
हिमालय पर्वत श्रुंखला पर घोड़े की विशाल नाल के आकार में बसा अल्मोड़ा (Almora) शहर के एतेहासिक नगर है जिसका प्रमाण यहाँ पर बने विभिन्न नये और पुराने मन्दिरों में देखने को मिलता है | अद्भुत प्राकृतिक सौन्दर्य और खुशगवार मौसम यहाँ आने वाले पर्यटकों के लिए लाजवाब है |
अल्मोड़ा का इतिहास | Almora History in Hindi
8वी सदी से लेकर 16वी सदी तक यहाँ चन्द्रवंशीय राजाओ का शासन था | 1790 में अल्मोड़ा (Almora) गोरखों के अधिकार क्षेत्र में रहा जिन्होंने लगभग 25 सालो तक राज किया | 1815 में यह अंग्रेजो के अधिकार में आ गया | नगर के पूर्वी भाग में गोरखों द्वारा बनाया गया किला और चन्द्र राजाओं द्वारा बनवाये गये किले , महल एवं मन्दिर उस समय के वास्तुशिल्प की झलक आज भी दर्शाते है | यह नगर आज भी अपने प्राचीन स्वरूप को संजोये हुए है |
अल्मोड़ा (Almora) का स्थानीय बाजार और गलियाँ , गोलाई लिए हुए लकड़ी की खिडकियों वाली इमारते पर्यटकों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करती है | यहाँ के कारीगर ताम्बे की चीजे बनाने में आज भी अपने पारम्परिक तरीको का इस्तेमाल करते है | यहाँ के स्थानीय लोगो द्वारा बुने गये जम्पर और पारम्परिक नरम उनी शाले बहुत प्रसिद्ध है | अल्मोड़ा की खुबसुरत वादिया यहाँ के त्योहारों पर होने वाले लोकनृत्यों एवं गीतों की धुनों में सदैव गुंजायमान होती रहती है जिसे देखकर ऐसा लगता है मानो सपनों की दुनिया में प्रवेश कर गये हो |
अल्मोड़ा (Almora) के दर्शनीय स्थल
राजकीय संग्रहालय – बस स्टैंड के नजदीक स्थित इस संग्रहालय में अल्मोड़ा की पुरानी संस्कृति तथा कत्युरी और चन्द्र राजाओं के समय की दुर्लभ सामग्री प्रदर्शित की गयी है |
Deer पार्क – अल्मोड़ा (Almora) से तीन किमी दूर स्थित NDT डियर पार्क घुमने फिरने के लिए अच्छी जगह है शाम का समय यहाँ बड़ा ही सुहावना लगता है जिसका आनन्द लेने के लिए पयर्टको की भीड़ लगी रहती है |
ब्राईटेन एंड कार्नर – बस स्टैंड से 2 किमी की दूरी पर स्थित इस स्थान से हिमालय की चोटियों के बीच सूर्योदय एवं सूर्यास्त का बेहद खुबसुरत नजारा दिखाई देता है |
कालीमठ – अल्मोड़ा से 5 किमी दूर स्थित कालीमठ एक खूबसूरत प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर पिकनिक स्थल है | यहाँ से पयर्टक अल्मोड़ा नगर की खूबसूरती और बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियों को देखने का आनन्द उठा सकते है |
मोहन जोशी पार्क – V आकार की कृत्रिम झील के चारो ओर मोहन जोशी पार्क बनाया गया है जो कि यहाँ के स्थानीय पर्यटकों का मनपसन्द पिकनिक स्थल है | इन सबके आलावा अल्मोड़ा को कुमाऊ सांस्कृतिक विविधता का केंद्र भी कहा जाता है | यहाँ हर मौसम में कही न कही लगने वाले मेलो में छटा बिखरी रहती है | मकर संक्रांति के अवसर पर बागेश्वर से उत्तरायाणी का विशाल मेला लगता है जिसमे शामिल होकर पर्यटक कुमाऊँ की सांस्कृतिक परम्परा से परिचित हो सकते है |
बिनसर – 7वी एवं 8वी सदी में बिनसर नामक यह खूबसूरत स्थल चन्द्र राजाओं की राजधानी हुआ करता था | यह स्थल अल्मोड़ा (Almora) से मात्र 32 किमी की दूरी पर स्थित है | अगर पर्यटक एकांत जगह पर प्राकृतिक सौन्दर्य के साथ छुट्टिया गुजारना चाहते है तो उनके लिए घने जंगलो के बीच बसी अल्मोड़ा क्षेत्र की सबसे ऊँची चोटी सर्वाधिक उपयुक्त स्थान है | गजब के प्राकृतिक सौन्दर्य के साथ साथ चाँदनी में नहाई बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियाँ देखकर पर्यटक मन्त्रमुग्ध हो जाते है |
कयरमल – 800 साल पुराना यह मन्दिर कोणार्क के सूर्य मन्दिर के बाद देश का दूसरा महत्वपूर्ण सूर्यमंदिर है | मन्दिर के मुड़े हुए स्तम्भ , दरवाजे और आकृतियाँ उस समय की शिल्पकला के अनुपम उदाहरण है |
सीतला खेत – यह छुट्टिया बिताने के लिए आदर्श जगह है | यहाँ के आस-पास के जंगल में काफी मात्रा में फल-फूल और आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के पौधे है | सीतला खेत से 2 किमी नीचे खुंट गाँव है जो कि स्वतंत्रता सेनानी गोविन्द वल्लभ पन्त का पैतृक गाँव है |
अल्मोड़ा पहुचने के मार्ग
- रेलमार्ग – अल्मोड़ा (Almora) का निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम है जहां से देश के विभिन्न शहरों से सीधी रेल सेवाए उपलब्ध है |
- सड़क मार्ग – अल्मोड़ा उत्तर प्रदेश , दिल्ली ,हरियाणा ,राजस्थान मध्यप्रदेश आदि राज्यों से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है | इन राज्यों से सीधी बस सेवा के अलावा स्थानीय बस सेवा भी यहाँ के लिए नियमित उपलब्ध रहती है |
Comments
Post a Comment