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कांग्रेस पार्टी का इतिहास एवं रोचक तथ्य | Indian National Congress History and Facts in Hindi

कांग्रेस पार्टी का इतिहास एवं रोचक तथ्य | Indian National Congress History and Facts in Hindi
कांग्रेस पार्टी का इतिहास एवं रोचक तथ्य | Indian National Congress History and Facts in Hindi

कांग्रेस पार्टी भारत का एक बड़ा और महत्वपूर्ण राजनीतिक दल है जिसकी स्थापना 1885 में हुयी थी | एशिया और अफ्रीका और ब्रिटिश साम्राज्य के बढ़ते प्रभाव के कारण इस राजनितिक दल का गठन हुआ था | 19वी सदी के अंत और 20वी सदी के शुरुवात में महात्मा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन में एक मजबूत पार्टी बनकर उभरी | कांग्रेस के नेतृत्व में भारत ग्रेट ब्रिटेन से आजाद हुआ और भारत में एक शक्तिशाली दल बनकर उभरा | आइये आपको कांग्रेस पार्टी से जुड़े रोचक तथ्य बताते है |
1# कांग्रेस का पहला अधिवेशन सिविल सर्विस अधिकारी एलन ओक्टाविन ह्युम के नेतृत्व में 28-31 दिसम्बर 1885 को बॉम्बे में हुआ था | ह्युम ने ही सबसे पहले शिक्षित भारतीय युवको को सरकार में अधिक हिस्सा देने के पक्ष में अपनी बात रखी थी जो अंग्रेजो और भारतीयों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी थी |
2# कांग्रेस के पहले अधिवेशन में 72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था जिसमे भारत के हहर प्रान्त से एक प्रतिनिधि शामिल था | जाने माने प्रतिनिधियों में स्कॉटिश ICS अफसर विलियम वेडरबर्न , दादाभाई नौरोजी , फिरोजशाह मेहता , गणेश वासुदेव जोशी जैसे नेता थे |
3# 1886 में कांग्रेस पार्टी के प्रथम चयनित अध्यक्ष दादाभाई नौरोजी थे जो इससे पहले इंडियन नेशनल एसोसिएशन का नेतृत्व कर रहे थे | दादाभाई नौरोजी ब्रिटिश हाउस कॉमन (1892–1895) की संसद में शामिल होने वाले प्रथम भारतीय भी थे |
4# कांग्रेस के शुरुवाती प्रमुख नेताओं में बाल गंगाधर तिलक , बिपिन चन्द्र पाल , लाला लाजपतराय , गोपाल कृष्ण गोखले और मोहम्मद अली जिन्ना थे | जिन्ना कांग्रेस में हिन्दू-मुस्लिम एकता का पक्ष रखने वाले प्रमुख नेता थे जो बाद में मुस्लिम लीग के नेता और पाकिस्तान के प्रथम गर्वनर बने |
5#. 1905 में बंगाल विभाजन के दौरान सुरेन्द्रनाथ बनर्जी के नेतृत्व में कांग्रेस एक जन-आन्दोलन में बदल गयी जिसके परिणामस्वरूप स्वदेशी आन्दोलन की शुरुवात हुयी |
6#. 1915 में साउथ अफ्रीका से लौटने के बाद महात्मा गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष बने | प्रथम विश्वयुद्ध के बाद पार्टी गांधीजी से जुड़े रहे , जो उनके अनाधिकारिक आद्ध्यात्मिक नेता थे | 1920 में उनके ही नेतृत्व में खिलाफत आन्दोलन की शुरुवात हुई थी जिसमे सत्याग्रह आन्दोलन प्रमुख था |
7#/ में चौरा चोरी काण्ड में पुलिस वालो की हत्या का गांधीजी ने विरोध किया था जिसकी वजह से कांग्रेस बिखर गया और कई नेताओं ने मिलकर अलग स्वराज पार्टी का निर्माण कर दिया |
8#. सत्याग्रह आन्दोलन की वजह से गांधीजी की लोकप्रियता के चले कई नेता कांग्रेस में शामिल हो गये जिसमे सरदार वल्लभभाई पटेल , पंडित जवाहरलाल नेहरू , राजेन्द्र प्रसाद  , खान अब्दुल गफार खान , चक्रवती राजगोपालाचारी ,  जयप्रकाश नारायण , और मौलाना अबुल कलाम जैसे नेता थे |
9# इतने प्रखर नेताओं की बदौलत कांग्रेस एक मजबूत दल के रूप में फिर से उभरा जिसने कई मुद्दों पर खुलकर सरकार का सामना किया | 1929 में कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में जवाहरलाल नेहर की अध्यक्षता में पूर्ण स्वराज की मांग करते हुए 26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वराज दिवस मनाया गया |
10#  भारत सरकार कानून 1935 के तहत 11 प्रान्तों में चुनाव हुये जिसमे से केवल बंगाल , पंजाब और सिंध को छोडकर बाकि 8 प्रान्तों में कांग्रेस सत्ता में आयी जबकि मुस्लिम लीग किसी भी प्रान्त में सरकार नही बना सकी |
11# 1939 में सुभाष चन्द्र बोस ने कांग्रेस से इस्तीफ़ा दे दिया क्योंकि भारत के लोगो की अनुमति इ बिना ब्रिटिश सरकार ने भारतीयों को द्वीतीय विश्वयुद्ध में लगा दिया था |1943 में सिंगापुर में बोस ने आजाद हिन्द फ़ौज की स्थापना की जिसमे जापान का सहयोग मिला था |
12#. आजादी के बाद कांग्रेस प्रमुख दल बनकर उभरा | 1952 में हुए प्रथम लोकसभा चुनावों में ना केवल केंद्र में बल्कि कई राज्यों में सरकारे बनाने में सक्षम हुयी | 1977 तक सत्ता में रहने के बाद कांग्रेस को जनता दल में पराजित किया | 1980 में फिर सत्तर में आयी और 1989 में फिर पराजित हुयी |उसके बाद 2004 और 2009 में सरकारे बनाने में कामयाब रही |
13#. आजादी के बाद से लेकर अब तक कांग्रेस बहुमत के साथ छ: बार जबकि चार बार गठबंधन के साथ सरकार बनाई | इस तरह देखा जाए तो कांग्रेस ने केंद्र सरकार में 49 सालो तक सत्ता सम्भाली |
14#. कांग्रेस के सात प्रधानमंत्री रह चुके हा जिसमे प्रथम जवाहरलाल नेहरु और अंतिम मनमोहन सिंह है | हालांकि अंतिम लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ज्यादा ख़ास नही कर पायी |
15#. 2014 लोकसभा चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन सबसे निराशाजनक रहा जब उन्होंने लोकसभा के 543 सदस्यों में से केवल 44 सीटो पर ही जीत मिली |

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