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विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा स्टेचू ऑफ़ यूनिटी से जुड़े रोचक तथ्य | Statue of Unity Facts in Hindi

विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा स्टेचू ऑफ़ यूनिटी से जुड़े रोचक तथ्य | Statue of Unity Facts in Hindi
विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा स्टेचू ऑफ़ यूनिटी से जुड़े रोचक तथ्य | Statue of Unity Facts in Hindi

भारत के पहले उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ना केवल स्वतंत्रता के अग्रणी सेनानी थे बल्कि भारतीय राजाओं को और उनकी रियासतों को भारत में मिलाने के लिए राजी करने में उनकी अहम भूमिका थी | भारत कोए एक राष्ट्र के रूप में खड़ा करने के लिए लौहपुरुष सरदार पटेल के सपने और योगदान को याद करते हुए गुजरात के सरदार सरोवर बाँध के पास साधूबेग द्वीप पर दुनिया की सबसे ऊँची (182 मीटर ऊँची) प्रतिमा बनाई गयी है | इस प्रतिमा को Statue of Unity  नाम दिया गया है | देश के 15 करोड़ से ज्यादा किसानो के योगदान , 300 इंजिनियर समेत 3000 मजदूरों के लगातार 42 महीनों की अथक मेहनत से तैयार Statue of Unity राष्ट्रीय गौरव और एकता के प्रतीक है | आइये अब आपको Statue of Unity  जुड़े रोचक तथ्य बताते है

प्रधानमंत्री मोदी के सपनों की प्रतिमा

सरदार पटेल की प्रतिमा बनाने की घोषणा नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते ही 07 अक्टूबर 2010 को एक प्रेस कांफ्रेंस में की थी | जिस समय इस प्रोजेक्ट की घोषणा हुयी तब इसे Gujarat’s tribute to the nation नाम दिया गया | अपने इस सपने को पूरा करने के लिए गुजरात सरकार ने सरदार पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट (SVPRET) का निर्माण किया | अपने इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए नरेंद्र मोदी ने किसानो से अपने पुराने कृषक उपकरणों को दान करने की अपील की थी | 2016 तक कुल 135 मेट्रिक टन स्क्रैप आयरन इक्कट्ठा किया गया और इसमें से 109 टन का प्रयोग प्रतिमा की नींव रखने में किया गया |

विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा 

अगर दुनिया की सबसे विशाल प्रतिमाओं से Statue of Unity की तुलना करे इसने 153 मीटर ऊँची चीन में स्थित स्प्रिंग टेम्पल ऑफ़ बुद्धा की प्रतिमा को मात दिया है | इसके बाद Statue of Liberty की उंचाई 93 मीटर , The Motherland Calls की ऊँचाई 87 मीटर , Christ the Redeemer  की ऊँचाई 38 मीटर है | हिन्दुस्तान में इससे पहले सबसे ऊँची मूर्ति आंध्रप्रदेश में स्थित हनुमान मूर्ति थी जिसकी ऊँचाई 41 मीटर है |

सरदार के हृदय से दिखेगा मनोहर नजारा 

सरदार पटेल की इस प्रतिमा में दो लिफ्ट लगी है | इस लिफ्ट से पर्यटक सरदार पटेल की प्रतिमा के हृदय तक जा सकेंगे | लिफ्ट से 26 लोग एक बार में गैलरी तक केवल 30 सेकंड में पहुच जायेंगे | स्टेचू ऑफ़ यूनिटी से बाँध के अलावा नर्मदा के 17 किमी लम्बे पथ पर 230 हेक्टेयर में फ़ैली फूलो की घाटी देख सकेंगे | प्रतिमा के साथ 153 मीटर की उंचाई पर 200 पर्यटकों की क्षमता वाली एक दर्शक गैलरी बनाई गयी है जहां से दर्शक बाँध और आसपास के वातावरण का नजारा देख सकते है |

सरदार पटेल का जीवन एक प्रदर्शनी में समाहित

भूतल पर सरदार पटेल के जीवन पर आधारित एक प्रदर्शनी है जहां से दो हाईस्पीड लिफ्ट से पर्यटक दर्शक गैलरी पर जा सकते है | पटेल की जीवन पर आधारित ऑडियो-विसुअल प्रस्तुती भी यहाँ दिखाई जायेगी | प्रदर्शनी हॉल दुनिया भर के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र होंगे |

हजारो मजदूरों और इंजिनियरो के परिश्रम का नतीजा 

सरदार पटेल की प्रतिमा को बनाने में करीब 3400 कामगार और 250 इंजिनियर दिन रात काम में जुटे रहे | इस प्रतिमा को बनाने में 15 करोड़ से ज्यादा किसानो का योगदान भी महत्वपूर्ण है जिन्होंने अपने पुराने कृषि औजारों को पटेल प्रतिमा के लिए दान कर दिया था |

भारी से भारी भूकम्प को सहन कर पायेगी प्रतिमा

गुजरात के भुज में आये भूकम्प को देखते हुए इस प्रीतम को पहले ही उसी अनुरूप तैयार किया है जिसके लिए इस प्रतिमा का निर्माण भूकम्परोधी एवं जंगरोधी तकनीक से किया गया है | अनेको वर्षो तक इस प्रतिमा पर जंग लगने का भी कोई खतरा नही हा

गुजरात पर्यटन विभाग को होगा काफी फायदा 

गुजरात वैसे तो पहले सी पर्यटन में काफी अग्रसर है लेकिन सरदार पटेल की प्रतिमा को देखने के लिए पर्यटकों की संख्या में ओर इजाफा होगा जिसमे विदेशियों की संख्या बढने के अधिक आसार है | सरदार पटेल की प्रतिमा की उंचाई 182 मीटर इसलिए रखी गयी है क्योंकि गुजरात विधानसभा में 182 सीटे है | गुजरात सरकार के मुताबिक़ Statue of Unity से राज्य के पर्यटन विभाग को बहुत फायदा होगा | प्रतिदिन 15 हजार पर्यटकों के यहाँ आने की सम्भावना है | इस प्रोजेक्ट से यहाँ के करीब 15 हजार आदिवासी लोगो को हर साल रोजगार के मौके मिलेंगे |

तीन परतो से हुआ है Statue of Unity का निर्माण

Statue of Unity तीन परत वाली संरचना है जिसमे सबसे निचली परत का निर्माण RCC से हुआ है जिसमे 127 मीटर ऊँचे दो टावर है जो मूर्ति की छाती तक है |दुसरी परत स्टील से बना ढांचा है और इसके बाद आठ मिमी मोटे कांस्य से तीसरी परत का निर्माण हुआ है |

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