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साँची के प्रमुख पर्यटन स्थल | Sanchi Tour Guide in Hindi

साँची के प्रमुख पर्यटन स्थल | Sanchi Tour Guide in Hindi
साँची के प्रमुख पर्यटन स्थल | Sanchi Tour Guide in Hindi

जब बौद्ध धर्म अपने चरम पर था तो सांची (Sanchi) का वैभव एवं महत्व भी चरम पर था | उस दौर की निशानिया सांची में आज भी मौजूद है | उस चरम के अवशेष के रूप में यहाँ बौद्ध विहार  एवं स्तुपो को आज भी देखा जा सकता है | सम्राट अशोक के शासनकाल में सांची (Sanchi) बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार का प्रमुख केंद्र था | यहाँ पुरानी धरोहरों की उचित देखभाल और संरक्षण के कारण हे सांची (Sanchi) ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है और देशी-विदेशी पर्यटकों को अपनी ओर खींचा है | मध्यप्रदेश विधिशा के उत्तर-पश्चिम में करीब नौ किमी की दूरी पर बसा सांची बीना और भोपाल जंक्शन के बीच में है |

साँची के दर्शनीय स्थल

स्तूप 1 – यह स्तूप प्राचीन वास्तुकला तथा शिल्प का बेहतरीन नमूना है | इस स्तूप के भीतर एक ओर आधा स्तूप है | इस स्तूप का व्यास करीब 36.60 मीटर है एवं ऊँचाई लगभग 14.5 मीटर है | इस स्तूप के चारो ओर परिक्रमा पथ बना है | पर्यटकों के लगातार चलने से यह अब चिकना हो गया है |
चार तोरण द्वार– विशाल स्तूप को चारो ओर से घेरे खड़े तोरण द्वारो पर बौध धर्म के सिद्धांतो के अनुसार बुध का चित्रांकन प्रतीक शैली में किया गया है | वृक्ष प्रतीक है उनके बोधि ज्ञान का चक्र संकेत करता है उनके उपदेशो का | पाद चिन्ह और गद्दी उनके अस्तित्व को दर्शाते है | इन स्तुपो के शिलालेख पर उन तमाम लोगो के नाम अंकित है जिन्होंने वेदिकाओ और भूतल निर्माण में सहयोग किया था |
स्तूप 2 – यह पहाडी की तलहटी पर बना है | इसकी सबसे बड़ी विशेषता पत्थर का बना कटघरा है | यह इसे चारो ओर से घेरे हुए है | इस स्तूप में कोई तोरण द्वार नही है | इस पर उकेरे गये पशु-पक्षी , फूल-पत्ती , नाग , किन्नरों और मानवो के भित्तिचित्र जीवंत दिखाई पड़ते है |
स्तूप 3 – इस स्तूप के अंदर महात्मा बुद्ध के दो प्रिय शिष्यों के अवसेश मिले है जिन्हें बाद में इंग्लैंड ले जाया गया जहां अर्द्धगोलाकार गुम्बद पर बना चमत्कार पत्थर देखने योग्य है |
संग्रहालय – प्राचीन भारतीय वास्तुकला और स्थापत्य कला की सम्पूर्ण जानकारी के लिए वहां स्थित संग्रहालय देखने योग्य है | भारतीय पुरातत्व के इस संग्रहालय में बुद्ध से संबधित सामग्री जमा की गयी है |
सतधार – यह जगह साँची से करीब 10 किमी की दूरी पर भोपाल रोड पर है | यहाँ पहुचकर पर्यटकों को छोटी साँची में होने का एहसास होता है | यहाँ स्थित स्तुपो की खोज कुछ साल पहले ही हुयी है | यहाँ के स्तूप साँची के स्तूप से खुबसुरत नजर आते है |
महापात्र – पत्थर के एक ही टुकड़े को तराश कर बनाया गया महापात्र वास्तुकला और स्थापत्य कला की अद्भुत कृति है | इस महापात्र में भिक्षुओ को बांटा जाने वाला भोजन रखा जाता है |
उदयगिरी गुफाये – सांची घुमने आये पर्यटकों को उदयगिरी की गुफाये खासतौर से आकर्षित करती है | विदिशा से चार किमी की दूरी पर स्थित ये गुफाये कलाकारों ने बलुआ पत्थर की पहाडी चट्टानों को काटकर बनाई थी | उदयगिरी गुफाओं को देखने आये पर्यटक यहाँ विभिन्न प्रजाति के गुलाबो का आनन्द भी उठा सकते है | आज का विदिशा अशोक के समय में भेलसा के नाम से जाना जाता था |

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