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देवभूमि द्वारका के दर्शनीय स्थल | Dwarka Tour Guide in Hindi

देवभूमि द्वारका के दर्शनीय स्थल | Dwarka Tour Guide in Hindi
देवभूमि द्वारका के दर्शनीय स्थल | Dwarka Tour Guide in Hindi

अरब सागर के तट पर स्थित द्वारका नगरी (Dwarka) हिन्दुओ के प्रमुख पवित्र स्थलों में से एक है | इस नगर का उल्लेख पौराणिक महाकाव्य महाभारत , स्कन्द तथा विष्णु पुराणों में मिलता है | प्राचीनकाल में यह नगर “द्वारावती” नाम से जाना जाता था | ऐसा कहा जाता है कि कृष्ण द्वारा कंस वध के पश्चात जरासंध ने कृष्ण से प्रतिशोध लेने के लिए 17 बार युद्ध किया , पर वह अपने प्रयासों में निष्फल रहा परन्तु जब जरासंध ने 18वी बार मथुरा पर आक्रमण किया तो कृष्ण अपने सहयोगी यादवो के साथ द्वारका चले आये |
इसके अतिरिक्त आदि गुरु शंकराचार्य भी 8वी शताब्दी में सनातन धर्म के प्रचार के लिए यहाँ आये थे | उन्होंने यहाँ द्वारकापीठ की स्थापना की तब से द्वारका भारत के चार धामों में से एक है | द्वारका (Dwarka )का सौन्दर्य जन्माष्टमी समारोह के दौरान चरम उत्कर्ष पर होता है | यहाँ से खुले एवं विशाल सागर का अवलोकन किया जा सकता है |आइये अब आपको द्वारका (Dwarka) के प्रमुख दर्शनीय स्थलों के बारे में बताते है |

द्वारका के दर्शनीय स्थल

द्वारकाधीश मन्दिर – द्वारका से 2 किमी दूर यह प्रसिद्ध मन्दिर स्थित है | 1400 वर्ष प्राचीन यह मन्दिर जगमन्दिर के नाम से भी जाना जाता है | 5 मंजिला इस भव्य मन्दिर पर सूक्ष्म नक्काशी की गयी है | मन्दिर में स्थित हरिगृह शिल्पगत की दृष्टि से बेजोड़ है | ऐसी मान्यता है कि हरि गृह का निर्माण श्रीकृष्ण के पौत्र ब्रजनाथ ने करवाया था | यह विशाल मन्दिर तीन भागो में विभाजित है सभागृह , शिखर मन्दिर ,निज मन्दिर | इनमे शिखर मन्दिर सबसे आकर्षक है | यह मन्दिर सुबह 6 बजे से दोपहर 12:30 बजे तथा सांय 5 बजे से रात्रि 9 बजे तक खुला रहता है |
भदकेश्वर मन्दिर – द्वारका से 3.5 किमी दूर यह मन्दिर समुद्र तट पर स्थित है | 800 वर्ष पुराना मन्दिर भगवान शिव को अर्पित है | वर्षभर यहाँ श्रुधालुओ का ताँता लगा रहता है | यहाँ से अरब सागर में हिलोरे लेती लहरों का मनमोहक दृश्य देखा जा सकता है |
शंकराचार्य मठ – आदि शंकराचार्य द्वारा इस मठ की स्थापना 8वी सदी में की गयी | यह मठ हिन्दुओ के 4 धामों में से एक है | इस मठ के साथ स्थित सावित्री देवी , मन्दिर , सिद्धनाथ मन्दिर एवं भद्रकाली मन्दिर अन्य मुख्य आकर्षण है |
रुक्मिणी मन्दिर – यह मन्दिर श्रीकृष्ण की पटरानी रुक्मिणी को समर्पित है | यह मन्दिर 1600 वर्ष पुराना है | द्वारका से 4 किमी दूर स्थित यह मन्दिर स्थापत्य कला का अनुपम उदाहरण है |
वेद भवन – द्वारका से लगभग आधा किमी दूर यह वैदिक संस्थान स्थित है | संस्थान के समीप स्थित समुद्र तट की चमचमाती रेत पर्यटकों को आकर्षित करती है |

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