
प्राचीन परम्परा , प्राकृतिक सौन्दर्य और आधुनिकता का अनोखा संगम बैंगलोर (Bangalore) , कर्नाटक की राजधानी एवं पर्यटन की दृष्टि से हमेशा आकर्षण का केंद्र रहा है | देश का 5वा महानगर बैंगलोर (Bengaluru) अपने आकर्षक बागो के लिए मशहूर है | यहाँ की सड़को के दोनों ओर कतार में लगे हुए हरे-भरे पेड़ ,बड़ी-बड़ी भव्य इमारते और सजे-धजे बाजार पर्यटकों का मन अनायास ही मोह लेते है |
भारत की Silicon Valley कहे जाने वाले बैंगलोर (Bengaluru) ने आज भी अपनी खूबसूरती को नही खोया है | यहाँ के प्राचीन किले और मन्दिर आज भी इस शहर की वैभवशाली स्थापत्य कला की निशानी के तौर पर सुरक्षित है | बैंगलोर (Bangalore) की स्थापना का श्रेय विजयनगर के एक सेनापति कैमगोंडा को जाता है |
कैमगोंडा पहला व्यक्ति था जिसने 1537 में इस शहर की नींव डाली और शहर के चारो ओर निगरानी मीनार (Tower) बनाकर इस शहर की सीमा तय कर दी जबकि आज का बैंगलोर (Bangalore) उससे कही ज्यादा विस्तार पा चूका है | परम्परा के अनुरूप विख्यात इस शहर के आस-पास और भी अनेक दर्शनीय स्थल है जो इस प्रकार है |
बंगलौर (Bangalore) के दर्शनीय स्थल
कब्बन पार्क – बैंगलोर (Bangalore) आने वाले पर्यटकों के लिए एक बड़ा आकर्षण 1864 ई. में बना कब्बन पार्क है | सैकड़ो एकड़ में फैले कब्बन पार्क में नरम-नरम घास पर बने छायादार वृक्षों के बीच घुमने का सुख निराला ही है | विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधों और फूलो के बीच यहाँ लोगो को प्रातःकाल भ्रमण करते देखा जा सकता है | इस पार के आस-पास कॉलोनी शैली में बने भवनों में Public Library भवन और उच्च न्यायालय भवन पार्क की खूबसूरती को चार चाँद लगाते है |
विधानसभा भवन – आजादी से पहले बनी इमारतो में पारम्परिक स्थापत्य कला की झलक देता ग्रेनाईट पत्थरों से बना यह पांच मंजिला भव्य भवन 46 मीटर ऊँचा है जो दूर से किसी मन्दिर की तरह दिखाई देता है | 213 मीटर लम्बी और 106 मीटर चौड़ी इस इमारत में अनेक गुम्बद ,श्वेत स्तम्भों और मेहराबो ने इसकी खूबसूरती को बढाया है | विधानसभा भवन में प्रवेश से पहले अनुमति लेना जरुरी है | इमारत के गुम्बद पर लगा राष्ट्रीय चिन्ह इसे भव्य एवं आकर्षक बनाता है | विधानसभा भवन के ठीक विपरीत दो मंजिला इमारत में हाई कोर्ट है |
लाल बाग़ – लगभग 240 एकड़ क्षेत्र में फैले इसे बाग़ का निर्माण हैदरअली ने 1760 में करवाया था जिसके बाद से उसके बेटे टीपू सुल्तान ने काफी विस्तार किया और अनेक सुधर करवाए | आज लाल बाग़ को देश के उत्कृष्ट Botanical Garden में से एक माना जाता है | इसमें हजारो जातियों एवं प्रजातियों के पेड़-पौधे है | लदंन के क्रिस्टल पैलेस की तर्ज पर बना Glass House भी पर्यटकों को खूब आकर्षित करता है | यहाँ हर साल फल-फूलो , पौधों एवं सब्जियों की अनेक प्रदर्शनिया लगाई जाती है | यहाँ अनेक ऐसे वृक्ष है जो 100 साल से भी पुराने है | यहाँ बने ताल , फव्वारे और गुलाब के बाग़ इसकी खूबसूरती का अनूठा रंग बढाते है |
बुल टेम्पल – द्रविड़ शैली में बने Bull Temple की खासियत यह है कि यहाँ नन्दी बैल की मूर्ति को एक ही पत्थर को तराशकर बनाया गया है जिसकी ऊँचाई 4 मीटर तथा लम्बाई 6 मीटर है |
टीपू का किला – बैंगलोर (Bangalore) के संस्थापक कैमगोंडा ने 1537 ई. में इस किले का निर्माण करवाया जिसे लगभग दो सदी बाद हैदरअली और उसके बेटे टीपू सुल्तान ने ठीक करवाया | सामरिक दृष्टि से यह किला 18वी सदी की स्थापत्य शैली का बेहतरीन उदारहण है | यह किला टीपू और अंग्रेजो के बीच हुए संघर्ष का वास्तविक मौन साक्षी है | किले की पहली मंजिल पर टीपू और हैदरअली की जिन्दगी को दर्शाती महत्वपूर्ण चीजो का संग्रहालय है |
अल्सुर झील – लगभग डेढ़ वर्ग किमी क्षेत्र में फ़ैली यह झील नौकायन एवं तैराकी की दृष्टि से पर्यटकों को ख़ास आकर्षित करती है | झील में बने छोटे छोटे टापुओ पर स्थानीय लोगो को पिकनिक मनाते देखा जा सकता है | यहाँ आकर पर्यटक झील के आस-पास प्राकृतिक दृश्यों का नजारा देख सकते है |
संग्रहालय – देश के अनेक संग्रहालयो में से एक यह संग्रहालय कस्तूरबा रोड पर कब्बन पार्क से आगे की ओर बना है | यहाँ प्राचीन सिक्के ,शिलालेख और पुराने चित्रों का संग्रह देखने के साथ ही पर्यटक बैंगलोर (Bangalore) की झांकी देख सकते है | अंदर ही वेंकटप्पा आर्ट गैलरी है जिसमे मैसूर शासको के दरबार के मशहूर कलाकार वेंकटप्पा द्वारा बनाये गये खूबसूरत चित्र एवं प्रतिमाये रखी हुयी है | इस संग्रहालय में प्राचीन आभूषण का अनोखा संग्रह भी देखने योग्य है |
विश्वेश्वरया संग्रहालय – राष्ट्रीय संग्रहालय से आगे कस्तूरबा रोड पर बना यह संग्रहालय आधुनिक कर्नाटक के निर्माता एम् विश्वेश्वरया को समर्पित किया गया है | इस संग्रहालय में आकर पर्यटक देश की औद्योगिक और तकनीकी प्रगति की झलक देख सकते है |
बंगलौर पैलेस – बंगलौर (Bangalore) में वोद्यार राजाओं ने इंग्लैंड के विंडसर कैसल से प्रभावित हो उसी के अनुसार इस महल का निर्माण करवाया | ट्युडर शैली से बने इसे एतेहासिक महल को इस शहर के दिल माना जाता है जो लगभग 45,000 वर्ग फुट क्षेत्र में फैला है |
नन्दी हिल्स – बैंगलोर (Bangalore) से लगभग 60 किमी दूर स्थित यह पहाडी कभी टीपू सुल्तान की सैरगाह थी | समुद्रतल से 1479 मीटर की उंचाई पर स्तिथ इस पहाडी के आस-पास का विहंगम दृश्य पर्यटकों को बेहद पसंद आता है | यहाँ एक हजार साल पुराना एक मन्दिर भी है |
मेकेटाट – बेंगलोर (Bengaluru) से 98 किमी दूर इस स्थान पर कावेरी नदी दो इतनी सँकरी पहाडियों के बीच से होकर गुजरती है कि बकरी भी के किनारे छलांग लगाकर दुसरे किनारे पर जा सकती है इसलिए इस स्थान का नाम मेकेटाट यानि बकरी की छलांग पड़ा |
पर्ल वैली – यह एक खुबसुरत पिकनिक स्थल है जिसकी दुसरी बैंगलोर से 45 किमी है | यहाँ के खुबसुरत जलप्रपात है जो 90 मीटर की उंचाई से गिरता है | ऊँचाई से गिरने पर पानी की बुँदे मोतियों सा आभास देती है जिसके कारण ही इसे Pearl Valley कहा जाता है |
बनेरघट्टा – घने जंगलो के घिरा यह राष्ट्रीय पार्क वन्यजीवो के लिए विकसित किया गया है जो 104 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला है | यहाँ अनेक प्रकार के वन्यजीवो एवं पक्षियों का बसेरा है | यहाँ की विशेषता शेर और बाघ की सफारी है | यहाँ का लघु चिड़ियाघर , मगरमच्छ और फ़ार्म खासतौर पर देखने लायक है |
हेसारघाट – बंगलौर (Bangalore) से 29 किमी की दूरी पर स्थित यह कृत्रिम झील है | छुट्टी वाले दिन यहाँ स्थानीय लोग पिकनिक मनाने आते है |
बाल भवन – बच्चो के मनोरंजन के लिए बना यह बाल भवन अपने आप में अनोखा है | यहाँ आकर बच्चे Toy Train , नाव सिनेमा , घुड़सवारी आदि का आनन्द उठाते है | बाल भवन के पास ही हीरे के आकार का एक Aquarium है जहां बच्चे समुद्र के सतरंगी संसार के बारे में जान एवं समझ सकते है |
बंगलौर पहुचने के मार्ग
- वायु मार्ग – बंगलौर (Bangalore) के लिए कोलकाता , मुम्बई , दिल्ली , चेन्नई , हैदराबाद ,तिरुवनंतपुरम , पणजी आदि से निरंतर उड़ाने उपलब्ध है | बंगलौर का एअरपोर्ट शहर से 6 किमी दूर है |
- रेल मार्ग – बैंगलोर रेल मार्ग देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है
- सडक मार्ग – निकटवर्ती राज्यों के सभी प्रमुख नगरो से यहाँ के लिए अच्छी बस सेवाए उपलब्ध है |
Comments
Post a Comment