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शहीद मदन लाल ढींगरा की जीवनी | Madan Lal Dhingra Biography in Hindi

शहीद मदन लाल ढींगरा की जीवनी | Madan Lal Dhingra Biography in Hindi
शहीद मदन लाल ढींगरा की जीवनी | Madan Lal Dhingra Biography in Hindi

मदनलाल ढींगरा (Madan Lal Dhingra) का जन्म 1887 ई. में एक सम्पन्न कुटुम्ब परिवार में पंजाब में हुआ था | उनकी शिक्षा दीक्षा लाहौर में सम्पन्न हुयी थी | उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से बी.ए. की उपाधि प्राप्त की थी | जीवन में प्रवेश करने पर ढींगरा ने कश्मीर में सेटलमेंट विभाग में नौकरी की पर वह काम उनकी रूचि के अनुकूल नही था अत: कुछ ही दिनों की नौकरी के बाद त्यागपत्र दे दिया |
ढींगरा (Madan Lal Dhingra) नौकरी से त्यागपत्र देकर इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त करने के लिए इंग्लैंड चले गये | इंग्लैंड में रहते हुए वे श्याम जे कृष्ण वर्मा और वीर सावरकर जी के सम्पर्क में आये | श्याम जी कृष्ण वर्मा महान देशभक्त थे | उन्होंने इंडिया हाउस अर्थात भारत भवन नामक संस्था की स्थापना की थी | उन दिनों महान क्रांतिकारी वीर सावरकर भी इंडिया हाउस में ही निवास करते थे |
श्याम जी कृष्ण वर्मा और वीर सावरकर के सम्पर्क में आ जाने पर ढींगरा इंडिया हाउस की बैठको में भाग लेने लगे | 10 मई के दिन इंडिया हाउस में बड़ी धूमधाम के साथ क्रांति दिवस मनाया गया | भारत का झंडा फहराया गया और स्वतंत्रता के संबध में जोशीले भाषण दिए गये | ढींगरा ने भी उस आयोजन में भाग लिया था | ढींगरा वीर सावरकर के विचारो से अत्यदिक प्रभावित थे | उनके विचारो से प्रभावित होकर ही उन्होंने क्रान्तिकारियो से अपना संबध स्थापित कर लिया था | आयरलैंड के क्रांतिकारियों से भी उनका संबध था |
अंग्रेज गुप्तचरों की डायरी में ढींगरा (Madan Lal Dhingra) का नाम लिखा जा चूका था | ढींगरा के पिता एक बहुत बड़े सरकारी अफसर थे | ढींगरा जब अंग्रेजो के विरुद्ध काम करने लगे तो ब्रिटिश सरकार ने उनके पिता को पत्र भेजकर उनसे कहा कि वे अपने पुत्र को क्रांतिकारियों का साथ देने से रोके | ढींगरा के पिता ने उनके पास कई पत्र भेजकर उन्हें क्रान्ति के मार्ग पर जाने से रोकने की चेष्टा की , पर ढींगरा के हृदय पर उन पत्रों को कोई प्रभाव नही पड़ा | वे अपने पथ रप आगे बढ़ते ही गये और आगे बढ़ते ही गये |
मित्रो की एक गोष्ठी में किसी ने बताया कि कर्जन वायली बड़ा अत्याचारी है और उसी के संकेत पर भारत में क्रांतिकारियों का दमन किया जा रहा है | पंजाब , बंगाल और महाराष्ट्र के बहुत से क्रांतिकारी उसी के संकेत पर बंदी बनाये गये है और फांसी के तख्ते पर भी चढाये गये है | कर्जन वायली के अत्याचारों की कहानिया सुनकर धींगरा ने कर्जन वायली को खत्म करने की कसम खाई |
ढींगरा सावरकर के पास बराबर आया जाया करते थे | उनके उग्र विचारो ने उन्हें प्रोत्साहित किया | वे कर्जन वायली के अत्याचारों से पहले ही घृणा करने लगे थे अत: उन्होंने उसे मिटाने का निश्चय किया | उन्होंने बस्ती के बाहर जाकर पिस्तौल से निशाना साधने का अभ्यास किया | वे उस इंस्टिट्यूट के सदस्य भी हो गये जिसकी बैठको में कर्जन वायली बराबर भाग लिया करता था |
वायली की हत्या करने के पूर्व ढींगरा ने बड़े बड़े अंग्रेजो से जान-पहचान स्थापित की | उन्होंने अंग्रेजी ढंग की सुंदर पोशाके बनवाई | वे बड़े ठाट-बाट से इंस्टिट्यूट जाने लगे | ब्रिटिश सरकार की पहले से इंडिया हाउस पर कड़ी दृष्टि थी क्योंकि इंडिया हाउस क्रांतिकारियों का अड्डा था | आखिर ब्रिटिश सरकार ने इंडिया हाउस को बंद करने का आदेश जारी कर दिया | जब इंडिया हाउस बंद हो गया तो ढींगरा को भी अन्यत्र चला जना पड़ा |
कुछ दिनों बाद ढींगरा को ज्ञात हुआ कि इंपीरियल इंस्टीट्यूट के हाल में विज्ञान के विषय पर एक बैठक होने वाली है जिसमें कर्जन वायली को भी आमंत्रित किया गया था | बस फिर क्या था ढींगरा से अपने संकल्प सिद्धि के लिए मन ही मन एक चित्र तैयार कर लिया | पहली जुलाई का दिन था दोपहर के पश्चात का समय था | इम्पेरियल इंस्टीट्यूट के हाल में बड़े बड़े अंग्रेजो की बैठक हो रही थी ||उस बैठक में कर्जन वायली और ढींगरा दोनों अपनी अपनी जगह विद्यमान थे |
मंत्री जब अपनी रिपोर्ट में भारतीयों की निंदा करने लगा तो ढींगरा बिजली की गति से उठे और कर्जन वायली के पास जा पहुचे | उन्होंने एक के बाद एक उस पर तीन गोलियाँ चलाई | काव्स्की काका नामक एक पारसी डॉक्टर ने ढींगरा को पकड़ने का प्रयत्न किया पर ढींगरा ने उस पर गोली चलाकर उसे भी धराशायी कर दिया |
कर्जन वायली अपनी जगह पर ढेर हो गया | मनमोहन सिंह नाम एक भारतीय ने ढींगरा को पकड़ लिया | ढींगरा बंदी बना लिए गये | उन्हें ब्रिंक्सटन के कारागार में बंद कर लिया गया | वायली की हत्या के अपराध में ढींगरा पर मुकदमा चलाया गया | ढींगरा जब पकड़े गये थे तो तलाशी में उनके पास इ पिस्तौल , गोलिया , छुरा और एक वक्तव्य भी मिला था जिसमें लिखा था “मैंने वायली की हत्या अपने विवेक से सोच समझकर की है | मुझे न तो किसी ने प्रोत्साहित किया है और न इसमें किसी अन्य का हाथ है | मैंने उसकी हत्या करके अपने धर्म का पालन किया है | प्रत्येक मनुष्य को अत्याचारी की हत्या करनी ही चाहिए”|
ढींगरा (Madan Lal Dhingra) को सेशन सुपुर्द कर दिया गया जहा उन्हें फँसी की सजा दी गयी | 19 अगस्त 1909 को उन्हें फांसी पर चढाया गया | ढींगरा देश के लिए मिट गये | उनका मिटना , उनका बलिदान युगों तक याद रहेगा |

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