
महाराष्ट्र के प्रसिद्ध एतेहासिक नगर औरंगाबाद (Aurangabad) की स्थापना 1610 ई. में गुलाम रह चुके एक हबशी मलिक अम्बर ने “खिड़की” नाम से की थी | उसके बाद 1626 ई. में मलिक अम्बर के पुत्र फतेह्खान ने इसका नाम बदलकर फतेहपुर रख दिया | मुगलकाल में शाहजहाँ के पुत्र औरंगजेब को जब दक्षिण का सूबेदार नियुक्त किया गया तो 1653 ई. में उसने शहर को दक्षिण की राजधानी घोषित करते हुए औरंगाबाद (Aurangabad) नाम दिया |
चारो ओर पहाडियों से घिरा हुआ आज औरंगाबाद (Aurangabad) एक खुबसुरत शहर है | यहाँ की औद्योगिक प्रगति को देखते हुए अब इसे महानगर की श्रेणी में रखा जा रहा है | “52 दरवाजो वाले शहर” के नाम से मशहूर इस शहर का अपना पुराना आकर्षण और सौन्दर्य आज भी बरकारर है | यहाँ की चौड़ी चौड़ी साफ़-सुथरी सड़को , फव्वारों से सुज्ज्जित चौराहे और अनेक दर्शनीय स्थल सैलानियों को आकर्षित करते है | यहाँ की एतिहासिक धरोहरों पर पाषाणकाल से चले आये राजवंशो की कलात्मक अभिरुचि की छाप साफ़ दिखाई देती है |
औरंगाबाद (Aurangabad) के प्रमुख दर्शनीय स्थल
औरंगाबाद की गुफाये – शहर के ठीक बाहर की ओर पहाड़ो को तराशकर बनाई गयी ये गुफाये छठी शताब्दी से पहले की है | इन गुफाओं में जातक कथाओं एवं बौद्धकालीन बोधित्सव की मुर्तिया बनी है | ये गुफाये पर्यटकों के लिए सुबह से शाम तक खुली रहती है |
बीबी का मकबरा – औरंगजेब के बेटे आजमशाह ने अपनी माँ राबिया दुरानी की याद में 1679 ई. में इस मकबरे का निर्माण करवाया जो मुगल एवं फारसी वस्तुशिल्ल्प का उत्कृष्ट उदाहरण है | दक्षिण का ताजमहल कहा जाने वाला “बीबी का मकबरा” के निर्माण के बारे में “तारीकनामा-ए-औरंगजेब” नामक पुस्तक में लिखा है कि इसके निर्माण में लगभग 7 करोड़ रूपये खर्च हुए थे जो उस दौर के लिए बहुत बड़ी रकम थी |
दक्कन पठार पर स्थित इस बेहतरीन मकबरे के शिल्पकार अताउल्ला खान और हंसपत राम थे | मकबरे के आसपास बने खुबसुरत बगीचे ,फव्वारे एवं तालाब आदि इस स्थान की भव्यता में इजाफा करते है | चाँदनी रात में ताजमहल के इस प्रतिरूप का सौन्दर्य अकल्पनीय है | इसके गुम्बदो पर की गयी बारीक नक्काशी और मकबरे का सौन्दर्य पयर्टको को आश्चर्यचकित कर देता है |
पनचक्की – 1645 ई. में मलिक अम्बर द्वारा निर्मित पनचक्की उनके तकनीकी ज्ञान की उत्कृष्टता का प्रतीक है | इन पनचक्की से तब अनाज पीसा जाता था जो लगभग 5वी सदी बाद भी चालु हालत में है और यही पर्यटकों के लिए हैरानी का कारण है | पनचक्की के आस-पास सुंदर फ़व्वारे और बगीचे है | यह स्थान औरंगजेब के धर्मगुरु एवं सूफी संत की याद में सहेजे है |
सोनेरी महल – औरंगाबाद (Aurangabad) के पश्चिम की ओर स्थित सोनेरी महल यहाँ के राजपूत सरदार पहाड़सिंह ने बनवाया था | यहाँ स्थित राज्य के पुरातत्व विभाग का संग्रहालय दर्शनीय है |
पैठण – औरंगाबाद (Aurangabad) से 50 किमी दूर स्थित इस स्थान को संतो की भूमि कहा जाता है | एक समय पैठण का रोम से व्यापारिक संबध था | सातवाहन वंश के काल में पैठण सातवाहन साम्राज्य की राजधानी रहा जो अज भी दुनिया भर में सोने-चाँदी के तानेबाने से बुनी पैठणी साड़ी के लिए प्रसिद्ध है |
सिद्धार्थ उद्यान – औरंगाबाद महानगर निगम द्वारा निर्मित सिद्धार्थ उद्यान अपने सौन्दर्य से पर्यटकों का मन मोह लेता है | यहाँ बच्चो से लेकर हर उम्र के लोगो के लिए हरे-भरे बाग़ , झूले , छोटा थिएटर , झरने , खिलौना , गाडी और प्राणी संग्रहालय जैसे मनोरंजन के माध्यम उपलब्ध है |
बेगम का बाग़ – औरंगाबाद (Aurangabad) में मुगल शैली से बना बानो बेगम का बाग़ एवं परियो का तालाब भी पर्यटकों के लिए देखने लायक स्थान है |
पीतलखोरा की गुफाये – औरंगाबाद शहर से 78 किमी दूर स्थित पीतलखोरा की गुफाये ईसापूर्व शताब्दी से दुसरी शताब्दी के बीच बनाई गयी थी | यहाँ 13 गुफाये है जिनमे बौद्ध धर्म के हीनायत पन्थ को अलग अलग रूपों में पत्थरों को तराशकर दिखाया गया है | अपनी महीन कारीगरी और नक्काशी के कारण गुफा नम्बर 3 का चैतन्य कक्ष ख़ासा लोकप्रिय है जो विशाल प्रस्तर से बना हुआ है | यही से कुछ दूरी पर स्थित है गौताला अभयारण्य , जहा सैलानी जंगली जानवरों को बहुत नजदीक से देख सकते है |
औरंगाबाद पहुचने के मार्ग
- वायु मार्ग – यहाँ का हवाई अड्डा शहर से केवल 10 किमी दूर है जहां से दिल्ली , मुम्बई , जयपुर एवं उदयपुर आदि शहरों से इंडियन एयरलाइन्स की उड़ाने उपलब्ध है |
- रेलमार्ग – दक्षिण-मध्य रेल के मनमाड-सिकन्दराबाद मार्ग पर बसे होने के कारण औरंगाबाद देश के कई प्रमुख शहरों से रेलमार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है | यहाँ से देश के सभी प्रमुख नगरो के लिए रेल सेवाए उपलब्ध है |
- सडक मार्ग – यहाँ के लिए जलगांव , पुणे ,शिरडी ,सुरत ,अहमदाबाद , इंदौर , नागपुर , नासिक और गोवा के लिए निरंतर बीस सेवाए उपलब्ध है |
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