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Prayagraj Tour Guide in Hindi | तीर्थराज प्रयाग के प्रमुख पर्यटन स्थल

Prayagraj Tour Guide in Hindi | तीर्थराज प्रयाग के प्रमुख पर्यटन स्थल
Prayagraj Tour Guide in Hindi | तीर्थराज प्रयाग के प्रमुख पर्यटन स्थल

इलाहाबाद (Allahabad) यानि तीर्थराज प्रयाग (Prayagraj) भारत का प्रमुख एतेहासिक , सांस्कृतिक और धार्मिक नगर है | अनेक दृष्टियों से इस नगर का अपना विशेष महत्व है | प्रयागराज Prayagraj राजनीती एवं साहित्य का प्रमुख केंद्र रहा है | गंगा , यमुना और सरस्वती नदियों के संगम पर लगभग 15 किमी के क्षेत्रफल में स्थित इस नगर की स्थापना सन 1575 में बादशाह अकबर ने की थी | अकबर ने यमुना नदी के किनारे , संगम के निकट , एक विशाल किले का निर्माण कराया किन्तु यह मान्यता है कि इस किले का निर्माण सम्राट अशोक ने कराया था | अकबर ने इसका पुनरुद्धार किया | इस किले में अशोक स्तम्भ और अक्षय वट आज भी है | अक्षय वट के बारे में यह लोक मान्यता है कि यह वृक्ष प्रलय के बाद भी बचा रहता है |
प्रयागराज (Prayagraj) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के क्रम में राजनीति गतिविधि का प्रमुख केंद्र था | स्वाधीन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु के निवास आनन्द भवन में बड़े बड़े राजनितिक नेता आते-जाते रहते थे | नेहरु जी के पिताजी मोतीलाल नेहरु ने इस भवन का निर्माण कराया था | बाद में नेहरु जी ने यह भवन कांग्रेस को दे दिया | यह नगर (Prayagraj) क्रांतिकारियों का केंद्र रहा है | प्रसिद्ध क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद आजाद के स्मारक को यहाँ आने वाले देखना न भूले |

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राजनीती के साथ साथ इलाहाबाद (Allahabad) साहित्य का भी गढ़ रहा है | यहाँ से सरस्वती पत्रिका प्रकाशित होती थी जिसके सम्पादक पंडित महावीर प्रसाद द्विवेदी थे | द्विवेदी को आधुनिक हिंदी का पितामह माना जाता है | दारागंज में महाकवि निराला रहते थे | यहाँ रहकर उन्होंने अनेक अमर कृतियों की रचना की | महादेवी वर्मा ने यही साहित्य-साधना की और अपनी रचानाओ से हिंदी साहित्य को गौरवान्वित किया |
प्रयाग को तीर्थराज कहा जाता है जहां प्रत्येक छह वर्ष पर अर्द्धकुम्भ और बारह वर्ष पर कुम्भ मेला लगता है | इस अवसर पर संगम में स्नान करने के लिए देश के सभी भागो से हिन्दू धर्मावल्म्बी आते है | ऐसी मान्यता है कि संगम में स्नान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते है और मोक्ष की प्राप्ति होती है | संगम में गंगा , यमुना और सरस्वती का मिलन होता है | गंगा और यमुना तो दिखाई पडती है किन्तु सरस्वती दिखाई नही पडती | ऐसी मान्यता है कि वो पृथ्वी के नीचे प्रवाहित होती है |तीन नदियों के मिल्न स्थल संगम को त्रिवेणी भी कहते है |
संगम और संगम स्नान के विषय में कई प्रकार की लोक आस्था और मान्यता है | कहा जाता है कि यही पर सोम और वरुण देवता का जन्म हुआ था | याज्ञवल्क्य और भारद्वाज मुनि ने यहाँ तप किया था | ऋग्वेद में इस “सितासिता संगम” कहा गया है | धार्मिक विश्वास है कि यहाँ पर मुंडन संस्कार होने पर जितने बाल गिरते है मनुष्य उतने दिन स्वर्ग में रहता है | देवता भी यहाँ मन्नते मांगते है | अहिरावण से श्रीराम-लक्ष्मण को छुड़ाने के बाद हनुमान जी ने यही सरस्वती की धारा में विश्राम किया था |
त्रिवेणी के छ तट माने गये है दो गंगा , दो यमुना और दो संगम के | इन तटो पर अनेक तीर्थ है | यहाँ के देवाधिपति है वेणी माधव भगवान | यहाँ एक नही बारह माधव भगवान है | यहाँ कई पवित्र घाट है सबका अलग अलग महत्व और महात्म्य है | कहते है कि द्शाश्वेध पर ब्रह्मा ने दस अश्वमेध यज्ञ किये थे | इन घाटो में प्रमुख घाट है संगम घाट , शिवपुरी घाट , रामघाट , सरस्वती घाट . द्रौपदी घाट , मनकेश्वर घाट और ककरहा घाट |

प्रयागराज (Prayagraj) के दर्शनीय स्थल

संगम – यह स्थान वह है जहां गंगा , यमुना और विलुप्त नदी सरस्वती मिलती है | संगम पर कुम्भ एवं अर्ध कुम्भ मेले आयोजित किये जाते है | इन मेलो में साधू संतो की भारी भीड़ जमा होती है जिसकी वजह से अव्यवस्था फ़ैल जाती है अत: ऐसे अवसरों पर संगम पर स्नान करने के उद्देश्य से आना ठीक नही रहता है |
इलाहाबाद किला (Allahabad Fort)– संगम के किनारे स्थित है इलाहाबाद का किला | इस विशाल किले को मुगल बादशाह अकबर ने बनवाया था | अब इस किले का अधिकतर हिस्सा सेना के इस्तेमाल के लिए है | इस किले में स्थित “अक्षयवट ” अत्यंत प्राचीन अहि और ऐसा विश्वास है कि यह कभी समाप्त नही होगा | किले के मुख्य द्वार के सामने अशोक का अति प्राचीन स्तम्भ है जिस पर अनेक शिक्षाए अंकित है | किले में भूमिगत पातालपुरी मन्दिर भी है |
आनन्द भवन (स्वराज भवन) – स्वाधीन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु का यह पैतृक आवास था | उनके पिता पंडित मोतीलाल नेहरु ने अपने रहने के लिए यह निवास बनवाया था | भारत की आजादी की लड़ाई की नीतियाँ यही तय की जाती थी | इसी से लगा हुआ नेहरु परिवार का एक भवन है स्वराज भवन | इसे कांग्रेस को दान कर दिया गया था | यहाँ नेहरु जी की जीवन झांकी चित्रों में देखी जा सकती है | कमला नेहरु के साथ नेहरु जी का विवाह यही सम्पन्न हुआ था |
खुसरो बाग़ – खुसरो बाग़ में जहांगीर कस सबसे बड़े पुत्र खुसरो को दफनाया गया था | पत्थर से बने खुसरो के मकबरे में ही उसकी माँ शाह बेगम की भी कब्र है |
जवाहर प्लेतेरियम – आनन्द भवन के परिसर में स्थित इस तारामंडल में तारो , ग्रहों , नक्षत्रो के विषय में फिल्मो , चित्रों और मॉडलो के माध्यम से दर्शको को जानकारी दी जाती है | आनन्द भवन और तारामंडल सोमवार को बंद रहता है |
भारद्वाज आश्रम – आनन्द भवन से थोड़ी दूर पर स्थित इस आश्रम के विषय में कहा जाता है कि इस आश्रम में ऋषि भारद्वाज से 10 हजार शिष्य शिक्षा ग्रहण करते थे | वनवास के समय भगवान राम ऋषि भारद्वाज से मिलने यहाँ आये थे |
विश्वविद्यालय – आनन्द भवन के पास जवाहरलाल नेहरु मार्ग पर सन 1887 में स्थापित इस विश्वविद्यालय को भारत का ऑक्सफ़ोर्ड कहा जाता है | इसका कला संकाय , सीनेट हॉल , विज्ञान संकाय और म्योर कॉलेज देखने योग्य है |
संग्रहालय – कमला नेहरु मार्ग पर देश के सर्वोतम संग्रहालयो में एक प्रयाग संग्रहालय में तेरहवी शताब्दी की अनेक दुर्लभ वस्तुओ के अलावा चित्रकला के दुर्लभ नमूने देखे जा सकते है | समय समय पर यहाँ व्याख्यान का आयोजन होता है | साथ ही प्राचीन मूर्तियों की प्रतिकृतिया बनाकर बेची जाती है | और उन्हें बनाने का प्रशिक्षण भी दिया जाता है | सोमवार को संग्रहालय बंद रहता है |

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