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ओरछा के प्रमुख पर्यटन स्थल | Orchha Tour Guide in Hindi

ओरछा के प्रमुख पर्यटन स्थल | Orchha Tour Guide in Hindi
ओरछा के प्रमुख पर्यटन स्थल | Orchha Tour Guide in Hindi

भारत के हृदय स्थल मध्यप्रदेश के टीकमगढ जिले के निवाड़ी तहसील में स्थित ओरछा (Orchha) साहित्य , कला , संस्कृति और पूरावैभव का अनूठा संगम है | इतिहास में ओरछा (Orchha) का नाम सर्वप्रथम 1531 ई. में तब लिखा गया जब बुंदेला राजा रूद्रप्रताप ने गढ़ कुंठार से अपनी राजधानी स्थानातरित कर ओरछा को नई राजधानी बनाया | इसके पश्चात इतिहास के बदलते हुए घटनाक्रम के साथ साथ ओरछा भी विभिन्न क्षेत्रो में उन्नति के मार्ग पर अग्रसर होता गया लेकिन आज गुजरे युगों की एक शानदार विरासत ओरछा की भव्यता महज पत्थरों में सिमट कर रह गयी है |
बेतवा नदी के किनारे बसे ओरछा (Orchha) के संस्थापक राजा रूद्रप्रताप के उत्तराधिकारीयो में सर्वाधिक प्रतिष्टित राजा वीरसिंह देव थे जिन्होंने कलात्मक जहांगीर महल का निर्माण करवाया | इस तीन मंजिला महल के उपर भव्य छतरियो का निर्माण है | इतिहास में झांके तो दिखेगा कि ओरछा 1738 ई. तक एक शक्तिशाली राज्य की राजधानी रहा | राजा वीरसिंह देव ने ओरछा (Orchha )से 1605 ई. तक राज्य किया और झांसी के किले का निर्माण कराया | मुगल शहजादे सलीम के कृपापात्र राजा वीरसिंह देव की अकबर के साथ शत्रुता हो गयी और वे बादशाह के गुस्से से 1601 ई. में बाल बाल बचे |
उनका सारा राज्य अकबर की फौजों द्वारा तहस नहस कर दिया गया | उसके बाद अगले 22 वर्षो तक राजा वीरसिंह एक शक्तिशाली शासक थे | 1627 ई. में जब शाहजहाँ बादशाह बने तो वीरसिंह ने एक बार फिर स्वयं को बादशाह के अप्रिय के तौर पर पाया | उनके विद्रोह का प्रयास 13 वर्षीय औरंगजेब द्वारा विफल कर दिया गया | ओरछा का सर्वोतम काल 17वी शताब्दी की पहली अर्ध शती थी जब जहांगीर 1606 ई. में शहर आये थे | उन्ही के लिए बाद में जहांगीर महल बनवाया गया था | बाद में शाहजहाँ और औरंगजेब दोनों ने शहर पर हमले किये | इस क्षेत्र के चारो ओर मन्दिर ओर और स्मारक फैले हुए है | इन सबका अपना अपना यादगार इतिहास है और प्रत्येक भवन ओरछा के अतीत को अद्भुत सौन्दर्य प्रदान करता हुआ प्रतीत होता है |

ओरछा के दर्शनीय स्थल

जहाँगीर महल – सम्राट जहांगीर की ओरछा यात्रा की यादगार को हमेशा ताजा रखने के लिए इसका निर्माण राजा वीरसिंह देव द्वारा 17वी शताब्दी में करवाया गया था | यह एक प्रभावशाली आकारवाला तीन मंजिला महल है जिसमे कुल 136 कक्ष है | तलघर में 100 कक्ष है | महल के चारो कोनो पर बुर्ज बने हुए है | महल का मुख्य प्रवेश द्वार पूर्व दिशा की ओर है और इसकी साज-सज्जा में हिन्दू और मुस्लिम दोनों शैलियों का प्रयोग हुआ है |
राजमहल – इस महल का निर्माण मधुकर शाह द्वारा करवाया गया था | ओरछा स्थित स्मारकों में सबसे पहले राजमहल का निर्माण हुआ था | यह वर्गाकार बनावट में बना है | महल में 12 कोणीय स्तम्भों पर आधारित महल है जिसे सम्भवत: दरबार-ए-ख़ास के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा होगा | वास्तुशिल्प के दृष्टिकोण से राजमहल अद्वितीय है |
रामराजा मन्दिर – यह भवन महल से मन्दिर में परिवर्तित हुआ है जिसके पीछे एक मनोहारी किंवदती है | एक बार स्वप्न में भगवान राम के दर्शन के बाद मधुकर शाह अयोध्यापति श्रीराम की मूर्ति अपनी राजधानी लेकर आये | इस मूर्ति को मन्दिर में स्थापित करने से पहले एक महल में रखा गया | जब मूर्ति को वहां से हटाने की कोशिस की गयी तो हटी नही तो राजा को काफी देर में देवता का यह उद्घोष याद आया कि मूर्ति महल में ही रहेगी जहां इसे पहले स्थापित किया गया था | आज ऊँचे शिखरों और भव्य वास्तुशिल्प के लिए प्रसिद्ध यह मन्दिर भारत के अद्वितीय मन्दिरों में से एक है जहां भगवान राम की पूजा एक राजा के रूप में होती है |
श्री चतुर्भुज मन्दिर – यह मन्दिर सैलानियों को सर्वाधिक आकर्षित करता है | पत्थर के एक ऊँचे चबूतरे पर एक वर्ष की अवधि में बना यह अत्यंत विशाल एवं भव्य मन्दिर अयोध्या से लाई गयी भगवान राम की मूर्ति स्थापित करने के लिए निर्मित किया गया था जो राजा राम मन्दिर में स्थापित हो गयी | ओरछा स्थित मन्दिरों में इसका शिखर सबसे ऊँचा है | इस स्थल के अतीत का चित्रम हं इस मन्दिर में देख सकते है | किसी सुदृढ़ दुर्ग के समान दिखाई देने वाले इस मन्दिर तक पहुचने के लिए सीढ़िया है |
लक्ष्मीनारायण मन्दिर – राजा वीरसिंह देव द्वारा निर्मित यह मन्दिर राजाराम मन्दिर से एक किमी दूर है | पहाडी पर बना होने के कारण यह दूर से दिखाई देता है | मन्दिर के सामने के गलियारे में सन 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्रामा से संबधित रानी लक्ष्मीबाई एवं अंग्रेजी सेना के मध्य हुए युद्ध के दृश्य है |
छतरियाँ – ओरछा के राजाओं की याद में 14 छतरियाँ समूह के रूप में बेतवा नदी के कंचन घाट के पास स्थित है | इसके अलावा ओरछा में राय प्रवीण महल , फुलबाग़ , सुंदर महल , हरदौल का महल , शहीद स्मारक , सिद्धबाबा का स्थान , जुगल किशोर मन्दिर , जानकी मन्दिर , हनुमान मन्दिर , रघुवंश मणि मन्दिर , कल्याण सुंदर मन्दिर , शिव मन्दिर , पंचमुखी मन्दिर , राधिका विहारी मन्दिर तथा अन्य कई देखने योग्य स्थल है |

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