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प्रेरक कहानी - उपयुक्त काम | Dog and Donkey Story in Hindi

प्रेरक कहानी - उपयुक्त काम | Dog and Donkey Story in Hindi
प्रेरक कहानी – उपयुक्त काम | Dog and Donkey Story in Hindi

वाराणासी में एक धोबी रहता था | धोबी ने दो जानवर पाल रखे थे एक गधा और एक कुत्ता | गधा गंदे कपड़े घाट पर पहुचाया करता था धुले हुए कपड़ो को पुन: घर लाया करता था और कुत्ता रात में पहरा दिया करता था |
गधा और कुत्ता दोनों आंगन में बंधे रहते थे | दोनों प्रेम से परस्पर बातचीत किया करते थे और साथ ही खाते-पीते थे |
जाड़े के दिन थे अंधेरी रात थी | चारो ओर सन्नाटा था | कुत्ता और गधा दोनों आंगन में बंधे थे पर दोनों जाग रहे थे |
संयोग की बात , धोबी के घर में एक चोर घुस पड़ा | गधा और कुत्ता दोनों ने चोर को घुसते हुए देखा किन्तु चरो को देख करके भी कुत्ता मौन रहा |
गधा बोल उठा “क्यों भाई कुत्ते , स्वामी के घर में चोर घुसा है | तुमने भी देखा होगा | आश्चर्य है तुम चोर को देखकर भी चुप क्यों खड़े हो ?”
कुत्ता बोला “चुपचाप न पड़ा रहू तो क्या करू ? इतने दिनों से रात-रात भर जागकर पहरा देता आ रहा हु पर स्वामी में मुझे क्या दिया ? जब देखो तब दुदुराता ही रहता है | रोटियाँ भी देता है तो बड़े अपमान के साथ आज सब सारा धन चोर चुरा ले जाएगा तब पता चलेगा कि मै कितना बड़ा काम करता था”
कुत्ते की बार सुनकर गधे ने कहा “राम राम , तुम स्वामी के बारे में ऐसा सोचते हो ? कुछ ही भो स्वामी स्वामी है सेवक सेवक है | हम तो सेवक है | हमे स्वामी के कर्तव्य की ओर ध्यान न देकर अपने कर्तव्य की ओर ध्यान देना चाहिए | सेवक का कर्तव्य यही है कि वह साँस रहते हुए भी स्वामी को हानि न होने दे ”
कुत्ता बोल उठा “अच्छा उपदेश दे रहे हो | स्वामी तो आराम से रहे और सेवक दिन रात कष्टों की आग में जला करे ! ना भाई ना | मुझसे अब यह न हो सकेगा | तुम चुप रहो मुझे सोने दो ”
गधा बोला “तो जोर जोर से भौंक कर स्वामी को न जगाओगे | चोर स्वामी के घर का सारा माल उठा ले जाएगा और तुम चुपचाप पड़े रहोगे ”
कुत्ता बोला “हां हाँ कह तो दिया , अब मुझसे सेवा का यह कष्टमय कार्य नही हो सकेगा ”
गधा बोला “अच्छी बात है तुम चुपचाप खड़े रहो किन्तु मै अपने देखते हुए स्वामी को हानि नही होने दूंगा | मै उन्हें जगाऊंगा अवश्य जगाऊंगा | गधा अपनी बात को समाप्त करके बड़े जोर से अपने स्वर में बोल उठा ”
गधे की बोली सुनकर चोर तो भाग गया किन्तु उसकी असमय की बोली से स्वामी की नींद खुल गयी | नींद खुलने से उसे बड़ा बुरा लगा | वह मोटा डंडा लेकर गधे पर टूट पड़ा | उसने गधे को इतने डंडे लगाये कि वह बेचारा अधमरा हो गया |
यधपि गधे की बोली सुनकर चोर भाग गया और स्वामी का माल बच गया किन्तु यह काम गधे का नही कुत्ते का था | गधे को जो काम नही करना  चाहिए था उसने उस काम को किया इसलिए उसे दंड भोगना पड़ा |
गुरुजनों ने कहा है कि जिसका जो काम है वह काम उसी को करना चाहिए | इसके विरुद्ध आचरण करने से दुःख का भागी बनना पड़ता है |
कहानी से शिक्षा 
अच्छा व्यवहार न करने के कारण सेवको के मन में बुराई पैदा होती है | सेवको के साथ सदा अच्छा व्यवहार करना चाहिए | सेवक का कर्तव्य है कि साँस रहते हुए मालिक को हानि न होने दे | जिसका जो काम है उसी को वह काम करना चाहिये |

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