
हिन्दू धर्म के अंतर्गत उत्पन्न भक्ति आन्दोलन मध्य युग के धार्मिक जीवन की एक महान विशेषता थी | भक्ति आन्दोलन के प्रवर्तकों ने जाति प्रथा का विरोध किया , मूर्ति पूजा को आवश्यक नही बताया और एकेश्वरवाद का समर्थन किया | भक्ति आन्दोलन का विकास 7वी और 12वी शताब्दियों के बीच दक्षिण भारत में हुआ | शैव नयनारो और वैष्णव अलवारो ने मुक्ति के लिए ईश्वर की वैयक्तिक भक्ति पर जोर दिया | इस आन्दोलन का प्रमुख प्रचारक शंकराचार्य माने जाते है | यह हिन्दुओ का सुधारवादी आन्दोलन था | आइये भक्ति आन्दोलन के प्रमुख संतो के बारे में आपको विस्तार से बताते है |
शंकराचार्य
शंकराचार्य का जन्म पुरना नदी के किनारे कालदी (मालाबार ,केरल) नामक स्थान पर 788 ई. में हुआ था | उन्हें प्रच्छन बौद्ध भी कहा गया है क्योंकि उन पर बौद्ध धर्म के शून्यवाद का प्रभाव था | उन्होंने ज्ञान मार्ग के अंतर्गत निर्गुण ब्रह्म की उपासना पर बल दिया और अद्वैतवाद दर्शन (जो दो न हो) प्रतिपादित किया था | शंकराचार्य ने बद्रीनाथ में ज्योति पीठ , द्वारिका में शारदा पीठ , पुरी में गोवर्द्धन पीठ एवं मैसूर में श्रुन्गेरी पीठ की स्थापना की थी |
रामानुजाचार्य
इनका जन्म आंध्रप्रदेश के त्रिपुती नामक स्थान पर हुआ था | वे सगुण ईश्वर में विश्वास करते थे | उन्होंने बदरायन के भाष्य तथा वेदांत सूत्र पर भाष्य लिखा था | उन्होंने विशिष्ट द्वैतवाद प्रतिपादित कर शुद्रो को भी अपना शिष्य बनाया | उन्होंने अपनी शिक्षा यादव प्रकाश एवं यामुती मुनि से प्राप्त की |
निम्बार्क
वे राधाकृष्ण के उपासक थे और उन्हें शंकर का अवतार मानते थे | उन्होंने द्वैताद्वैत दर्शन प्रतिपादित किया | वे रामानुजाचार्य के समकालीन थे |
माधवाचार्य
उन्होंने द्वैतवाद दर्शन सिद्धांत प्रतिपादित किया और वे आत्मा एवं परमात्मा को अलग अलग मानते थे | वे लक्ष्मीनारायण के उपासक थे |
वल्लभाचार्य
उनके पिता लक्ष्मणभट्ट तेलंगाना के ब्राह्मण थे और जब वे काशी की यात्रा पर थे तब वल्लभाचार्य का जन्म हुआ | उन्होंने शुदाद्वैत्वाद सिद्धांत का प्रतिपादन किया | वे वैष्णव सम्प्रदाय के अंतर्गत कृष्ण भक्ति शाखा के प्रमुख संत थे | वे श्रीनाथजी के रूप में कृष्ण भक्ति पर बल देते थे | उन्होंने सुबोधिनी और सिद्धांत रहस्य जैसे धार्मिक ग्रन्थ लिखे | वल्लभाचार्य के पुत्र विट्ठलनाथ ने कृष्णभक्ति को ओर अधिक लोकप्रिय बनाया | अकबर ने उन्हें गोकुल और जैतपुरा की जागीरे प्रदान की | औरंगजेब के समय श्रीनाथजी की मूर्ति को उदयपुर पहुचा दिया जहां वे नाथद्वारा के नाम से विख्यात हुयी |
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रामानन्द
ये रामानुज के शिष्य थे जिनका जन्म प्रयाग में हुआ था | उन्होने सीता-राम की भक्ति पर बल दिया | उन्होंने सभी जातियों और स्त्री-पुरुषो को समान स्थान दिया | वे भक्ति आन्दोलन को दक्षिण भारत से उत्तर भारत में लाये | उनके 12 शिष्यों में धन्ना जाट था सेनदास नाइ था रविदास चमार था और कबीर जुलाहा था |
कबीर
वे सिकन्दर लोदी के समकालीन थे | उन्होंने हिन्दू एवं मुस्लमानो को निकट लाने का प्रयत्न किया | कबीर ने भक्ति को ही मोक्ष प्राप्ति का मार्ग बताया | उनके दोहों का संकलन बीजक में संग्रहित है जिसका संकलन भोगदास ने किया था | कबीर और धर्मदास के बीच हुए संवादों का संकलन अमरमूल है | उनकी मृत्यु मगहर (संत कबीर नरग ,उत्तर पदेश) में हुयी थी |
गुरुनानक
गुरुनानक का जन्म लाहौर के तलवंदी नामक स्थान पर एक खत्री परिवार में हुआ था | मूर्तिपूजा ,तीर्थयात्रा तथा धार्मिक आडम्बरो के कट्टर विरोधी थे लेकिन कर्म और पुनर्जन्म में विश्वास रखते थे | उन्होंने निराकार ईश्वर की कल्पना की जिसे अकाल पुरुष की संज्ञा दी गयी | वे सूफी संत बाबा फरीद से प्रभावित् थे | उन्होंने शिष्य बनाये जो सिख कहलाने लगे | उनका निधन करतार में हुआ था |
चैतन्य
इनका जन्म बंगाल के नादिया नामक स्थान पर हुआ था | इनका वास्तविक नाम विश्वम्भर था पर बचपन में इनका नाम निमाई था | शिक्षा पुरी होने के बाद उन्हें विद्यासागर की उपाधि दी गयी | इन्होने कृष्ण को अपना आराध्य माना | इनके प्रयासों से बंगाल और ओडिशा नरेश प्रताप रूद्र गजपति उनके शिष्य थे | चैतन्य महाप्रभु का देहावसान पुरी में हुआ था |
दादूदयाल
इनका जन्म अहमदाबाद में एक जुलाहा परिवार में हुआ था | वे कबीर के अनुयायी थे | उन्होंने ब्रह्म सम्प्रदाय की स्थापना की | सुंदरदास , रज्जब और सूरदास उनके शिष्य थे | उनकी मृत्यु राजस्थान के नारायण गाँव में हुयी थी |
रविदास
ये रामानन्द के शिष्य थे | वे निर्गुण ब्रह्मं की उपासना पर बल देते थे | उन्होंने अपने विचार ब्रजभाषा में रखे |
शंकरदेव
शंकरदेव ने असम में वैष्णव मत को लोकप्रिय बनाया | इनको नारंगदेव भी कहा जाता है | उन्होंने एकशरण सिद्धांत प्रतिपादित किया था |
मीराबाई
ये मेड़ता के राजा रतनसिंह राठौर की पुत्री थी जिनका विवाह राणा सांगा के पुत्र भोजराज के साथ हुआ था | वे भगवान कृष्ण की भक्त थी और उन्होंने राजस्थानी एवं ब्रजभाषा में गीतों की रचना की | इन्होने कृष्ण की उपासना प्रेमी और पति के रूप में की |
सूरदास
इनका जन्म रुनकता नामक गाँव में हुआ था | वे अकबर और जहांगीर के समकालीन थे | उन्होंने ब्रजभाषा में सुरसारावली , सूरसागर एवं साहित्य लहरी की रचना की | वे सगुण भक्ति के उपासक थे |
तुलसीदास
इनका जन्म बाँदा जिले के राजपुर गाँव में हुआ था | वे अकबरसमकालीन थे | अन्य रचना रामचरितमानस अवधी भाषा में है | इनकी रचनाये है गीतावली , कवितावली , विनयपत्रिका आदि |
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