
अयोध्या विवाद (Ayodhya Dispute) जिसे आप चाहे राम मन्दिर विवाद कहे या फिर बाबरी मस्जिद विवाद , वर्षो से भारत की राजनीति में चर्चा का विषय रहा है | उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में एक जमीन के टुकड़े को लेकर यह एक ऐसा विवाद है जो सुलझे तो दिक्कत और ना सुलझे तो ओर ज्यादा दिक्कत | मुख्य विवाद (Ayodhya Dispute) यह है कि जिस विवादित स्थल की बात की जाती है उस पर हिन्दुओ का मानना है कि यहाँ भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था जहां पर मुस्लिमो ने मन्दिर को तोडकर मस्जिद बनाई जबकि मुस्लिम लोगो का मानना है कि यहाँ पर मस्जिद का पुनर्निर्माण होना चाहिए जिसको विध्वंस कर दिया गया |
6 दिसम्बर 1992 को बाबरी मस्जिद को एक राजनितिक रैली के दौरान विध्वंस कर दिया गया था | यह विवाद अलाहाबाद हाई कोर्ट में वर्षो तक चला और तीन जजों की बेंच ने यह बात कही कि अयोध्या की 2.77 एकड़ जमीन तीन भागो में बाँट दी जाए जिसमे से एक तिहार रामलला के लिए , एक तिहाई इस्लामिक सुन्नी वक्फ बोर्ड को और एक तिहाई निर्मोही अखाड़ा को दे दी जाए | लेकिन मसला यह है कि विवादित स्थल पर तीनो पक्ष अपना हक चाहते है इस कारण यह मामला अभी तक ना कोर्ट में सुलझ पाया और ना ही आपसी बैठको के जरिये | आइये आपको इस विवाद को पूरा समझने के लिए टाइमलाइन के जरिये सब बताते है |
अयोध्या विवाद का इतिहास
ऐसी मानना है कि 1527 ईस्वी में प्रथम मुगल बादशाह बाबर के शासन के दौरान उसने एक हिन्दू मन्दिर को ध्वस्त कराकर उसके स्थान पर एक मस्जिद का निर्माण करवाया और उसका नाम अपने नाम पर बाबरी मस्जिद रखा |
विवाद की शुरुवात | आजादी से पहले
1853 ईस्वी में पहली बार आधिकारिक रूप से बाबरी मस्जिद को लेकर साम्प्रदायिक विवाद शुरू हुआ था | 1859 ईस्वी में ब्रिटिश शासन के दौरान हिन्दू पूजा और मुस्लिम नमाज के लिए एक कांटेदार बाड लगाकर अलग अलग जगह बना दी जो 90 वर्षो तक ऐसी ही बनी रही |
अयोध्या विवाद | आजादी के बाद
दिसम्बर 1949 को बाबरी मस्जिद में किसी ने मुर्तिया स्थापित कर दी जिसे हिन्दुओ ने भगवान राम के प्रकट होने की बात बताई | दोनों तरफ से इस बात को लेकर कानुनी विवाद हो गया जिसके कारण सरकार को बाबरी मस्जिद पर ताला जड़ना पड़ा और इस स्थान को विवादित स्थल घोषित कर दिया गया | 1961 में बाबरी मस्जिद पर जबरदस्ती अधिकार और अंदर प्रतिमा स्थापित करने को लेकर भारतीय अदालतों में कई केस फाइल किये गये |
रामजन्मभूमि पर मन्दिर निर्माण चर्चा की शुरुवात
1984 ईस्वी में भगवान श्रीराम के जन्मस्थल पर मन्दिर निर्माण को लेकर आन्दोलन शुरू हुआ जिसमे कई हिन्दू दल एकत्रित होकर रामजन्मभूमि पर मन्दिर निर्माण को लेकर चर्चा करने लगे | 1986 ईस्वी में 37 वर्षो के बाद जिला जज ने मस्जिद के द्वार खुलवाये और हिन्दुओ को विवादित स्थल के बाहर चबूतरे पर पुजा करने की आज्ञा दी | इसके विरोध में मुस्लिम पक्षकारो ने Babri Mosque Action Committee की स्थापना की | कोर्ट के आदेश के बाद एक घंटे के अंदर मस्जिद के द्वार खुल गये |
विश्व हिन्दू परिषद ने रामजन्मभूमि पर शिला की नींव
1989 ईस्वी में राममन्दिर निर्माण को लेकर लोगो में माहौल बन रहा था | फरवरी में विश्व हिन्दू परिषद ने विवादित स्थल के निकट शिला स्थापित करने के विचार बनाया | नवम्बर में विश्व हिन्दू परिषद ने गृह मंत्री बूटा सिंह और तत्कालीन मुख्यमंत्री एन.डी.तिवारी के समक्ष विवादित स्थल के नजदीक एक मन्दिर की स्थापना की जिससे देश में साम्प्रदायिक माहौल तैयार हो गया |
आडवाणी ने रथयात्रा के जरिये रामजन्मभूमि पर माँगा सहयोग
1990 ईस्वी में भाजपा के सहयोग से वी.पी.सिंह प्रधानमंत्री बने तब भाजपा अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी ने रथयात्रा के जरिये पुरे देश में घूम-घूमकर राममन्दिर निर्माण के लिए सहयोग माँगा | 23 अक्टूबर को यात्रा के दौरान बिहार में उनको गिरफ्तार कर लिया गया तो भाजपा ने सरकार से सहयोग वापस लेकर सरकार गिरा दी | इसके बाद कांग्रेस के सहयोग से श्री चंद्रशेखर प्रधानमंत्री बने |
1991 में कांग्रेस केंद्र में थी लेकिन कई राज्यों में भाजपा की सरकार बन गयी थी | इसी तरह उत्तरप्रदेश में भी कल्याणसिंह मुख्यमंत्री बने | कल्याणसिंह ने 2.77 एकड जमीन को रामजन्मभूमि न्यास ट्रस्ट को सौंप दी |अलाहाबाद उच्च न्यायालय ने किसी भी प्रकार के स्थायी निर्माण के लिए मना कर दिया | कल्याणसिंह ने पब्लिक में खुले तौर पर इस आन्दोलन का समर्थन किया जबकि केंद्र सरकार तनाव बढने की चिंता को लेकर कोई एक्शन नही ले रही थी |
कारसेवको का एकत्रित होना शुरू
1992 में कल्याण सिंह ने इस आन्दोलन का समर्थन करते हुए विवादित स्थल पर आसान प्रवेश करना , कारसेवको पर कोई फायरिंग न करना और CRPF का इस स्थान पर भेजने का विरोध करना जैसे फैसले लिए |जुलाई में हजारो कारसेवक इस स्थान पर एकत्रित हुए और मन्दिर सुधार का काम करने लगे | प्रधानमंत्री के दखल के बाद इस एक्टिविटी को रोकना पड़ा |
गृहमंत्री की मौजूदगी में Babri Masjid Action Committee और VHP नेताओं में मीटिंग शुरू हो गयी | 30 अक्टूबर को विश्व हिन्दू परिषद की धर्म संसद ने यह बताया कि बातचीत बेनतीजा रही और कारसेवा 6 दिसम्बर से फिर शुरू होगी | केंद्र सरकार ने CRPF को उस स्थान पर तैनात कर दिया
बाबरी मस्जिद विध्वंस और साम्प्रदायिक दंगे
06 दिसम्बर 1992 को 2 लाख कारसेवको की भीड़ में बाबरी मस्जिद को विध्वंस कर दिया गया | पुरे देश में साम्प्रदायिक दंगे शुरू हो गये | 16 दिसम्बर 1992 को विध्वंस के दस दिनों बाद कांग्रेस सरकार ने जस्टिस लिबेरहन को इन्क्वायरी कमीशन बनाने के लिए कहा | विध्वंस के तीन महीने बाद Liberhan Commission ने जाँचबीन करना शुरू किया कि बाबरी मस्जिद विध्न्व्स का क्या कारण है और कौन जिम्मेदार है | 2001 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के 8 साल पुरे होने पर विश्व हिन्दू परिषद में फिर भरोसा दिलाया कि उस स्थान पर राममन्दिर बनेगा |
अयोध्या विवाद की आग गुजरात में
27 फरवी 2002 में अयोध्या से आ रहे हिन्दू स्वयंसेवकों को ले जा रही रेल पर पर गुजरात में गोधरा में आग लगा दी जिससे 58 लोग मारे गये | इसकी वजह से साम्प्रदायिक दंगो में गुजरात में अनाधिकारिक तौर पर 2000 लोगो ने अपनी जाने गंवा दी |
विवादित स्थल पर मन्दिर होने के मिले सबूत
2003 में कोर्ट ने आज्ञा दी कि यह सर्वे किया जाए कि उस ठान पर भगवान राम का मन्दिर भी था कि नही | अगस्त में सर्वे में मस्जिद के नीचे 10वी शताब्दी के मन्दिर होने के सबूत मिले | AIMPLB ने ASI की रिपोर्ट को चुनौती दी |
हिन्दू भाजपा नेताओं को माना बाबरी मस्जिद विवाद का दोषी
सितम्बर 2003 में कोर्ट ने सात हिन्दू नेताओं जिसमे कुछ भाजपा के बड़े नेता भी है को बाबरी मस्जिद विवाद के लिए ट्रायल पर लिया गया | नवम्बर 2004 में उतर प्रदेश कोर्ट ने लालकृष्ण आडवाणी के बयानों को बाबरी मस्जिद विध्वंस की जड माना | सु| Liberhan Commission ने 17 सालो बाद अपनी रिपोट भेजी जिसके कंटेंट को पब्लिक नही किया गया | मई 2010 में इस मामले में लालकृष्ण आडवाणी सहित अन्य भाजपा नेताओं को आपराधिक साजिश रचने के आरोप से मुक्त कर दिया गया |
हाई कोर्ट में सुनाया पहली बार फैसला
जुलाई 2010 में हाई कोर्ट ने सभी पक्षों को यह सलाह देते हुए फैसला सुरक्षित कर लिया कि वे इस विवाद को आपसी बातचीत से सुलझाए | सितम्बर 2010 में हाई कोर्ट ने इसे मामले में फैसला सुनाने की तारीख तय की , वही सुप्रीम कोर्ट ने फैसले को स्थगित करने की याचिका को नामंजूर की | 30 सितम्बर 2010 को हाई कोर्ट ने विवादित स्थल को तीन हिस्सों में बांटने का फैसला सुनाया जिसमे में एक तिहाई जमीन रामलला को , एक तिहाई सुन्नी वक्फ बोर्ड को और एक तिहार निर्मोही अखाड़ा को देनी की बार कही |
दिसम्बर 2010 में अखिल भारतीय हिन्दू महासभा और सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी | 9 मई 2011 को
सुप्रीम कोर्ट मामला पहुचने पर उसने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी और तीनो पक्षों को यथा स्थित बरकरार रहने को कहा | फरवरी 2016 में भाजपा नेता सुब्रह्मण्य स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर विवादित जगह पर राम मन्दिर निर्माण की अनुमति माँगी |
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