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दमन एवं दीव का इतिहास एवं पर्यटन स्थल | Daman and Diu Facts in Hindi

दमन एवं दीव का इतिहास एवं पर्यटन स्थल | Daman and Diu Facts in Hindi
दमन एवं दीव का इतिहास एवं पर्यटन स्थल | Daman and Diu Facts in Hindi

प्रकृति प्रेमियों के मध्य स्वर्ग के समान विख्यात केंद्रशासित प्रदेश दमन और दीव (Daman and Diu) अरब सागर के तट पर स्थित है | पुरे भारत में यह दमन नाम से विख्यात है परन्तु स्थानीय नाम दमण है | 1987 में गोवा.दमन एवं दीव में गोवा को अलग कर उसे पूर्ण राज्य घोषित कर दिया गया जबकि दमन एवं दीव को केंद्रशासित प्रदेश रहने दिया | 1961 में पुर्तगालियो के कब्जे से मुक्त होने के बाद 1987 तक ये तीनो क्षेत्र एक राजनैतिक इकाई के अंतर्गत आते थे | दीव काठियावाड़ प्रायद्वीप के दक्षिणी सिरे पर छोटा सा द्वीप है | दमन गुजरात समुद्र तट पर है | कुल 72 वर्ग किमी में फैला दमन का भू-भाग गुजरात प्रदेश से घिरा है

दमन एवं दीव का इतिहास

दुसरी शताब्दी ईसा पूर्व में से 13वी शताब्दी तक दमन (Daman and Diu) भारत का अभिन्न अंग रहा है | इतिहासकारों एक अनुसार दमन मौर्य सम्राट अशोक के साम्राज्य का अंग था | पुर्तगाली 1522 से निरंतर दमन पर अधिकार बनाने में प्रयासरत थे | अनेक आक्रमणों के बाद पुर्तगालियो ने 1534 मे दीव पर उसके पश्चात 1559 में दमन पर अधिकार कर लिया | भौगौलिक रूप से गोवा , दमन एवं दीव एक दुसरे से सैकड़ो किमी की दूरी पर स्थित है परन्तु इन सभी जगहों पर पुर्तगाली प्रभाव समान रूप से परिलक्षित होता है |

दमन एवं दीव की भौगोलिक स्थिति

वर्तमान में दमन नगर दो हिस्सों में बंटा हुआ है मोटी दमन एवं नानी दमन | दमन गंगा मोटी दमन और नानी दमन को दो भागो में विभाजित करती है | स्थानीय भाषा में मोटी का अर्थ है बड़ा और नानी का अर्थ है छोटा | नानी दमन आधुनिक आबादी वाला है और मोटी दमन पुर्तगालियो के द्वारा बसाया गया पुराना शहर | दमन गंगा के दक्षिणी किनारे पर पुर्तगालियो द्वारा निर्मित अजेय किले वाली पुर्तगाली बस्ती को मोटी दमन के नाम से जाना जाता है | पुर्तगालियो के कब्जे से पूर्व यह भाग अवसीनियन शासक के कब्जे में था

दमन एवं दीव के दर्शनीय स्थल

दुर्जेय किला – 1559 में पुर्तगाली कब्जे के बाद दमन गंगा के दक्षिणी गंगा के दक्षिणी तट पर किले का निर्माण प्रारम्भ किया गया जो 16वी शताब्दी के अंत में पूरा हुआ | दुर्जेय किला 30,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला हुआ है इसमें दो प्रवेश द्वार तथा 9 बुर्ज है | यह किला बहुकोणीय है और हर कोणीय भाग में 500 फुट के अंतर पर कोण युक्त बुर्जे है | किले की दीवार ढालयुक्त एवं सादी हाउ उपर कंगूरे नही है परन्तु सुरक्षा के लिए छिद्र बनाये गये है | किले के भीतर कई स्थानों पर दीवार की उंचाई के बराबर चबूतरे बने है | सुरक्षाकर्मियों के बैरक भी बने हुए है | किले के तीन ओर नदी तथा समुद्र है | किले तक नदी को पार कर ही पहुचा जा सकता है | किले के दक्षिणी द्वार के शीर्ष पर खुदे अभिलेख के अनुसार इस द्वार का निर्माण अकबर के शासन में दमन पर आक्रमण के पश्चात 1581 ई. में हुआ था |
वामजीसीस गिरिजाघर – किले के भीतर स्थित इस गिरीजाघर का निर्माण 1603 ई. पुर्तगाली शासन के आरम्भिक काल में हुआ था | इसका प्रवेश द्वार भव्य है | गिरिजाघर को अलंकृत करने में काष्ट शिल्प का बहुतायत से प्रयोग किया गया है | उत्कीर्ण वेदिका में छ: प्रमुख संतो की प्रतिमाये है |
अवर लेडी ऑफ़ रोज गिरिजाघर – इस चर्च का निर्माण 17वी शताब्दी में किया गया था | इसका बाहरी भाग सादगी पूर्ण है | इस चर्च का भीतरी भाग स्वर्णकाम से अलंकृत है | अर्धवृत कक्ष के दोनों और इसाई संतो की कहानिया चित्रित है | छत बहुरंगी गुलाब दल पर स्वर्णिम शिशु देवदूतो से अलंकृत है | प्रवेश द्वार के निकट ही एक वुढ़द शिला खंड पर खतरे के निशान उत्कीर्ण है | स्थानीय लोगो के अनुसार इस स्थान पर चर्च में प्रेत-आत्मा को दफन कर दिया गया था |
अवर लेडी ऑफ़ रिमेडियास चर्च – किले के दक्षिणी द्वार से लगभग आधा किमी की दूरी पर अवर लेडी ऑफ़ रिमेदियस चर्च है | इस चर्च का निर्माण 1607 ई. में दमन किले के राज्यपाल एवं कैप्टन रुधि मेलो दी स्म्पैने द्वारा कराया गया था | दमन स्थित तीनो गिरिजाघरो की स्थापत्य कला पर पुर्तगाली प्रभाव स्पष्ट दिखाई पड़ता है | तीनो गिरिजाघरो में भीतर अलंकरण भी लगभग एक जैसे है |
संत जेराम का किला – दमण गंगा के उत्तरी किनारे पर नानी दमण से मोटी दमन को जोड़ने वाले दाए तरफ संत जेराम का किला है | यह किला मोटी दमण किले के अपेक्षाकृत छोटा है | इस किले का निर्माण 1614 ई. में भारत स्थित पुर्तगाल के 20वे वायसरॉय डामजेरेनिग्रे द एज बड़ी द्वारा मुगलों के आक्रमण से सुरक्षा के लिए कराया था | संत जेराम के ना पर इस किले का नाम जेराम फोर्ट रखा गया | ऊंची प्रखर दीवारों से निर्मित यह किला 12250 वर्ग मीटर में बना है | इसमें दो प्रवेश द्वार तथा तीन बुर्ज है | किले के भीतर अवर लेडी ऑफ़ सी चर्च , एक कब्रिस्तान और आधुनिक स्कूल भवन है
देवका समुद्र तट – देवका समुद्र तट नानी दमण में है | यहाँ पर चट्टाने है | समुद्र का पानी अधिकाशत: ज्वार-भाटे के समय ही आता है | समुद्रतट हरियाली से परिपूर्ण है | समुद्रतट के निकट सुंदर उद्यान है तथा अनेक होटल एवं रेस्तरां है |
जामपुर समुद्र तट – जामपुर समुद्र तट भी मोटी दमन में है | जामपुर समुद्रतट पहुचने का मार्ग मोटी दमण से होकर गुजरता है | शहर से होकर गुजरने से लगता है कि पुर्तगाली बस्ती में आ गये परन्तु जामपुर गाँव में पहुचने पर लगता है कि किसी भारतीय गाँव में आ गये | जामपुर गाँव के निकट ही जामपुर समुद्रतट है | इस गाँव के नाम पर ही इसका नामकरण हुआ है | यह समुद्रतट रेतीला है परन्तु यहाँ भी समुद्र का पानी सदैव नही रहता | दूर तक समतल मैदान दिखाई पड़ता है और दूर समुद्र तट से उठने वाली लहरों की मधुर आवाज सुनाई पडती है |

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