
भाद्रपद शुक्लपक्ष की तृतीया को हरतालिका तीज (Hartalika Teej) मनाई जाती है | इस दिन सुहागिन महिलाये शिव और पार्वती की की मिटटी की मूर्ति बनाकर पूजा करती है | हरतालिका तीज की कहानी (Hartalika Teej Story in Hindi) सुनने के बाद शिवजी को अंगोछा और पार्वतीजी को साड़ी चढाते है | धुप-दीप से भगवान की की आरती की जाती है |
पार्वती जी के सुहाग का सारा सामान और तेरह तरह की मिठाई चढाई जाती है | कहानी सुनते समय बायना के लिए तेरह मिठाई और साड़ी-ब्लाउज एवं रूपये भी एक थाली में अलग से रख ले | कहानी सुनने के बाद हाथ के पल्ले से ढक पर चार बार थाली से हाथ फेरे | फिर यह बायना सास के पैर छूकर उन्हें दे |
हरतालिका पूजन विधि | Hartalika Teej Pooja Vidhi in Hindi
- प्रात:काल जल्दी उठकर निर्जल उपवास का संकल्प ले |
- अगर स्वास्थ्य ठीक ना हो तो फलाहार ले सकते है |
- सांयकाल भगवान शिव और पार्वती की संयुक्त उपासना करनी चाहिए |
- उपासना के दौरान स्त्रियों को सम्पूर्ण शृंगार करना चाहिए |
- माँ पार्वती को सौभाग्य का सारा सामान (बिंदी , चूड़िया आदि) अर्पित करे |
- विवाहित स्त्रियाँ अपनी सास को सौभाग्य की वस्तुए दे |
- सास से आशीर्वाद जरुर लेना चाहिए |
- शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा के बाद इस व्रत का पारायण करे |
- इस दिन रात्री जागरण करना भी श्रेष्ट रहता है |
शिव-पार्वती जी को क्या अर्पित करे
राशि के अनुसार माँ पार्वती को अलग अलग सौभाग्य की चीज अर्पित करने से वैवाहिक जीवन की सारी उलझने दूर होगी
- मेष राशी- महिलाये माँ पार्वती को चूडिया चढाये |
- वृष राशि – महिलाये माँ पार्वती को बिछिया अर्पित करे |
- मिथुन राशि – महिलाये माँ पार्वती को हरी साड़ी अर्पित करे |
- कर्क राशि – महिलाये माँ पार्वती को इत्र और सुगन्धित वस्तुए अर्पित करे |
- सिंह राशि – महिलाये माँ पार्वती को आलता अर्पित करे |
- कन्या राशि – महिलाये माँ पार्वती को हरी साड़ी अर्पित करे |
- तुला राशि – महिलाये माँ पार्वती को चाँदी की पायल अर्पित करे |
- वृश्चिक राशि – महिलाये माँ पार्वती को लाल साड़ी अर्पित करे |
- धनु राशि – महिलाये माँ पार्वती को सिंदूर अर्पित करे |
- मकर राशि – महिलाये माँ पार्वती को आलता,सिंदूर और बिंदी अर्पित करे |
- कुम्भ राशि – महिलाये माँ पार्वती को इत्र और सुगंध अर्पित करे |
- मीन राशि – महिलाये माँ पार्वती को चांदी की बिछिया अर्पित करे |
हरतालिका तीज की कहानी | Hartalika Teej Story in Hindi
हिमाचल राजा की पुत्री ने शंकर भगवान को पतिरूप में पाने के लिए कठिन तपस्या आरम्भ की | उसी घोर तपस्या के समय नारद जी राजा हिमाचल के पास गये और कहा कि “भगवान विष्णु आपकी कन्या पार्वती के साथ विवाह करना चाहते है “| नारद की बात हिमाचल राजा ने स्वीकार कर ली | इसके बाद नारद जी भगवान विष्णु के पास गये और कहाकि “आपका विवाह हिमाचल राजा ने अपनी पुत्री पार्वती के साथ तय कर दिया है इसकी स्वीकृति दे”|
जब यह बात हिमाचल राजा ने अपनी पुत्री को बताई तो उन्हें बहुत दुःख हुआ | पार्वती जी ने अपनी सखी से कहा “मै भगवान शंकर के साथ विवाह करने के लिए इतनी घोर तपस्या कर रही हु उधर मेरे पिताजी ने मेरा विवाह विष्णु भगवान के साथ तय कर दिया | यदि तुम मेरी सहायता कर सकती हो तो कहो नही तो मै अपने प्राण इसी समय त्याग दूंगी” |
सखी ने कहा “मै तुम्हे ऐसे वन में ले चलूंगी कि तुम्हारे पिता को पता नही चल पायेगा ” | इस तरह पार्वतीजी सखी के साथ घने जंगल में चली गयी | इधर पिता हिमाचल को घर में इधर-उधर खोजने पर जब पार्वतीजी नही मिली तो बहुत दुखी हुए | सभी लोग पार्वतीजी की खोज में लग गये | उधर सखी के साथ पार्वतीजी एक गुफा के अंदर गयी और वहा शंकर भगवान को पाने के लिए तपस्या करने लगी |
भाद्रपद शुक्ला तृतीया को पार्वतीजी ने उपवास रखकर शिवलिंग स्थापित करके पूजा की और रात्रि जागरण किया | पार्वतीजी के इस कठिन उपवास से शंकर भगवान को आना ही पड़ा और पार्वतीजी की इच्छा के अनुसार उन्हें अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार कर लिया | तत्पश्चात शंकर भगवान कैलाश पर्वत पर चले गये |
प्रात:काल जब पार्वतीजी पूजन सामग्री नदी में छोड़ रही थी तो वहा हिमाचल के राजा मिल गये | अपनी पुत्री को देखकर हिमाचल के राजा ने रोते हुए पूछा “पुत्री तुम यहाँ कैसे आ गयी ?” तब पार्वतीजी ने विवाह वाली प्रतिज्ञा सुनाई | पार्वती जी के इच्छानुसार उन्होंने विधिवत पार्वतीजी का विवाह शिवजी के साथ करवाया | सखी द्वारा हरी जाने के कारण इस त्यौहार का नाम हरतालिका तीज हो गया | जो स्त्री इस व्रत को परम श्रुद्धा से करेगी उसे अचल सुहाग मिलेगा |
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