर्ण हुआ | इस मन्दिर का निर्माण भांडाशाह नाम के एक जैन ने करवाया था इसलिए इसे भांडासर जैन मन्दिर कहते है | बीकानेर के मन्दिरों में यह सबसे प्राचीन है | यह जैन समुदाय के 23वे तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ जी को समर्पित है | इसकी नक्काशीदार खुदाई पर्यटकों का मन मोह लेती है |
नागणेची का मन्दिर – बीकानेर शहर से 3-4 किमी दक्षिण-पूर्व में नागनेचजी माता का मन्दिर स्थित है | पहले इस मन्दिर के चारो ओर जंगल हुआ करता था लेकिन आज शहर यहाँ तक बधा चला जा रहा है | इस मन्दिर में महिषासुर मर्दिनी देवी की 18 भुजाओं वाली सुंदर मूर्ति है | इस मूर्ति की स्थापना के विषय में इतिहासकार एक मत नही है | इस मन्दिर परिसर में प्रवेश करते ही शिवजी का मन्दिर है | पास ही में माताजी का मन्दिर है | ये मन्दिर काफी ऊँचाई पर बना हुआ है | मन्दिर के चारो ओर बुर्ज बने हुए है | नवरात्रि के दिनों में यहाँ श्रुधालुओ की भीड़ पडती है |
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